राजभवन ट्राइबल सेल की शिफ्टिंग टली, मंत्री विजय शाह का 2.66 करोड़ का ऑफिस बना रोड़ा
समझें क्या है पूरा मामला...
मध्य प्रदेश के आदिवासी कल्याण मंत्री विजय शाह के लिए आदि भवन में नया ऑफिस बनाया जा रहा है। इस ऑफिस पर दो करोड़ 66 लाख रुपए खर्च होने हैं। इसी वजह से राजभवन में चल रहे ट्राइबल सेल का ऑफिस पांच महीने से शिफ्ट नहीं हो पाया है। राजभवन ट्राइबल सेल की शिफ्टिंग के लिए नवंबर 2025 में ही दो करोड़ 50 लाख रुपए मंजूर हो गए थे। टेंडर पहले रद्द हुए, फिर दोबारा निकाले गए और अब काम एक हफ्ते में शुरू होने की बात कही जा रही है।
राजभवन से क्यों बाहर जा रहा है ट्राइबल सेल?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल का कार्यकाल 07 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है। उससे पहले एमपी राजभवन में चल रहे ट्राइबल सेल का ऑफिस बाहर शिफ्ट करना जरूरी है। इसके लिए अनुसूचित जनजाति (अजजा) विभाग की नई बिल्डिंग आदि भवन को चुना गया है। शिफ्टिंग से पहले ऑफिस की इंटीरियर, सजावट और फर्नीचर का काम होना जरूरी है।
ट्राइबल सेल के लिए नवंबर 2025 में ही 2 करोड़ 50 लाख रुपए की स्वीकृति हो गई थी। बीडीसी (BDC - Building Development Corporation) ने टेंडर भी जारी कर दिए थे, लेकिन तकनीकी खामी बताकर उन्हें रद्द कर दिया गया।
मंत्री के ऑफिस के कारण अटकी प्रक्रिया
जनवरी 2026 में एमपी सरस (MP SARAS - Madhya Pradesh Tribal Welfare Residential and Ashram Educational Institutions Society) के लिए अलग से पैसा मंजूर हुआ था। फरवरी 2026 में दोनों कामों के लिए एकसाथ संयुक्त टेंडर जारी किए गए थे। राजभवन की ओर से कई बार फॉलोअप भी किया गया कि ट्राइबल सेल का काम आखिर शुरू क्यों नहीं हो रहा।
बीडीसी के ईएनसी (ENC - Engineer in Chief) अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पहले टेंडर रद्द हो गए थे। बाद में एमपी सरस की स्वीकृति भी आई तो दोनों टेंडर एकसाथ कर दिए। उन्होंने बताया कि सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है और एक हफ्ते में काम शुरू हो जाएगा।
पहली बार बन रहा है चेयरमैन का ऑफिस
एमपी सरस के चेयरमैन का पद हमेशा से विभाग के मंत्री के पास रहा है। इसी वजह से अब तक कभी चेयरमैन के लिए अलग ऑफिस नहीं बना था। मंत्री अपने मंत्रालय में आवंटित कमरे से ही सारा काम चलाते रहे।
अब पहली बार मंत्री की खुद की पहल पर चेयरमैन का अलग ऑफिस बनाया जा रहा है। यह ऑफिस आदि भवन की पांचवीं मंजिल पर होगा। इसी पांचवीं मंजिल पर ट्राइबल सेल का ऑफिस भी बनना है।
अभी एमपी सरस की टीम आउटसोर्स कर्मचारियों समेत आदि भवन की दूसरी मंजिल से काम कर रही है।
आदि भवन में तीन विंग, बिजली बिल का भी झंझट
आदि भवन में फिलहाल तीन अलग-अलग विंग काम कर रही हैं। पहली है अजजा कमिश्नर, दूसरी है टीएडीपी (TADP - Tribal Area Development Programme) और तीसरी है एमपी सरस। भवन बड़ा होने की वजह से तीनों ने तय किया है कि वे बारी-बारी से 4-4 महीने का बिजली का बिल भरेंगी।
इसी बात को लेकर भी एमपी सरस और उनके चेयरमैन ने अपना अलग और नया ऑफिस बनाने की मांग की है, ताकि पहचान और खर्च दोनों अलग रहें।
राजभवन को देरी की वजह नहीं पता
ट्राइबल सेल के अध्यक्ष दीपक खांडेकर ने माना कि उनका ऑफिस शिफ्ट हो रहा है। वहीं, उन्होंने कहा कि देरी क्यों हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है और न ही उन्होंने इस बारे में पूछा।
अजजा विभाग के ईई (EE - Executive Engineer) प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि यदि काम अलग-अलग होता तो एक हिस्सा पहले और दूसरा बाद में होता। इसलिए दोनों काम एकसाथ शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने माना कि बीडीसी की टेंडर प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है।
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