मोहन कैबिनेट की बैठक आज, एमपी के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल कॉरिडोर समेत कई अहम प्रस्तावों को मिल सकती है मंजूरी
Amresh Kushwaha | Oct 15, 2026, 08:23 IST
आज मध्यप्रदेश की कैबिनेट बैठक होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे कैबिनेट बैठक होगी। इसमें इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। मंजूरी मिली तो अलग कंपनी बनेगी। सांदीपनि स्कूल बसों का किराया और महिला बाल विकास के नए कार्यालय भी एजेंडे में हैं।
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
जानकारी के अनुसार चुनिंदा जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। यानी यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ शहरों को जोड़ने का रास्ता नहीं होगा। यह नए उद्योग लगाने का आधार भी बनेगा।
अलग कंपनी क्या करेगी
कंपनी को जमीन अधिग्रहण के अधिकार भी दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव गुरुवार, 15 अक्टूबर को मोहन कैबिनेट में आ सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही कंपनी बनेगी। फिर एक साल में तय किया जाएगा कि एक्सप्रेस-वे के आसपास कहां-कहां औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएं।
उद्योग विभाग ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जमीन की उपलब्धता और सड़क संपर्क की संभावनाएं तलाश रहा है।
धरमपुरा में 954 एकड़ का पार्क
यह जगह जबलपुर से 40 किलोमीटर दूर है। सिवनी यहां से 156 किलोमीटर, नागपुर 260 किलोमीटर और भोपाल 297 किलोमीटर दूर है। यानी यह जगह जबलपुर, सिवनी और नागपुर की तरफ के बाजारों से जुड़ सकती है। यह बात दूरी के आंकड़ों से समझी गई है।
आष्टा में करीब 21 हजार एकड़
रिपोर्ट में जमीन का ब्योरा भी है। इसमें छह हजार हेक्टेयर सरकारी और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन है। साथ ही पांच हजार हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करना होगा। दोनों संख्याएं जोड़ने पर कुल 8482 हेक्टेयर से ज्यादा बनती हैं। इसलिए यह संख्या स्पष्ट नहीं है। इसकी पुष्टि उद्योग विभाग से जरूरी है।
निजी जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा किसानों के लिए अहम होता है। मुआवजे और पुनर्वास की जानकारी रिपोर्ट में नहीं है। यह भी देखना होगा कि स्थानीय लोगों की राय कैसे ली जाएगी।
एजेंडे में और क्या है
सांदीपनि स्कूलों की बसों का किराया बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। प्रस्ताव के मुताबिक किराया राज्य की जगह कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति तय करेगी। प्रदेश के 19 जिलों में बस संचालन के लिए ऑपरेटर नहीं मिलने से करीब 1.5 लाख बच्चे परेशान हैं। यानी किराया बढ़ाने से ऑपरेटर आने की उम्मीद जताई गई है।
इसके अलावा विभिन्न विभागों की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। यह भी अभी प्रस्ताव है।
अब आगे क्या होगा
इस कॉरिडोर से रोजगार और निवेश की उम्मीद जताई जाती है। पर कितना निवेश आएगा और कितने रोजगार बनेंगे, इसका आंकड़ा रिपोर्ट में नहीं है। जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण और स्थानीय लोगों की राय भी अहम सवाल रहेंगे।
मान लीजिए प्रस्ताव मंजूर हो गया। तब भी असली काम जमीन तय करने और कंपनी बनाने से शुरू होगा। इसलिए उद्योग लगने में समय लग सकता है।
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