मुरैना अस्पताल में नर्स की बदसलूकी, मरीज के परिजन पर फेंकी बॉटल वीडियो हुआ वायरल
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के मुरैना जिला अस्पताल में गुरुवार 18 जून को एक चौंकाने वाली घटना हुई।
- मेडिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज की ग्लूकोज की बॉटल खत्म हो गई।
- परिजनों के बार-बार कहने के बाद भी नर्स नहीं आई।
- अटेंडर ने जब मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो नर्स भड़क गई और उस पर बॉटल फेंक दी।
- वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या हुआ मुरैना जिला अस्पताल में?
मुरैना जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार मेडिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज की ग्लूकोज की बॉटल बदलने को लेकर नर्स और मरीज के अटेंडर के बीच विवाद हो गया।
गुरुवार दोपहर मेडिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज की ग्लूकोज की बॉटल खत्म हो गई थी। मरीज के परिजन नई बॉटल लगाने के लिए कई बार नर्सिंग स्टाफ के पास पहुंचे, लेकिन काफी देर तक कोई भी नर्स बॉटल बदलने नहीं पहुंची। यह देरी किसी भी मरीज के परिजन को परेशान कर सकती है। खासकर तब, जब मरीज अस्पताल के बिस्तर पर हो और उसका इलाज रुका हो।
वीडियो बनाया तो नर्स भड़की
इससे नाराज होकर मरीज के अटेंडर ने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। वायरल वीडियो में एक स्टाफ नर्स वीडियो बना रहे युवक की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। वीडियो में वह मोबाइल छीनने की कोशिश करती नजर आती है। अटेंडर का आरोप है कि इसी दौरान नर्स ने गुस्से में ग्लूकोज की बॉटल उठाकर उसकी ओर फेंक दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
वीडियो में नर्स क्या बोलीं ?
मुरैना जिला अस्पताल के इस वायरल वीडियो में नर्स को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, सरकारी अस्पताल में क्यों आते हो, प्राइवेट में जाकर इलाज कराओ। नर्स की यह टिप्पणी लोगों को सबसे ज्यादा चुभी। अस्पताल स्टाफ का यह रवैया बेहद आपत्तिजनक माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यह पहली बार नहीं है जब मुरैना जिला अस्पताल विवादों में आया हो। पहले भी यहां की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
अस्पताल प्रशासन पर सबकी नजर
वायरल वीडियो ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर अस्पताल प्रशासन पर है कि मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है। हालांकि अभी दोनों में से किसी भी पक्ष द्वारा कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
यह घटना केवल एक नर्स के व्यवहार का मामला नहीं है। यह सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में जवाबदेही के व्यापक सवाल को सामने लाती है। मरीज के परिजन अपनों की देखभाल की उम्मीद में सरकारी अस्पताल आते हैं। ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की भावना के खिलाफ है।
ये खबरें भी पढ़ें...
मुरैना रेल हादसा: प्रत्यक्षदर्शी महिला बोलीं- मोबाइल के चार्जर में लगी आग, जिससे मची भगदड़
कचरा बनेगा कमाई का जरिया: अब कचरे से बनेगी गैस, चमकेंगे प्रदेश के 8 बड़े शहर
सीएम मोहन यादव का पटवारी पर फिर हमला, बोले- मधु भैया ने चौकड़ी भुला दी, अभी तक होश में नहीं
सिंगरौली अस्पताल में सुरक्षा गार्ड ने लगाए मरीजों को इंजेक्शन, डॉक्टर-नर्स गायब!