मुरैना में फर्जी दिव्यांग शिक्षकों का बड़ा खुलासा, 47 संदिग्धों पर जांच तेज
समझें क्या है पूरा मामला
- मुरैना में 47 शिक्षकों के प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए।
- नेता प्रतिपक्ष की शिकायत पर जांच शुरू हुई।
- जांच में लापरवाही पर अपर कलेक्टर नाराज हुए।
- DEO से सभी प्रमाण पत्र तलब किए गए हैं।
- पहले भी 70 से अधिक फर्जी मामले सामने आए थे।
कहां से शुरू हुआ मामला
सबलगढ़ निवासी अनार सिंह जादौन ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को शिकायत भेजी। शिकायत में मुरैना जिले के फर्जी दिव्यांग शिक्षकों और पटवारियों का जिक्र था। उप नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला लोक शिक्षण विभाग तक पहुंचाया। इसके बाद लोक शिक्षण विभाग के संचालक ने 18 मार्च को मुरैना कलेक्टर को पत्र लिखा। पत्र में 47 संदिग्ध दिव्यांग शिक्षकों की जांच के आदेश दिए गए और उनके नाम, पते व पदस्थी की सूची भी भेजी गई।
DEO कार्यालय की लीपापोती
कलेक्टर ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को जांच के निर्देश दिए। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अस्पताल प्रबंधन को केवल नामों की सूची थमा दी। प्रमाण पत्र नहीं दिए। 24 अप्रैल को सिविल सर्जन डॉ. जीएस तोमर ने कलेक्टर को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि बिना प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड की जांच करना संभव नहीं है। यह भी पता नहीं चल पा रहा कि इन 47 लोगों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बने भी हैं या नहीं।
अपर कलेक्टर ने लिया एक्शन
11 जून को जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक में यह मामला फिर उठा। इसके बाद 12 जून की शाम अपर कलेक्टर अश्विनी रावत ने DEO बीएस इंदौलिया को सख्त पत्र जारी किया। पत्र में सभी 47 शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाण पत्र तत्काल पेश करने के आदेश दिए गए। अपर कलेक्टर रावत ने साफ कहा कि जब तक प्रमाण पत्र नहीं मिलेंगे, यह तय नहीं होगा कि कौन से सर्टिफिकेट फर्जी हैं और कौन से असली।
तीन साल से धूल फांक रही है FIR
यह पहली बार नहीं है जब मुरैना में फर्जी दिव्यांग शिक्षकों का मामला उठा हो। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एके पाठक ने मुरैना कोतवाली में 70 से अधिक फर्जी दिव्यांग शिक्षकों पर FIR (First Information Report) दर्ज कराई थी। तीन साल से अधिक समय बाद भी यह केस कोर्ट नहीं पहुंचा। वजह वही पुरानी है। शिक्षा विभाग ने जांच के लिए प्रमाण पत्र ही नहीं दिए। विभाग का कहना है कि प्रमाण पत्र शिक्षकों के पास हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रमाण पत्र विभाग के पास हैं। नतीजा, फाइल कोतवाली में पड़ी धूल फांक रही है।
कहां-कहां हैं संदिग्ध शिक्षक
शिकायतकर्ता अनार सिंह के अनुसार, शिक्षक भर्ती में फर्जी दिव्यांग कोटे का सबसे ज्यादा फायदा सबलगढ़ क्षेत्र के शिक्षकों ने उठाया। संदिग्ध शिक्षकों में टेंटरा संकुल, जाबरौल, कन्या शाला सबलगढ़, राजाकातोर, झुंडपुरा, रामपुरकलां, गुरैमा और उत्कृष्ट स्कूल सबलगढ़ संकुल के शिक्षक शामिल हैं। पटवारी भर्ती में जौरा तहसील के सबसे अधिक उम्मीदवारों पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का संदेह है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रमाण पत्र आखिर हैं कहां। विभाग और शिक्षक दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इस बीच जिन लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की, वे आराम से सेवा में बने हुए हैं। अब देखना यह है कि DEO कार्यालय प्रमाण पत्र पेश करता है या फिर एक और जांच ठंडे बस्ते में चली जाती है।
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