टोकन मिला, खाद नहीं; विधानसभा में किसानों की पीड़ा ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- किसान मुद्दे पर पहले ही दिन सरकार घिरी।
- टोकन और OTP व्यवस्था पर विपक्ष का बड़ा हमला।
- खाद संकट, बीज, MSP और मुआवजे पर सरकार से जवाब मांगा।
- 213 मृदा परीक्षण लैब बंद होने का दावा।
- सरकार ने कहा- खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध।
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही सबसे बड़ा सवाल किसानों की बदहाल व्यवस्था पर खड़ा हो गया। सदन के बाहर विरोध और भीतर तीखी बहस के बीच विपक्ष ने आरोप लगाया।
विपक्ष ने कहा कि किसान खेत में कम और टोकन, OTP, सर्वर और फाइलों के चक्कर में ज्यादा फंसा है। सरकार ने सभी आरोपों को खारिज किया, लेकिन पहले ही दिन कृषि व्यवस्था पर गंभीर सवालों की गूंज पूरे सदन में सुनाई दी।
किसान खेत छोड़ व्यवस्था से लड़ रहा
सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन कर सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर कांग्रेस ने संदेश दिया कि खेती से जुड़े फैसले जमीन पर नहीं, केवल दावों में दिखाई दे रहे हैं।
किसान फसल नहीं, सिस्टम से जूझ रहा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि किसान को समय पर खाद नहीं मिल रही, बल्कि टोकन और OTP का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेती की पूरी व्यवस्था डिजिटल प्रक्रिया और फाइलों में उलझ गई है, जबकि किसान राहत की उम्मीद में सोसायटियों के चक्कर काट रहा है।
MSP से लेकर बीमा तक उठे सवाल
विपक्ष ने आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य, फसल बीमा, सोयाबीन खरीदी और मुआवजे जैसे मामलों में किसान लगातार नुकसान उठा रहा है। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि घोषणाएं बड़ी हैं, लेकिन खेत तक उनका असर नहीं पहुंच रहा।
213 लैब बंद होने का दावा
उमंग सिंघार ने दावा किया कि प्रदेश की 213 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं बंद पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी परीक्षण की व्यवस्था ठप है और किसान वैज्ञानिक सलाह से भी वंचित हो रहा है। विपक्ष ने ई-टोकन व्यवस्था खत्म कर खाद वितरण की निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
संकट नहीं, विपक्ष भ्रम फैला रहा
कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ई-टोकन व्यवस्था किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई है और जिन किसानों को टोकन मिला है, उन्हें तय समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
आपूर्ति पर सरकार की सफाई
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध के कारण कुछ समय के लिए आपूर्ति प्रभावित हुई थी। हालांकि, सरकार का दावा है कि वर्तमान में किसानों के लिए पर्याप्त खाद और बीज उपलब्ध हैं।
पंडित की भविष्यवाणी चर्चा में
सूखे की आशंकाओं केठ बीच संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस वर्ष अधिक मास होने के कारण अच्छी बारिश होगी। उन्होंने अपने पंडित की भविष्यवाणी का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रदेश में दीपावली तक पर्याप्त वर्षा होगी। इस बयान ने सदन में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी।
श्रद्धांजलि सूची पर भी सरकार घिरी
बरगी क्रूज हादसे सहित अन्य घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का नाम श्रद्धांजलि सूची में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष ने इसे गंभीर चूक बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने विधानसभा सचिवालय का बचाव किया।
अब आगे क्या?
मानसून सत्र के पहले ही दिन साफ हो गया कि आने वाले दिनों में सरकार को केवल राजनीतिक आरोपों का नहीं, बल्कि खाद, बीज, MSP, फसल बीमा और किसानों की जमीनी समस्याओं से जुड़े कठिन सवालों का भी सामना करना पड़ेगा। किसानों की परेशानी अब विधानसभा की बहस का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
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