25 मासूमों की मौत के बाद जागी सरकार! आखिर दो दशक तक दवा निगरानी व्यवस्था सोती क्यों रही?
Ramanand Tiwari | Jul 20, 2026, 21:49 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्ना में कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद FDA व्यवस्था पर सवाल उठे। सरकार अब दवा निगरानी मजबूत करने की तैयारी में है।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला....
- 2025 में जहरीले कफ सीरप से 25 बच्चों की मौत।
- अब 2047 तक का एफडीए मास्टर प्लान तैयार हो रहा है।
- पहले चरण में करीब 100 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी।
- प्रदेश में सिर्फ तीन दवा जांच प्रयोगशालाएं।
- सालभर में केवल छह हजार दवा नमूनों की जांच संभव।
इतने साल के बाद अब जागी सरकार
मध्य प्रदेश में पिछले दो दशकों से भाजपा सरकार रही है। इस दौरान दवा जांच की क्षमता, प्रयोगशालाओं की संख्या और निरीक्षण व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही। आखिर समय रहते इन कमियों को दूर क्यों नहीं किया गया?
सबसे गंभीर सवाल यह भी है कि जिन कमजोर व्यवस्थाओं के कारण जांच लंबित रहती रही और खराब गुणवत्ता की दवाएं बाजार तक पहुंचती रहीं, उनकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या केवल नया मास्टर प्लान बना देने से पुराने सवाल खत्म हो जाएंगे?
कमजोर जांच व्यवस्था ने बढ़ाया खतरा
तीन लैब फिर भी जांच रफ्तार बेहद धीमी
70 हजार मेडिकल स्टोर, लेकिन निरीक्षक सिर्फ 79
211 करोड़ का प्रस्ताव अटका, अब नया प्लान
भोपाल लैब होगी हाईटेक
हर जिले में बनेगा आधुनिक एफडीए कार्यालय
मंत्री का पक्ष
इसके तहत प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ेगी, नई मशीनें लगेंगी और हर जिले में आधुनिक कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे दवा गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी और भविष्य में कफ सीरप जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
सबसे बड़ा सवाल
आखिर 25 मासूमों की मौत के बाद ही सुधार की जरूरत क्यों महसूस हुई? यही सवाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील पहलू बनकर सामने खड़ा है।
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