मंत्रियों की बयानबाजी, संगठन की नाराजगी और 2028 की चिंता के बीच CM हाउस में चली मैराथन बैठक

Ramanand Tiwari | May 17, 2026, 23:19 IST
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भोपाल में मुख्यमंत्री आवास में मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों की लंबी समीक्षा बैठक हुई। चर्चा विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रही। बैठक का मुख्य फोकस संगठन और सरकार के बीच तालमेल और संवाद पर रहा।

मध्य प्रदेश भाजपा में सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा। मंत्रियों की लगातार विवादित बयानबाजी और जनप्रतिनिधियों से बढ़ती दूरी चिंता बढ़ा रही है। जिलों में बिगड़ता समन्वय सरकार और संगठन दोनों के लिए समस्या बन गया है। इस बढ़ती बेचैनी के बीच सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों की मैराथन बैठक बुलाई। चर्चा केवल विभागों तक सीमित नहीं रही। फोकस सरकार और संगठन के बीच कमजोर तालमेल पर रहा। बैठक को 2028 विधानसभा चुनाव और आने वाले नगरीय तथा पंचायत चुनाव की तैयारी से जोड़ा गया है।



विवादित बयानबाजी से सरकार की चिंता बढ़ी

मुख्यमंत्री के आवास में मंत्रियों और संगठन की बड़ी समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विभागीय कामकाज से ज्यादा संगठन पर फोकस रहा। मंत्रियों को जनप्रतिनिधियों से तालमेल बढ़ाने की नसीहत दी गई। विवादित बयानबाजी से सरकार की चिंता बढ़ी। पंचायत और नगरीय चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई। 2028 चुनाव को लेकर संगठन ने फीडबैक लिया। कई जिलों में संगठन और सत्ता के बीच समन्वय पर सवाल उठे।



मंत्रियों की बयानबाजी से बढ़ी सरकार की मुश्किल?

पिछले कुछ महीनों में प्रदेश सरकार के कई मंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। विजय शाह से लेकर प्रतिमा बागरी जैसे मामलों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दिया। संगठन स्तर पर यह फीडबैक भी सामने आया कि कुछ जिलों में मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय कमजोर हो रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में भी असंतोष की स्थिति बन रही है।



CM की बैठक में विभाग नहीं

पहले चर्चा थी कि मुख्यमंत्री मंत्रियों का विभागवार रिपोर्ट कार्ड देखेंगे। बैठक का पूरा फोकस संगठन और राजनीतिक फीडबैक पर रहा। मंत्रियों ने अपने विभागों की रिपोर्ट की हार्ड कॉपी मुख्यमंत्री को सौंपी। लंबी चर्चा संगठन की स्थिति, जिलों के फीडबैक और जनप्रतिनिधियों के तालमेल पर हुई। सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों को साफ संदेश दिया गया कि प्रशासनिक कामकाज के साथ राजनीतिक व्यवहार भी मजबूत रखना होगा।



जिलों में पकड़ मजबूत रखो

बैठक में मौजूद संगठन पदाधिकारियों ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में लगातार सक्रिय रहें। साथ ही मंत्रियों को कहा गया कि स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार संतुलित रखें। कई जगहों से दूरी और नाराजगी की शिकायतें सामने आई हैं। भाजपा अब चुनावी मोड में आ चुकी है और संगठन किसी भी तरह की अंदरूनी कमजोरी का जोखिम नहीं लेना चाहता।



पंचायत और नगर निकाय चुनाव पर फोकस

बैठक में आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संगठन यह समझने की कोशिश कर रहा है कि सरकारी योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर कितना दिख रहा है। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, गेहूं खरीदी और ग्रामीण योजनाओं को लेकर मंत्रियों से फीडबैक लिया गया। भाजपा को संकेत मिल रहे हैं कि विपक्ष लगातार माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए सरकार और संगठन दोनों अभी से सक्रिय हो गए हैं।



2028 की तैयारी का भी दिखा संकेत

बैठक को सिर्फ मौजूदा राजनीतिक हालात नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव 2028 की शुरुआती रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि मंत्रियों और संगठन के बीच कोई गैप न रहे। यही वजह रही कि बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।



हेमंत खंडेलवाल ने क्या कहा?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि बैठक में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यक्रम समय पर हो रहे हैं या नहीं। जिलों में तालमेल कैसा है और सरकार की योजनाओं का असर जमीन पर कितना दिख रहा है इन सभी बिंदुओं पर चर्चा हुई।



खंडेलवाल के मुताबिक सरकार और संगठन लगातार फीडबैक ले रहे हैं। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं और जनता के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना है। बैठक से पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि मुख्यमंत्री मंत्रियों का सख्त आकलन करेंगे और कुछ पर कार्रवाई हो सकती है। बैठक में ऐसा कोई बड़ा संकेत नहीं मिला। न तो मंत्रियों से व्यक्तिगत जवाब-तलब हुआ और न ही बड़े फेरबदल पर खुलकर चर्चा हुई। हालांकि संगठन ने व्यवहार, बयानबाजी और जिलों में सक्रियता को लेकर सख्त संदेश दिया।



क्या भाजपा को अंदरूनी असंतोष का डर?

CM हाउस में हुई लंबी बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा अब केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं है। पार्टी अब डैमेज कंट्रोल और चुनावी प्रबंधन मोड में भी है। लगातार विवादित बयान, संगठन-सत्ता के बीच बिगड़ता तालमेल और विपक्ष के हमलों ने नेतृत्व को सतर्क किया है। इसलिए मंत्रियों को विभाग संभालने के साथ राजनीतिक संतुलन और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की नसीहत दी जा रही है।



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