BJP की रैली में भीड़ जुटाने का सरकारी फरमान: DPO ने काली साड़ी में बुलवाईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

Amresh Kushwaha | May 03, 2026, 11:20 IST
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मध्य प्रदेश के खंडवा में भाजपा महिला मोर्चा की रैली में भीड़ जुटाने एक फरमान तेजी से वायरल हो रहा है। यह फरमान जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के जरिए जारी किया गया है। जानें क्या है इस फरमान में और क्यों हो रहा इसका विरोध...

मध्यप्रदेश के खंडवा में रविवार को होने वाली बीजेपी महिला मोर्चा की पदयात्रा विवादों के घेरे में आ गई है। मामला किसी राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़ा है।



महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) रत्ना शर्मा का एक व्हाट्सएप मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने 200 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आज यानी 03 मार्च की दोपहर 3 बजे भाजपा कार्यालय पहुंचने का फरमान जारी किया है।



रविवार की छुट्टी पर सियासी ग्रहण

भाजपा महिला मोर्चा ने आज यानी रविवार शाम 4 बजे नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस के खिलाफ एक सम्मेलन और पदयात्रा आयोजित की है। इस रैली में विधायक कंचन तनवे और महापौर अमृता यादव जैसी दिग्गज नेत्रियों को शामिल होना है।



वहीं, विवाद तब शुरू हुआ जब डीपीओ (DPO) ने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से काली साड़ी पहनकर आने को कहा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि रविवार को हफ्ते में एक दिन अवकाश मिलता है, उसे भी राजनीतिक भीड़ जुटाने की भेंट चढ़ाया जा रहा है।



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क्या हम विधवा हैं जो... - आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

इस फरमान पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। एक कार्यकर्ता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) की बात करने वाले प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। हमें काली साड़ी पहनकर आने को कहा गया है, क्या हम विधवाएं हैं? हद तो यह है कि हमें न तो किराया-भाड़ा दिया जाता है और न ही खाने-पीने की व्यवस्था होती है।



कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें केवल भीड़ बढ़ाने के संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।



परिजनों के तीखे सवाल पर अधिकारी ने साधी चुप्पी

आना या न आना अपनी मर्जी- भाजपा

इस पूरे विवाद पर भाजपा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने सरकारी दबाव की बात से इनकार करते हुए इसे महिलाओं का एक सामान्य कार्यक्रम बताया। तोमर का कहना है कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक है, जिसकी इच्छा हो वह आए और जिसकी इच्छा न हो वह न आए। हालांकि, विभाग की ओर से आए लिखित मैसेज के बाद स्वैच्छिक शब्द पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।



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