सत्ता मजबूत, संगठन कमजोर! मध्यप्रदेश भाजपा में विस्तार पर ब्रेक क्यों?

Ramanand Tiwari | Jun 14, 2026, 22:34 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन विस्तार अटका है। प्रदेश कार्यकारिणी गठन में देरी से रणनीति प्रभावित हो रही है। चुनावी व्यस्तताओं और आंतरिक सहमति संकट की चर्चा तेज है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी गठन में लगातार देरी जारी है।
  • संगठन विस्तार न होने से रणनीति बैठकें प्रभावित हो रही हैं।
  • चुनावी व्यस्तताओं ने संगठन प्रक्रिया को धीमा किया है।
  • कई मोर्चों और जिलों में नियुक्तियां अभी लंबित हैं।
  • आंतरिक सहमति और क्षेत्रीय संतुलन बड़ी चुनौती बना है।

एक तरफ मध्य प्रदेश भाजपा चुनावी जीत के दावे और राजनीतिक सफलताओं का जश्न मना रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अब भी अधूरा नजर आ रहा है।



प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। सवाल यह है कि सत्ता और चुनावी मशीनरी में लगातार सक्रिय दिखने वाली भाजपा अपने ही संगठन विस्तार को रफ्तार क्यों नहीं दे पा रही? क्या यह केवल व्यस्तताओं का परिणाम है या फिर पर्दे के पीछे समीकरणों की कोई बड़ी जंग चल रही है?



संगठन विस्तार पर क्यों लगा ब्रेक?

प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी का गठन अब तक नहीं हो पाया है। इसकी वजह से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में होने वाली पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक भी लगातार टलती चली गई।



पार्टी के अंदर अब यह चर्चा होने लगी है कि जब चुनावी मोर्चों पर जीत दर्ज की जा रही है, तब संगठनात्मक मोर्चे पर ऐसी सुस्ती क्यों दिखाई दे रही है।



रणनीति तय करने वाला मंच ही अधूरा

प्रदेश कार्यकारिणी भाजपा के संगठनात्मक ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यहीं से आगामी चुनावों की रणनीति तय होती है और सरकार तथा संगठन के बीच समन्वय की दिशा निर्धारित होती है।



पार्टी संविधान के तहत कार्यसमिति की बैठकें नियमित अंतराल पर होनी चाहिए, लेकिन नई टीम के गठन में देरी के कारण यह पूरी प्रक्रिया ही प्रभावित हो गई है।



चुनावी व्यस्तता या प्राथमिकताओं में बदलाव?

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि पिछले कई महीनों में लगातार चुनावी जिम्मेदारियों ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया को पीछे धकेल दिया।


पहले बिहार विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल की चुनावी तैयारियां शुरू हुईं।



फिर राजनीतिक कार्यक्रमों और राज्यसभा चुनाव की रणनीतियों ने संगठन का फोकस दूसरी दिशा में मोड़ दिया, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि चुनावी सफलता संगठन की ताकत से आती है, तो फिर उसी संगठन को मजबूत करने का काम लगातार टल क्यों रहा है?



राज्यसभा जीत के बाद भी नहीं बढ़ी रफ्तार

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया, लेकिन संगठन विस्तार की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर नहीं बदली।


पार्टी के भीतर अब यह चर्चा तेज हो रही है कि केवल चुनावी जीत ही पर्याप्त नहीं है। आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत करना जरूरी है।



ओरछा में प्रस्तावित है पहली बड़ी बैठक

सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी है।



जिनमें आगामी चुनावों की रणनीति, सदस्यता अभियान की समीक्षा, संगठन विस्तार की रूपरेखा और सरकार-संगठन के बीच समन्वय जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, कार्यकारिणी गठन पूरा न होने के कारण बैठक की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।



मोर्चों में भी अधूरी तस्वीर

मामला केवल प्रदेश कार्यकारिणी तक सीमित नहीं है। भाजपा के विभिन्न मोर्चों में भी प्रदेश स्तरीय नियुक्तियां लंबित बताई जा रही हैं। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा सहित कई इकाइयां अभी जिला स्तर की प्रक्रिया पूरी करने में जुटी हुई हैं।



जिलों में सहमति बनाना भी बना चुनौती

प्रदेश नेतृत्व ने जिला कार्यकारिणी गठन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे ताकि स्थानीय समीकरणों और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए टीम तैयार की जा सके। लेकिन कई जिलों में रिपोर्ट आने में देरी हुई, जबकि कुछ जगहों पर नियुक्तियों को लेकर असहमति की स्थिति भी सामने आई। इससे पूरी प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक लंबी खिंच गई।



क्या सिर्फ व्यस्तता है वजह?

पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि मामला केवल चुनावी व्यस्तताओं तक सीमित नहीं है। प्रदेश कार्यकारिणी में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक संतुलन, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और नए चेहरों को अवसर देने जैसे कई मुद्दों पर लगातार मंथन चल रहा है। अंतिम सूची को लेकर सहमति बनाने की कवायद भी देरी की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।



भाजपा का पक्ष

एमपी बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि संगठनात्मक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।



आशीष अग्रवाल के मुताबिक पार्टी लगातार कार्यक्रमों और चुनावी दायित्वों में व्यस्त रही है, लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर काम लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है।



मध्यप्रदेश भाजपा के सामने इस समय चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि संगठन को भी उसी गति से मजबूत करने की है। लगातार जीत के दावों के बीच यदि संगठनात्मक ढांचा अधूरा बना रहता है तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिलता रहेगा।



अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी अपने संगठन विस्तार को कब अंतिम रूप देती है और क्या आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह इंतजार खत्म हो पाएगा।



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