MP बजट 2025-26 का 1.74 लाख करोड़ खर्च नहीं कर पाया विभाग, अब तिमाही सीमा लागू
News In Short
- वित्त वर्ष 2025-26 में MP को 4.91 लाख करोड़ का बजट मिला था।
- इसमें से 30% से ज्यादा यानी 1.74 लाख करोड़ रुपए खर्च नहीं हुए हैं।
- 9 विभाग ऐसे हैं जो अपना 50% बजट भी खर्च नहीं कर पाए हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा विभाग सबसे फिसड्डी रहा, सिर्फ 0.67% खर्च हुआ है।
- अब 2026-27 से सरकार ने तिमाही खर्च सीमा की नई व्यवस्था लागू की है।
News In Detail
वित्त वर्ष खत्म, लेकिन पड़ा रहा खजाना
वित्त वर्ष 2025-26 की क्लोजिंग के साथ ही मध्यप्रदेश के सरकारी खर्च की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। ट्रेजरी के 01 अप्रैल के आंकड़े बताते हैं कि बजट और तीन अनुपूरक बजट जोड़कर विभागों को कुल 4.91 लाख करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद, इसमें से 30% से ज्यादा राशि खर्च ही नहीं हो सकी। यह रकम 1.74 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है।
यानी पूरे साल में सिर्फ करीब 3.16 लाख करोड़ रुपए ही खर्च हुए। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले करीब 40 हजार करोड़ रुपए कम है। नौ विभागों ने अपना आधा बजट भी नहीं छुआ है।
बना नया रिकॉर्ड
विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति कोई नई नहीं है। हर साल करीब 50 हजार करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाते हैं। वहीं, इस बार की राशि इतनी ज्यादा है कि यह अब तक का रिकॉर्ड बन गई है।
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी अंतिम आंकड़े आना बाकी हैं। अकाउंटेंट जनरल (Accountant General), आरबीआई (RBI - Reserve Bank of India) और अंतरराज्यीय लेन-देन के आंकड़े जुड़ने के बाद खर्च में पांच से सात हजार करोड़ रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
9 विभागों ने 50% भी नहीं खर्चा
सबसे चिंताजनक तस्वीर नौ विभागों की है जो अपने बजट का आधा हिस्सा भी नहीं खर्च कर पाए। नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) विभाग सबसे फिसड्डी रहा, उसने सिर्फ 0.67% बजट खर्च किया।
एमपी वित्त विभाग ने 15%, पर्यावरण ने 21.46% और प्रवासी भारतीय विभाग ने 23.09% ही खर्च किया। विमानन विभाग 28.81%, लोक परिसंपत्ति 35.89%, सहकारिता 43.04%, पीएचई (PHE - Public Health Engineering) 47.57% और आनंद विभाग 47.62% पर ही रुक गए।
5 बड़े विभागों का हाल भी निराशाजनक
बड़े और अहम विभागों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं रही। कृषि विभाग ने अपने बजट का सिर्फ 50.37% खर्च किया। ग्रामीण विकास 59.30%, पंचायत 70.13%, जल संसाधन 75.56% और नगरीय विकास 200% तक पहुंचा। नगरीय विकास का यह आंकड़ा इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे केंद्र से अतिरिक्त राशि भी मिलती है।
एमपी अप्रोप्रिएशन (MP Appropriation) अकाउंट के आंकड़े यह भी बताते हैं कि सप्लीमेंट्री बजट जोड़ने से कुल बजट राशि ज्यादा दिखती है, जबकि वास्तविक खर्च उतना नहीं हो पाता।
वरिष्ठ अधिकारी का बयान
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि अभी विभाग के अधिकारी पूरी गणना करेंगे। आरबीआई की रिपोर्ट आएगी। अकाउंटेंट जनरल का डेटा अपडेट होगा। राज्यों के भीतर लेन-देन भी स्पष्ट होंगे। इसके बाद पिछले साल से ज्यादा बजट खर्च होने की स्थिति बनेगी।
अब 2026-27 में क्या बदलेगा?
इस रिकॉर्ड चूक के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट खर्च को तीन श्रेणियों में बांटकर सख्त वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) लागू किया है।
पहली श्रेणी में वेतन, भत्ते, पेंशन, छात्रवृत्ति, कर्ज अदायगी और प्राकृतिक आपदा के खर्च रखे गए हैं। इन्हें अति आवश्यक माना गया है और 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक किसी भी रोक के बिना खर्च किया जा सकेगा। यह राशि करीब एक लाख करोड़ रुपए है।
दूसरी श्रेणी में केंद्र प्रवर्तित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes) हैं। इन पर कोई कैपिंग नहीं होगी और विभाग केंद्र से अपना हिस्सा लेते रहेंगे। तीसरी श्रेणी सामान्य खर्चों की है। इन पर तिमाही यानी तीन महीने की सीमा तय की गई है। यदि विभाग तय सीमा में खर्च नहीं करते तो स्वचालित रूप से 25% की कैपिंग लागू हो जाएगी।
सरकार ने सभी 63 विभागों को निर्देश दिए हैं कि पहले लंबित दायित्वों का निपटारा करें और उसके बाद ही नए कार्य शुरू करें। 4.21 लाख करोड़ रुपए के कुल बजट में पूंजीगत और राजस्व व्यय के लिए शत-प्रतिशत आवंटन जारी किया गया है।
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