एमपी के 9वीं-11वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर, फेल होने पर दोबारा मिलेगा परीक्षा का मौका

Manya Jain | Feb 23, 2026, 15:35 IST
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मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब 9वीं और 11वीं के छात्र फेल होने पर उसी साल दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। इस फैसले से बच्चों का साल बर्बाद नहीं होगा।

MP News. मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए एक अच्छी खबर आई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने परीक्षा के नियमों में बदलाव किया है। अब कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों को दूसरा मौका मिलेगा।



शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ये नई व्यवस्था लागू हो गई है। अगर कोई छात्र फेल हो जाता है, तो वह उसी साल फिर से परीक्षा दे सकेगा। बीमार या अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को भी इसका फायदा मिलेगा। इससे छात्रों का साल बर्बाद होने से बच जाएगा। यह फैसला बच्चों का मानसिक तनाव कम करने के लिए लिया गया है और इससे स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भी काफी कमी आएगी।



एमपी बोर्ड परीक्षा सुधार 2026

पुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था (2025-26)
परीक्षा का नामसप्लीमेंट्री (Supplementary)दूसरी परीक्षा (Second Exam)
कक्षाएं9वीं और 11वीं9वीं और 11वीं (बोर्ड पैटर्न पर)
उद्देश्यकेवल फेल छात्रों को मौकाअनुपस्थित और फेल दोनों को मौका
परिणामसाल बचने की कम संभावनाउसी सत्र में अगली कक्षा में प्रवेश

सप्लीमेंट्री की जगह अब होगी दूसरी परीक्षा

DPI ने 9 फरवरी 2026 को नया आदेश जारी किया था। अब सप्लीमेंट्री परीक्षा शब्द का उपयोग नहीं होगा। इसकी जगह इसे 'दूसरी परीक्षा' कहा जाएगा। यह नियम माध्यमिक शिक्षा मंडल के पुराने पैटर्न जैसा है। पिछले साल 10वीं और 12वीं में यह लागू हुआ था। अब प्रदेश के सभी छात्रों के लिए यह व्यवस्था रहेगी।



नई व्यवस्था की मुख्य बातें...

  • किसे मिलेगा मौका: जो छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल हो गए हैं। वे एक या अधिक विषयों में बैठ सकते हैं। उनके पास पास होने का यह दूसरा मौका है।
  • अनुपस्थित छात्रों के लिए राहत: कुछ छात्र मुख्य परीक्षा नहीं दे पाए थे। अब वे भी इस दूसरी परीक्षा में बैठेंगे। उन्हें साल बर्बाद होने की चिंता नहीं होगी।
  • समय पर होगी परीक्षा: यह परीक्षा उसी शैक्षणिक सत्र में आयोजित होगी। इससे छात्र अगली कक्षा में समय पर जाएंगे। उनका पूरा एक साल खराब होने से बचेगा।

नई शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव

यह बदलाव नई शिक्षा नीति 2020 के तहत किया गया है। इसका मकसद रटकर पढ़ने की आदत को खत्म करना है। अब छात्रों को सीखने और सफल होने के ज्यादा मौके मिलेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह बहुत बड़ा कदम है। इससे छात्रों का पूरा एक साल खराब होने से बचेगा। साथ ही परीक्षाओं को लेकर उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।



नहीं होगा साल बर्बाद: छात्र

छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है। छात्रों का मानना है कि पहले फेल होने पर पूरा साल बर्बाद होता था। सप्लीमेंट्री के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब छात्रों को परीक्षा का दूसरा मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति बहुत व्यावहारिक है। 10वीं और 12वीं के छात्रों को यह सुविधा मिल रही है। 9वीं और 11वीं के छात्रों को भी यह लाभ मिलना चाहिए। ये दोनों कक्षाएं बोर्ड परीक्षा का मुख्य आधार होती हैं।



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