CM राइज स्कूल पर सवाल: एडमिशन रोक, घटिया निर्माण और शिक्षकों की कमी, क्या यही ‘क्वालिटी एजुकेशन’ का मॉडल?
News In Short
- CM राइज स्कूलों में निजी स्कूलों के बच्चों के एडमिशन पर रोक।
- निर्माण की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
- कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी और असंतोष बढ़ रहा है।
- समीक्षा बैठकों के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे।
- शिक्षा में माफिया का दबाव बढ़ने के आरोप।
News In Detail
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित CM राइज स्कूल प्रोजेक्ट पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस योजना को ‘बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ का मॉडल बताया गया था, वहीं अब एडमिशन रोक, घटिया निर्माण और शिक्षकों की कमी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। लगातार समीक्षा बैठकों के बावजूद हालात नहीं सुधरने पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
क्या है पूरा विवाद?
- CM राइज (सांदीपनि) स्कूलों में निजी स्कूल के बच्चों के एडमिशन पर रोक।
- निर्माण गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल।
- कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी।
- लगातार शिकायतों के बावजूद सुधार के ठोस परिणाम नहीं।
एडमिशन पर रोक: सबसे बड़ा विवाद
स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद निजी स्कूलों से आने वाले छात्रों के एडमिशन रोके जा रहे हैं। इस फैसले ने उस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें कहा गया था कि CM राइज स्कूल हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने का मंच बनेंगे।
विपक्ष का हमला: ‘शिक्षा में माफिया हावी’
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर “माफिया का दबाव” बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार निजी स्कूलों के प्रभाव में फैसले ले रही है, जिससे आम छात्रों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
जमीनी शिकायत: एडमिशन तक नहीं मिल रहा
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने कुछ छात्राओं के एडमिशन की सिफारिश की, तो अधिकारियों ने साफ मना कर दिया।
उनका कहना है कि अगर सरकारी स्कूलों में भी प्रवेश सीमित किया जाएगा, तो गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए विकल्प क्या बचेगा?
गुणवत्ता पर भी सवाल: भवन से पढ़ाई तक
CM राइज स्कूलों का सपना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शिक्षा का था, लेकिन अब...
- भवन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
- खेल मैदान और सुविधाएं अधूरी बताई जा रही हैं।
- पढ़ाई के स्तर को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
यानी मध्यप्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन का वादा था, वही अब जांच के घेरे में है।
शिक्षकों की कमी और बढ़ता असंतोष
कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी की शिकायत है। दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों में भी नाराजगी बढ़ रही है और आंदोलन की तैयारी की चर्चा है। ऐसे में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
समीक्षा बैठकों का असर क्यों नहीं?
शिक्षा मंत्री लगातार बैठकों और मॉनिटरिंग का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नजर नहीं आ रहा। सवाल यह उठ रहा है कि अगर निगरानी हो रही है, तो फिर अव्यवस्थाएं क्यों बढ़ रही हैं?
बड़ा सवाल: सपना और हकीकत में कितना फर्क?
CM राइज स्कूलों को लेकर जो विजन पेश किया गया था, उसमें हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने की बात थी। लेकिन जब एडमिशन ही सीमित हो जाए, संसाधन अधूरे हों और शिक्षक कम हों तो यह मॉडल कितना सफल है, इस पर बहस तेज हो गई है।
CM राइज स्कूल अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि सरकार की शिक्षा नीति की परीक्षा बन चुके हैं। अगर समय रहते एडमिशन, गुणवत्ता और संसाधनों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो यह प्रोजेक्ट “मॉडल” से ज्यादा “मिसमैनेजमेंट” की मिसाल बन सकता है।
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