एमपी में कम्पोजिट मदिरा दुकानें हुईं ऑफ श्रेणी : ओवर रेटिंग और अवैध अहातों पर नजर
News in Short
- MP सरकार ने सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को ऑफ श्रेणी घोषित किया।
- दुकान परिसर या आसपास शराब पीना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कलेक्टर्स को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
- ओवर रेटिंग रोकने को दुकानों पर QR कोड और रेट लिस्ट अनिवार्य होगी।
- पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम गश्त करेगी।
News in Detail
मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को अब पूरी तरह ऑफ श्रेणी (Off Category) में रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन दुकानों के परिसर में या उसके आसपास बैठकर शराब पीना अब कानूनन बंद है।
यह आदेश वर्ष 2026-27 की आबकारी (Excise) नीति का हिस्सा है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने 27 मई 2026 को जिलों के कलेक्टर्स को इस नीति का सख्ती से पालन कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन के आदेशों को जमीन पर उतारना अब अनिवार्य है।
देवड़ा का कलेक्टर्स को आदेश
देवड़ा ने कहा कि राजपत्र में प्रकाशित नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए। उन्होंने आबकारी विभाग की शिकायतों को गंभीरता से लिया। मुख्यालय ने सभी जिला अधिकारियों को बिंदुवार दिशा-निर्देश जारी किए। तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए।
देवड़ा के मुताबिक, प्रदेश में अवैध शॉप बार धड़ल्ले से चल रहे थे। समय सीमा का उल्लंघन हो रहा था। ओवर रेटिंग यानी तय दाम से ज्यादा वसूली की शिकायतें भी आ रही थीं। इन सब पर अंकुश लगाने के लिए राज्य व्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध अहाते होंगे बंद
सरकार ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। शिकायतों की जांच के लिए विशेष दलों का गठन किया जाएगा। ये टीमें औचक निरीक्षण करेंगी। अवैध रूप से चल रहे अहाते और शराब पीने के ठिकाने तुरंत बंद कराए जाएंगे।
देवड़ा ने साफ कहा कि जो ठेकेदार नियम तोड़ेंगे, उनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा। लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई की जाएगी। नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारी भी बख्शे नहीं जाएंगे।
समय पर खुलें-बंद हों दुकानें
एक और बड़ी समस्या सामने आई थी। कई मदिरा दुकानें तय समय से पहले खुल जाती थीं। कुछ दुकानें देर रात तक बिक्री करती रहती थीं। इस पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
राजपत्र में दर्ज समय सीमा का पालन कराने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग (Excise Department) की संयुक्त टीमें तैनात की जाएंगी। ये टीमें रात को भी गश्त करेंगी। जो दुकानें समय के बाद खुली मिलेंगी, उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
QR कोड से रुकेगी ओवर रेटिंग
ग्राहकों से तय दाम से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतें काफी समय से आ रही थीं। इसे रोकने के लिए सरकार ने एक व्यावहारिक कदम उठाया है। अब हर मदिरा दुकान पर शराब की विक्रय दरों की सूची लगाना अनिवार्य किया गया है।
इसके साथ ही हर दुकान पर QR (Quick Response) कोड चस्पा करना होगा। कोई भी ग्राहक इस कोड को स्कैन करके असली दाम जान सकेगा। अगर कोई ठेकेदार इससे ज्यादा कीमत वसूलता पकड़ा गया, तो राजपत्र के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई होगी।
पवित्र क्षेत्रों में सख्त निगरानी
प्रदेश में कुछ नगरों और क्षेत्रों को पवित्र घोषित किया गया है। वहां पहले से ही मदिरा दुकानें बंद हैं। लेकिन कुछ जगहों पर चोरी-छिपे शराब की अवैध बिक्री और परिवहन की खबरें आ रही थीं।
सरकार ने इन इलाकों में निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इन क्षेत्रों में शराब का अवैध परिवहन या बिक्री किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
इस पूरे फैसले का असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। पहले कई दुकानों के बाहर या परिसर में अहाते चलते थे। लोग वहीं बैठकर शराब पीते थे। अब यह पूरी तरह बंद होगा।
दाम में पारदर्शिता आएगी। QR कोड से हर कोई सही दाम चेक कर सकेगा। समय पर दुकानें बंद होने से रात को होने वाली शराब से जुड़ी घटनाओं पर भी लगाम लगेगी। सरकार का कहना है कि इस पूरे अभियान का मकसद कानून का सम्मान कराना और शराब के अवैध कारोबार को खत्म करना है।
कम्पोजिट मदिरा दुकान में ऑफ श्रेणी मतलब क्या है?
ऑफ श्रेणी (Off Category) का मतलब है कि ये दुकानें केवल शराब बेच सकती हैं, वहां पीने की सुविधा नहीं दी जा सकती। मध्य प्रदेश सरकार ने 2026-27 की आबकारी नीति में सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को इसी श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि दुकान के परिसर में या आसपास बैठकर शराब पीना पूरी तरह गैरकानूनी है।
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