MP के अस्थाई कर्मचारियों को रेगुलर करने में अफसरशाही बनी अड़चन, GAD ने HC को नहीं दिए आंकड़े

Rohit Sahu | May 10, 2025, 09:52 IST
Share
mp employees daily wage jpg
mp employees daily wage jpg

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से दैवेभो कर्मचारियों की नियमितिकरण कार्ययोजना मांगी, पर तीन माह बाद भी जीएडी विभागों से जरूरी जानकारी नहीं जुटा सका।

MP News: मध्यप्रदेश में वर्षों से काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी और अस्थायी कर्मचारियों के लिए उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी राज्य सरकार कार्ययोजना पेश नहीं कर सकी है। सरकार के पास यह तक जानकारी नहीं है कि किस विभाग में कितने दैवेभो और अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दाखिल हुई थी रिट याचिका

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय जग्गू बनाम भारत सरकार और विनोद कुमार बनाम भारत सरकार के फैसलों के आधार पर 2024 में जबलपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि नियमितिकरण की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या योजना है।

सामान्य प्रशासन विभाग की उदासीनता से मामला अटका

हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) तीन महीने में भी विभागों से आंकड़े नहीं जुटा सका। जबकि सरकार से अपेक्षा की गई थी कि वह नियमितिकरण की एक ठोस कार्ययोजना पेश करे। GAD ने फरवरी 2025 में सभी विभागों को पत्र भेजकर 15 दिन में जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक जवाब अधूरा है।

अफसरशाही की ढिलाई से सरकार की छवि पर सवाल

GAD ने साफ कहा है कि 16 मई 2007 की स्थिति में जो कर्मचारी कार्यरत थे, वे भले ही अनियमित हों, लेकिन अवैधानिक नहीं हैं। यदि वे 1 जनवरी 2025 तक भी काम कर रहे हैं तो उनके नाम भेजे जाएं। लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब दोबारा भेजा जाएगा निर्देश

सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों की सुस्ती को देखते हुए अब फिर से सभी विभागों को निर्देश जारी करने का निर्णय लिया है, ताकि हाईकोर्ट में कार्ययोजना प्रस्तुत की जा सके और नियम के अनुसार नियमितिकरण की प्रक्रिया आगे बढ़े।

यह जानकारी विभागों को देना अनिवार्य

▶ विभाग में कार्यरत कुल दैनिक वेतन भोगी और अस्थायी कर्मचारियों की संख्या।
▶ 1 जनवरी 2025 की स्थिति में दस वर्षों तक कार्यरत अस्थायी और दैवेभो कर्मचारियों का विवरण।
▶ 16 मई 2007 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के आधार पर नियमितिकरण के लिए पात्र कर्मचारी कितने हैं।

सालों से सेवा देने के बाद भी नहीं मिली परमानेंट नियुक्ती

राज्य सरकार के अधिकांश विभागों में ऐसे हजारों कर्मचारी हैं जो 10 से 15 वर्षों से नियमित काम कर रहे हैं, लेकिन वे आज भी अस्थायी या दैनिक वेतनभोगी की श्रेणी में आते हैं। हाईकोर्ट की कार्ययोजना मांगने के बाद अब उनके भविष्य पर निर्णय हो सकता है, बशर्ते अफसर आंकड़े भेजें।

यह भी पढ़ें..एमपी के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां कैंसिल

अफसरशाही बनी रोड़ा

हाईकोर्ट की पहल के बाद प्रदेशभर के हजारों दैवेभो कर्मचारी नियमितिकरण की उम्मीद में हैं, लेकिन अफसरशाही की सुस्ती ने प्रक्रिया को अटका दिया है। यदि अब भी आवश्यक आंकड़े नहीं जुटे, तो कार्ययोजना प्रस्तुत करना मुश्किल होगा और मामला फिर से लटक सकता है।

.यह भी पढ़ें...MP बीजेपी की वेबसाइट हैक, होम पेज पर पाकिस्तान के ऑपरेशन का दिख रहा नाम

thesootr links

द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें<br>

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी | Daily wages employees | MP GAD | Contract worker regularization case | niyamitikaran mp news | regularization of contract workers

Tags:
  • MP News
  • MP GAD
  • Contract worker regularization case
  • regularization of contract workers
  • Daily wages employees
  • दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी
  • niyamitikaran mp news
  • दैनिक वेतन भोगी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज