शहर से दूरी ने किया हाउसिंग प्रोजेक्ट से मोहभंग, 450 करोड़ का एक्वा पार्क भी खटाई में
Sanjay Sharma | Apr 29, 2026, 23:49 IST
MPHIDB
एमपी को 11 एक्वापार्क योजना में 459.18 करोड़ मिले, पर भोपाल में टेंडर तीन महीने से अटका। उधर तीन लाइसेंस प्रोजेक्ट के 550 आवास तैयार, लेकिन नेताओं के दबाव से झुग्गी शिफ्टिंग रुकी।
News in Short
- आवासीय प्रोजेक्ट में प्लानिंग की कमी से निर्माण एजेंसियों का मोहभंग।
- हाउसिंग बोर्ड की अनदेखी से अटकी झुग्गियों की शिफ्टिंग की योजना।
- शहर से अत्यधिक दूरी की वजह से आवास लेने से दूरी बना रहे लोग।
- भदभदा क्षेत्र में प्रस्ताविक 459 करोड़ के एक्वा पार्क का काम भी अटका।
- केंद्रीय प्रोजेक्ट में भी MPHIDB की प्लानिंग से ठेकेदारों बना रहे दूरी।
News in Detail
इनमें से एक प्रोजेक्ट में लोग आवास लेने ही आगे नहीं आए हैं। इस स्थिति को देख निर्माण कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स से हाथ खींच रही हैं। उधर यही हालत 450 करोड़ से अधिक लागत वाले एक्वा पार्क के निर्माण की है। हाउसिंग बोर्ड अब तक निर्माण एजेंसी का चयन ही नहीं कर पाया है। दो बार कंपनियों की अरुचि के बाद अब तीसरी बार टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
घाटे के पुराने अनुभव से नहीं लिया सबक
यह पहला मौका नहीं है जबकि एमपीएचआईडीबी को अपने मनमाने फैसलों से नुकसान उठाना पड़ रहा है। पुराने अनुभवों से सबक न लेते हुए बोर्ड द्वारा काला पानी और महाबड़िया गांव में चयन चुनी है। इनकी चार इमली और शहर के अन्य क्षेत्रों से दूरी 12 किलोमीटर से ज्यादा है।
दूरी के आंकलन की अनदेखी पड़ी भारी
इस वजह से इस प्रोजेक्ट का काम संभाल रहीं निर्माण एजेंसी ने काम रोक दिया है। वहीं दूसरे प्रोजेक्ट साइट पर दूसरी कंपनी काम ही शुरू नहीं कर रही है। अदूरदर्शी फैसले का नतीजा यह है कि न तो लोग झुग्गी छोड़ रहे हैं और न ही हाउसिंग प्रोजेक्ट में उलझे करोड़ों रुपए की वापसी हो रही है।
खटाई में पड़ा एक्वा पार्क का मेगा प्रोजेक्ट
यह अब लगभग पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए हाउसिंग बोर्ड दो बार टेंडर जारी कर चुका है। टेंडर की शर्तें और मनमाने नियमों के चलते निर्माण एजेंसियों ने तीन बार रुचि ही नहीं दिखाई। जिसके चलते अब हाउसिंग बोर्ड चौथी बार टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है।
क्यों अटक रहे MPHIDB के प्रोजेक्ट
वहीं पांच नंबर मार्केंट से रि-डेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए बोर्ड दुकान और आवासों की शिफ्टिंग में दो साल पिछड़ चुका है। इस वजह से जिन लोगों की शिफ्टिंग कराई गई उनका किराया चुकाने में बोर्ड को हर माह लाखों खर्च करने पड़ रहे हैं। यही हाल मछली घर और काला पानी क्षेत्र में आवासीय प्रोजेक्ट का है। यहां मकान बनकर तैयार हैं लेकिन लोग इनमें रहने तैयार नहीं हैं।
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