मदिरा टेंडर पर विवाद: तारीख बढ़ाकर सोम डिस्टिलरीज को फायदा पहुंचाने की आशंका

Amresh Kushwaha | Mar 23, 2026, 11:11 IST
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मध्यप्रदेश आबकारी विभाग द्वारा देशी मदिरा आपूर्ति के टेंडर की तारीखों में बार-बार बदलाव से भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि यह देरी सोम डिस्टिलरीज को राहत दिलाने के लिए की जा रही है।

मध्यप्रदेश आबकारी विभाग ने देशी मदिरा आपूर्ति की टेंडर तारीख बार-बार बढ़ाई है। 13 मार्च की तारीख स्थगित कर 24 मार्च की गई, अब फिर आगे खिसकने की आशंका है। आरोप हैं कि इससे सोम डिस्टिलरीज को फायदा पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं…



एमपी में मदिरा टेंडर क्यों अटकी?

वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम सप्ताह चल रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेशभर की शराब दुकानों में देशी मदिरा (कंट्रीलिकर) की आपूर्ति के लिए राज्य के लिकर प्रोड्यूसर से टेंडर मांगी गई थी। वहीं, यह टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही दो बार टल चुकी है। साथ ही, तीसरी बार टलने की आशंका बनी हुई है।



सूत्र बताते हैं कि सारा काम सोम डिस्लरी को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने की नीयत से किया जा रहा है।



बता दें कि आबकारी विभाग ने पहले यह टेंडर 13 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे तय की थी। लेकिन 12 मार्च की रात 12 बजे ही आबकारी आयुक्त ने अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर इसे अचानक स्थगित कर दिया। इसके बाद तारीख बढ़ाकर 24 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे कर दी गई।



सूत्रों के अनुसार 23 मार्च 2026 की रात एक बार फिर से इस टेंडर की तारीख आगे बढ़ाई जा सकती है। यह स्थिति विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।



समझें, सोम डिस्टिलरीज का पेंच क्या है?

इस मामले में रायसेन की सोम डिस्टिलरीज प्रायवेट लिमिटेड केंद्र में है। जहरीली शराब आपूर्ति से जुड़े पुराने प्रकरण के आधार पर पूर्व आबकारी कमिश्नर अभिजीत अग्रवाल ने सोम ग्रुप की दो निर्माण इकाइयों के सभी लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। इसके चलते सोम का शराब कारोबार एक महीने से पूरी तरह ठप है।



इधर लाइसेंस बहाली के लिए सोम ग्रुप के संचालकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई से मना करने के बाद मामला फिर से उच्च न्यायालय में है। 23 मार्च 2026 यानी आज इस मामले की सुनवाई तय है।



अब समझिए यहां असली पेंच क्या है? अगर 24 मार्च को टेंडर होती है और सोम को उससे पहले 23 मार्च को हाईकोर्ट से कोई राहत मिल जाती है, तो वे इस टेंडर में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं रहेंगे। जबकि राज्य के अन्य 10 योग्य लिकर प्रोड्यूसर इसमें बराबरी से हिस्सा ले सकते हैं। इसलिए कोशिश की जा रही है कि टेंडर की तारीख आगे बढ़ा दी जाए।



शिकायत में उठाए गए आरोप

ब्राइट जर्नलिस्ट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष पंकज सिंह भदौरिया ने 22 मार्च 2026 को मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा है। इसकी प्रतिलिपि उप-मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर और आबकारी आयुक्त को भी भेजी गई है।



इस प्रतिवेदन में कहा गया है कि बार-बार और अंतिम समय में टेंडर तारीख टालने से यह उचित आशंका पैदा होती है कि यह प्रक्रिया किसी विशेष संस्था को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। प्रतिवेदन में मांग की गई है कि बार-बार स्थगन के कारणों की उच्च स्तरीय जांच हो, टेंडर प्रक्रिया कानून के अनुसार बिना देरी के की जाए और किसी भी मनमाने विस्तार पर तत्काल रोक लगाई जाए।



पारदर्शिता पर उठ रहे हैं सवाल

यह मामला सिर्फ एक टेंडर टलने का नहीं है। यह सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत का सवाल है। जब किसी कंपनी के लाइसेंस पहले से निरस्त हों, मामला न्यायालय में हो और फिर भी तारीख इस तरह बढ़ाई जाए कि उसे फायदा मिल सके, तो यह सार्वजनिक राजस्व और प्रशासनिक ईमानदारी दोनों के लिए चिंता का विषय है।



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