चार जजों से दूर हुआ सोम डिस्टिलरीज केस, राहत नहीं मिली तो अब चीफ जस्टिस की बेंच में अपील
Neel Tiwari | Mar 15, 2026, 19:40 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन मामले में हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर कंपनी ने अपील दायर की। मामला अब चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सूचीबद्ध हुआ।
News in Short
- जस्टिस विवेक अग्रवाल ने अंतरिम राहत से किया इनकार
- पहले तीन जजों के सामने नहीं रखा जा सका मामला, अब डिविजन बेंच में होगी सुनवाई
- सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से अंतरिम राहत नहीं मिली।
- जस्टिस विवेक अग्रवाल ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
- राहत से इनकार के बाद कंपनी ने तुरंत डिविजन बेंच में अपील दायर की।
- पहले जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट सुनवाई से अलग हो चुके हैं।
- अब मामला चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सोमवार को सुना जाएगा।
News In Detail
राहत न मिलने के तुरंत बाद कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है। अब यह मामला सोमवार को चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
खास बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में अब तक चार न्यायाधीशों की बेंच के सामने मामला नहीं रखा जा सकता, जिससे यह मामला हाईकोर्ट में एक अनोखा उदाहरण बन गया है।
नकली परमिट से अवैध शराब का परिवहन
दरअसल 4 फरवरी 2026 को राज्य के आबकारी विभाग ने सोम डिस्टिलरीज के सेहतगंज और रोजराजक (जिला रायसेन) स्थित दो लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। विभाग ने वर्ष 2023 के उस मामले को आधार बनाया था जिसमें आरोप था कि कंपनी से जुड़े लोगों ने नकली परमिट के जरिए अवैध शराब का परिवहन किया था।
इस मामले में देपालपुर की सत्र अदालत ने कंपनी से जुड़े कुछ कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए सोम डिस्टिलरीज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और लाइसेंस निलंबन पर रोक की मांग की थी।
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आखिरकार जस्टिस विवेक अग्रवाल ने सुना मामला
इसके बाद आखिरकार यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच में आया, जहां सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
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कोर्ट ने क्यों नहीं दी थी तत्काल राहत
हालांकि अदालत ने कहा कि इस स्तर पर राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि भविष्य में याचिकाकर्ता सफल होते हैं तो उन्हें आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जा सकती है, इसलिए फिलहाल राहत देने का आधार नहीं बनता।
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अब मामला पहुंचा चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में
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चार जजों की बेंच से दूर हुआ मामला
इसके बाद जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट पहले ही खुद को इस केस से अलग कर चुके हैं। अब जस्टिस विवेक अग्रवाल इस मामले में आदेश दे चुके हैं और उनके आदेश के खिलाफ अपील दायर हो चुकी है, इसलिए अपील भी उनकी बेंच के सामने नहीं जा सकती।
इसी वजह से यह मामला एक ऐसा विरला उदाहरण बन गया है जिसमें चार अलग-अलग न्यायाधीशों की बेंच के सामने इसे नहीं रखा जा सकता। अब सबकी नजर चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में होने वाली सुनवाई पर टिकी है।
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