आज फिर 5800 करोड़ रुपए कर्ज ले रही मध्य प्रदेश सरकार
Bhopal. मध्यप्रदेश सरकार आज एक बड़ा वित्तीय कदम उठाने जा रही है। मंगलवार, 10 मार्च को राज्य सरकार 5800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने वाली है। आरबीआई के तय शेड्यूल के अनुसार, यह चालू वित्तीय वर्ष में सरकार की आखिरी उधारी होगी।
तीन किस्तों में आएगी कर्ज की राशि
आज ली जाने वाली उधारी एकमुश्त राशि नहीं है, बल्कि सरकार इसे तीन अलग-अलग किस्तों में लेगी। योजना के तहत, सरकार 1900 करोड़, 1700 करोड़ और 2200 करोड़ रुपए की तीन अलग-अलग किस्तें लेगी। खास बात यह है कि होली के त्योहार से पहले भी सरकार 6300 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है।
5.66 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा
एमपी मोहन सरकार पर कर्ज: इस नई उधारी के साथ ही मध्य प्रदेश पर लदे कुल कर्ज का बोझ अब और भारी होने वाला है। आज के 5800 करोड़ रुपए को जोड़कर इस वित्तीय वर्ष में लिया गया कुल कर्ज 85 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।
यदि हम राज्य के अब तक के कुल कर्ज की बात करें, तो यह आंकड़ा 5 लाख 66 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। बता दें कि 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 4 लाख 21 हजार 740 करोड़ रुपए था।
12 महीने में 19वीं बार उधारी
आंकड़े यह साबित कर रहे हैं कि सरकार को बार-बार बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। पिछले 12 महीनों में यह 19वीं बार है जब राज्य सरकार कर्ज ले रही है। यदि हम सिलसिलेवार देखें, तो इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही यह सिलसिला लगातार जारी है।
मई में सरकार ने ढाई-ढाई हजार करोड़ की दो किस्तें ली थीं। वहीं, नए साल यानी जनवरी 2026 से अब तक (मार्च के पहले हफ्ते तक) सरकार 5 बार कर्ज ले चुकी है।
आखिर क्यों पड़ रही है इतने कर्ज की जरूरत?
विशेषज्ञों और सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस उधारी के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण है केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिया जा रहा 50 साल का ब्याज मुक्त कर्ज। इस कर्ज का इस्तेमाल पूंजीगत खर्चों को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश में चल रही कई योजनाएं, कृषि और उद्योगों में निवेश, और सबसे अहम, पुराने कर्जों का मूलधन और ब्याज चुकाने के लिए सरकार को बड़ी राशि की जरूरत पड़ रही है।
ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर लगेगी बोली
यह पूरी प्रक्रिया आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी बॉन्ड की नीलामी के द्वारा पूरी होगी। इस दौड़ में सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं है; कर्नाटक 10 हजार करोड़ और तमिलनाडु 8 हजार करोड़ की उधारी के साथ आगे हैं। कुल मिलाकर, कई राज्य आज मिलकर 45 हजार 960 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रहे हैं।
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