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News in Short
दिल्ली के मध्य प्रदेश भवन में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है।
खाड़ी देशों में रहने वाले लोग 24 घंटे मदद ले सकते हैं।
सरकार ने व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी भी सार्वजनिक की है।
जरूरत पड़ने पर भारत सरकार और अन्य एजेंसियां सहयोग करेंगी।
ईरान-दुबई हमले के बाद कई लोग वहां अभी भी फंसे हैं।
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News In Detail
दिल्ली में बना कंट्रोल रूम
इजराइल-ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच खाड़ी देशों में रहने वाले मध्य प्रदेश के लोगों की मदद के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिया है। दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां से लोग आपातकालीन स्थितियों में सरकार से संपर्क कर सकते हैं।
इस कंट्रोल रूम का नंबर और ईमेल के जरिए लोग मदद ले सकते हैं। यह कंट्रोल रूम उन लोगों के लिए है जो खाड़ी देशों में पढ़ाई, काम, बिजनेस या किसी और वजह से रह रहे हैं। अगर किसी को किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो, तो वह सीधे इस कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं।
अगर जरूरत पड़ी तो भारत सरकार और अन्य एजेंसियों से भी संपर्क किया जाएगा और उनकी मदद दिलवाने की कोशिश की जाएगी। ये सारी मदद कंट्रोल रूम के जरिए ही होगी।
मध्य पूर्व एशिया देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि हेतु गए मध्यप्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली में 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 4, 2026
मध्यप्रदेश के नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हम लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में हैं।… pic.twitter.com/5t3ikFdmbj
संपर्क कैसे करें?
मध्यप्रदेश सरकार ने खाड़ी देशों में रहने वाले सभी प्रदेशवासियों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो, तो वे 24x7 चलने वाले कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
हेल्पलाइन नंबर: 011-26772005
व्हाट्सएप नंबर: 9818963273
ई-मेल: mphelpdeskgulf@gmail.com
अभी भी फंसे हैं लोग
दरअसल ईरान के दुबई पर हमले के बाद कई लोग वहां फंस गए थे। हालांकि कुछ लोग अब भारत लौट आए हैं। अभी भी कई लोग खाड़ी देशों के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। इन लोगों ने वीडियो जारी कर सरकार से मदद मांगी है। सरकार के इस कदम से खाड़ी देशों में रह रहे लोगों को राहत मिलेगी।
क्या है अमेरिका, इजरायल- ईरान युद्ध
अमेरिका और इजरायल ने शनिवार, 28 फरवरी को ईरान के प्रमुख शहरों पर हमला किया है। साथ ही ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइल साइटों पर भी हमला किया है। इस ऑपरेशन को इजरायल ने रोअरिंग लायन नाम दिया है। वहीं अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का नाम दिया है।
ईरान के सबसे बड़े नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई इन हमलों में मारे गए हैं। ईरान ने इस घटना के बाद पूरे देश में 40 दिनों का शोक घोषित किया है।
ईरान ने इजरायल (खासकर तेल अवीव) और इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इस हमले को ईरान ने ट्रुथफुल प्रॉमिस 4 नाम दिया है।
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इसलिए किया था हमला
अमेरिका और इजरायल का कहना है कि, ईरान तेजी से यूरेनियम को संवर्धित कर रहा था। इससे वह परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुंच गया था। इजरायल इसे अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है। इस हमले के जरिए वह ईरान के परमाणु केंद्रों को पूरी तरह तबाह करना चाहता है।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपना तर्क दिया है। इस हमले का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। साथ ही उसकी मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह से खत्म करना है। अमेरिका का कहना है कि ईरान ऐसी मिसाइलें बना रहा था, जो यूरोप और जल्द ही अमेरिका तक पहुंच सकती थी।
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