MP सरकार पर बढ़ता कर्ज: फिर लिए 4500 करोड़ रुपए, 5.33 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा

Amresh Kushwaha | Oct 19, 2026, 17:37 IST
एमपी सरकार ने फिर खोला कर्ज का खाता।
एमपी सरकार 4500 करोड़ रुपए का कर्ज और ले चुकी है। इसके बाद मध्यप्रदेश कुल कर्ज 5.33 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है। वित्त विभाग के मुताबिक राशि सिंचाई, बिजली, सड़कों और एक्सप्रेस-वे जैसे पूंजीगत कामों पर खर्च होगी। इस साल पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपए पार करने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि टैक्स में असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है।
MP government loan of Rs 4,500 crore through RBI takes MP government debt 2026 beyond Rs 5.33 lakh crore, state says funds go to capital works.

एमपी सरकार 4500 करोड़ रुपए का कर्ज

मध्यप्रदेश सरकार 4500 करोड़ रुपए का कर्ज और ले चुकी है। यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI - Reserve Bank of India) से लिया गया है। इससे मध्यप्रदेश कुल कर्ज 5.33 लाख करोड़ रुपए से ऊपर हो गया है।



MP government loan की यह राशि 19 अक्टूबर को तीन हिस्सों में ली गई है। सरकार इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में बाजार से लगातार कर्ज ले रही है। अब तक कुल 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया जा चुका है।



सरकार विकास योजनाओं के लिए यह कर्ज ले रही है। कर्ज का अनुपात जीएसडीपी (GSDP - Gross State Domestic Product) से तय होता है। दिसंबर तक बाजार ऋण की स्वीकृत सीमा तय है।



यह पैसा कहां खर्च होगा

असली सवाल यह है कि यह पैसा जा कहां रहा है। वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पूरा ऋण पूंजीगत कामों पर खर्च होगा।



इन कामों में सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। बिजली की अधोसंरचना भी इसमें आती है। सड़कें, एक्सप्रेस-वे और दूसरी बड़ी परिसंपत्तियां भी इसी राशि से बनेंगी।



सरकार का मानना है कि इन निवेशों से उत्पादन और रोजगार बढ़ेगा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद में भी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है।



अनुमान है कि इस साल पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपए पार करेगा।



समय पर हो रहा कर्ज का भुगतान

सरकार का दावा है कि मूलधन और ब्याज समय पर चुका रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में 29 हजार 980 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया गया था। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक 12 हजार 73 करोड़ रुपए चुकाए जा चुके हैं।



सरकार के मुताबिक इससे वित्तीय संस्थाओं में प्रदेश की साख मजबूत है।



एमपी की कर्ज सीमा कौन तय करता है

सरकार अपनी मर्जी से कितना भी कर्ज नहीं ले सकती। संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत कई मामलों में केंद्र की सहमति चाहिए। आम तौर पर राज्यों की सालाना सीमा जीएसडीपी के करीब 3 प्रतिशत होती है।



जीएसडीपी का मतलब है एक साल में राज्य की कुल आर्थिक पैदावार। इसमें राज्य में बनी सभी चीजों और सेवाओं का मूल्य जुड़ता है।



2026-27 के लिए एमपी की कर्ज सीमा 87 हजार करोड़ रुपए के करीब है। कर्ज लेते समय सरकार को एफआरबीएम कानून के नियम भी मानने पड़ते हैं।



आरबीआई से कर्ज कैसे मिलता है

राज्य सरकार आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म (RBI e-Kuber) से कर्ज जुटाती है। इसी प्लेटफॉर्म पर ई-कुबेर एसडीएल नीलामी होती है। एसडीएल (SDL – State Development Loan) की बोलियां यहीं लगती हैं।



कोशिश रहती है कि सरकार को कम ब्याज पर पैसा मिले। आरबीआई यह नीलामी मंगलवार को करता है। अलग-अलग राज्यों के लिए तय शेड्यूल के मुताबिक नीलामी होती है।



मध्यप्रदेश भी इसी प्रक्रिया से कर्ज लेता है। आम तौर पर महीने में दो बार ऐसी नीलामी होती है।



क्या जनता पर बढ़ेगा टैक्स

यह सवाल हर आम आदमी के मन में उठता है। क्या सरकार कर्ज का बोझ लोगों पर डालेगी। क्या जनता पर बढ़ेगा टैक्स।



सरकार का कहना है कि फिलहाल ऐसा नहीं है। उसके मुताबिक किसी टैक्स में असामान्य बढ़ोतरी नहीं की गई है। खर्च का इंतजाम तय कर्ज सीमा और अपने संसाधनों से हो रहा है।



सोचिए, 5.33 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा कितना बड़ा है।



अब आगे क्या होगा

दिसंबर तक बाजार ऋण की स्वीकृत सीमा तय है। उसी के तहत यह कर्ज लिया गया है।



इस साल पूंजीगत खर्च एक लाख करोड़ रुपए पार करने का अनुमान है। MP government debt 2026 का अंतिम आंकड़ा आगे के कर्ज पर निर्भर करेगा।



इस खबर में विपक्ष या अर्थशास्त्रियों का पक्ष शामिल नहीं है। सारे आंकड़े वित्त विभाग के अधिकारियों और सरकार के दावों पर आधारित हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है:

राज्य का कर्ज सीधे आम नागरिक की जेब और भविष्य से जुड़ा है। इसी से सड़कें, सिंचाई और बिजली जैसे काम होते हैं, लेकिन चुकाने की जिम्मेदारी आगे भी बनी रहती है। संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत कर्ज पर केंद्र की भूमिका है, यानी यह पूरी तरह राज्य की मर्जी नहीं है। पारदर्शिता का तकाजा है कि कर्ज के आंकड़े और खर्च का हिसाब जनता तक साफ पहुंचे। अभी ये आंकड़े सरकार के बताए हैं। स्वतंत्र विश्लेषण आना बाकी है।

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