मप्र में डिजिटल करेंसी में मिलेगी विकास की रकम, महीनेभर में खर्च नहीं की तो लौटेगी खजाने में

Amresh Kushwaha | Oct 12, 2025, 15:05 IST
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मध्यप्रदेश सरकार ने डिजिटल करेंसी के जरिए सरकारी भत्तों का भुगतान करने का फैसला लिया है। यदि राशि एक महीने में खर्च नहीं हुई, तो वह सरकारी खजाने में लौट आएगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकारियों के पेट्रोल और फोन भत्ते का भुगतान अब डिजिटल करेंसी के जरिए करने का फैसला लिया है। इसके तहत एक महीने के भीतर राशि खर्च न होने पर वह वापस सरकारी खजाने में चली जाएगी। यह डिजिटल करेंसी केवल निर्धारित उपयोग के लिए ही खर्च की जा सकेगी। यानी अगर पेट्रोल या फोन के भत्ते के लिए दी गई राशि बचती है, तो वह एक महीने के अंदर खर्च करनी होगी, अन्यथा वह ट्रेजरी में वापस चली जाएगी।



सभी विभागों में लागू होगी नई व्यवस्था

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सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही

मध्यप्रदेश में डिजिटल करेंसी से भुगतान करने का उद्देश्य सरकार के खर्च की ट्रैकिंग आसान करना है। अब हर एक ट्रांजेक्शन और खर्च की जानकारी एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इसके अलावा, फिजिकल बिल और कूपन की जरूरत भी समाप्त हो जाएगी।



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मध्यप्रदेश में डिजिटल करेंसी की खबर को एक नजर में समझें...

  • डिजिटल करेंसी से भुगतान: मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकारियों के पेट्रोल और फोन भत्ते का भुगतान डिजिटल करेंसी के जरिए करने का निर्णय लिया है, जो केवल निर्धारित उपयोग के लिए खर्च की जा सकेगी।
  • राशि वापसी की व्यवस्था: यदि एक महीने के भीतर राशि खर्च नहीं होती, तो वह सरकारी खजाने में वापस चली जाएगी।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल करेंसी से सभी खर्चों की ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, और फिजिकल बिल की आवश्यकता समाप्त होगी।
  • सिस्टम की कार्यप्रणाली: यह मोबाइल वॉलेट और यूपीआई की तरह काम करेगा, जिसमें अधिकारी का सर्विस कोड, मोबाइल नंबर और आधार लिंक होगा।
  • मॉनिटरिंग और ऑडिट: डिजिटल करेंसी से सरकारी खर्च का ऑडिट सरल होगा, और खर्च की सभी जानकारी ट्रेजरी डेटा में दिखाई देगी।

कैसे काम करेगी डिजिटल करेंसी?

यह डिजिटल करेंसी मोबाइल वॉलेट और यूपीआई की तरह काम करेगी। अधिकारी के सर्विस कोड, मोबाइल नंबर और आधार को जोड़कर सरकार का डिजिटल करेंसी एप डाउनलोड किया जाएगा। इसमें एक पिन मिलेगा, जिसके बाद वॉलेट खुलेगा और राशि का उपयोग किया जा सकेगा।



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रिजर्व बैंक से मिली हिदायत

भारतीय रिजर्व बैंक ने दो साल पहले सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल के लिए निर्देश दिए थे। अब मध्यप्रदेश ने इसे लागू किया है। बता दें कि हरियाणा और महाराष्ट्र पहले ही इस व्यवस्था का इस्तेमाल कर चुके हैं।



कैसे होगा भुगतान और मॉनिटरिंग?

पेट्रोल-डीजल और फोन भत्ते के लिए राशि डिजिटल करेंसी के रूप में अधिकारियों के मोबाइल पर जाएगी। उदाहरण के तौर पर, एक अधिकारी को हर माह 700 से 1000 रुपए पेट्रोल के भत्ते के लिए मिलेंगे। इसी राशि से वह पेट्रोल पंप पर भुगतान करेगा। हर खर्च की जानकारी ट्रेजरी के डेटा में दिखाई देगी।



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बैंकों से जुड़ा सिस्टम

आरबीआई की मंजूरी से, मध्यप्रदेश सरकार ने 15 बैंकों को डिजिटल करेंसी से जोड़ लिया है। पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से इस एप को आगे बढ़ाया जाएगा।



एक्सपायरी फीचर से जवाबदेही बढ़ेगी

डिजिटल करेंसी का एक महत्वपूर्ण फीचर एक्सपायरी है। इसका मतलब है कि यदि राशि एक महीने में खर्च नहीं हुई तो वह वापस ट्रेजरी में चली जाएगी। यह व्यवस्था सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करेगी।



ऑडिट होगा सरल और डिजिटल डेटा से

ट्रेजरी कमिश्नर भास्कर लक्षकार ने बताया कि इस डिजिटल करेंसी प्रोजेक्ट से सरकारी खर्च का ऑडिट करना सरल होगा, और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।



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