पीएम मोदी के जन्मदिन से पहले मध्यप्रदेश सरकार ने लिया 2500 करोड़ का कर्ज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले मध्यप्रदेश सरकार ने फिर 2500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह रकम तीन अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटीज के जरिए जुटाई गई है।
सरकार ने यह कर्ज Reserve Bank of Indiaकी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से लिया। मंगलवार को सिक्योरिटीज की नीलामी हुई थी। इसके बाद बुधवार को सरकार को कर्ज की रकम मिल गई।
यह पैसा विकास योजनाओं और अलग-अलग परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा। इससे पहले एक सितंबर को भी सरकार ने 3,600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।
उस समय भी कर्ज लेने की वजह विकास और उत्पादक योजनाओं के लिए धन जुटाना बताई गई थी।
बता दें कि नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार का कर्ज 53 हजार 900 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, मध्यप्रदेश सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
700 करोड़ का कर्ज आठ साल का
सरकार ने पहली सरकारी सिक्योरिटी से 700 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह मध्यप्रदेश सरकारी सिक्योरिटी 2034 की री-इश्यू प्रक्रिया है।
इस कर्ज पर सरकार को हर साल 7.39 प्रतिशत ब्याज देना होगा। कर्ज की अवधि आठ साल तय की गई है।
यह सरकारी सिक्योरिटी 22 जुलाई 2026 को जारी हुई थी। सरकार इसका मूलधन 22 जुलाई 2034 को चुकाएगी।
ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा। इसके लिए 22 जनवरी और 22 जुलाई की तारीख तय है।
री-इश्यू का मतलब पहले जारी सिक्योरिटी को दोबारा जारी करना है। इससे सरकार बाजार से अतिरिक्त पैसा जुटा पाती है।
900 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए
दूसरी सरकारी सिक्योरिटी के जरिए सरकार ने 900 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस कर्ज पर हर साल 7.58 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
इस कर्ज की अवधि 12 साल तय की गई है। यह सिक्योरिटी 22 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी।
सरकार को इसका पूरा मूलधन 22 जुलाई 2038 को चुकाना होगा। ब्याज का भुगतान हर छह महीने में किया जाएगा।
इसके लिए 22 जनवरी और 22 जुलाई की तारीख तय है। यानी सरकार को तय समय पर ब्याज देना होगा।
इस कर्ज से सरकार की लंबे समय की वित्तीय जरूरतें पूरी होंगी। साथ ही विकास कार्यों के लिए भी पैसा जुटाया जा सकेगा।
सबसे लंबा कर्ज 22 साल का
सरकार ने तीसरी सरकारी सिक्योरिटी से भी 900 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह तीनों कर्जों में सबसे लंबी अवधि वाला है।
इस कर्ज पर हर साल 7.66 प्रतिशत ब्याज देना होगा। इसकी अवधि 22 साल तय की गई है।
यह सिक्योरिटी 19 अगस्त 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। सरकार को इसका मूलधन 19 अगस्त 2048 को लौटाना होगा।
ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा। इसके लिए 19 फरवरी और 19 अगस्त की तारीख तय है।
सरकार को मूलधन चुकाने के लिए लंबा समय मिलेगा। हालांकि, इस दौरान ब्याज का भुगतान लगातार करना होगा।
तीनों कर्ज की शर्तें अलग
सरकार ने तीनों सरकारी सिक्योरिटीज पर अलग-अलग ब्याज दर तय की है। पहली सिक्योरिटी पर 7.39 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
दूसरी सिक्योरिटी पर ब्याज दर 7.58 प्रतिशत है। वहीं, तीसरी सिक्योरिटी पर सबसे ज्यादा 7.66 प्रतिशत ब्याज लगेगा।
तीनों कर्जों की अवधि भी अलग रखी गई है। पहला कर्ज आठ साल, दूसरा 12 साल और तीसरा 22 साल का है।
इस प्रक्रिया से सरकार को तुरंत पैसा मिल जाता है। इसके बदले उसे तय अवधि तक नियमित ब्याज चुकाना पड़ता है।
कर्ज की अवधि पूरी होने पर सरकार मूलधन वापस करती है। इस पूरी प्रक्रिया को सरकारी बाजार उधारी कहा जाता है।
बैंकों के लिए निवेश योग्य
सरकारी दस्तावेजों में इन प्रतिभूतियों की निवेश योग्यता भी बताई गई है। इन्हें बैंक SLR (Statutory Liquidity Ratio) निवेश के तहत खरीद सकेंगे।
SLR नियम के तहत बैंकों को अपनी जमा राशि का कुछ हिस्सा सुरक्षित निवेशों में रखना होता है। सरकारी प्रतिभूतियां ऐसे सुरक्षित निवेशों में शामिल होती हैं।
इन सिक्योरिटीज को रेडी फॉरवर्ड फैसिलिटी के लिए भी योग्य माना गया है। इसमें प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री तय शर्तों पर होती है।
इससे सरकारी सिक्योरिटीज का बाजार में लेन-देन आसान हो जाता है। साथ ही, निवेशकों के लिए इनकी उपयोगिता भी बढ़ जाती है।
सरकार पर लगातार बढ़ रहा कर्ज
नई उधारी के बाद मध्य प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपए हो गया है। चालू वित्त वर्ष में सरकार अब तक 53,900 करोड़ रुपए उधार ले चुकी है।
यह कर्ज (MP government loan) विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए लिया गया है। इस राशि का इस्तेमाल अलग-अलग विकास कार्यों में किया जाएगा।
कर्ज मिलने से कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सरकार को आगे चलकर इस पर ब्याज और मूलधन चुकाना होगा।
राज्य सरकार को अलग-अलग समय पर लिए गए सभी कर्ज (मध्यप्रदेश सरकार कर्ज) लौटाने होंगे। इसके लिए बजट में ब्याज और कर्ज भुगतान की राशि रखनी पड़ती है।
कर्ज बढ़ने के साथ सरकार की वित्तीय जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। इसलिए कर्ज लेने और उसके इस्तेमाल पर नजर रखना जरूरी है।
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