एमपी में प्रमोशन से पहले सीनियरिटी की कवायद, सरकार के कदम पर उठे नए सवाल
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 2029 तक की सीनियरिटी सूची तैयार करने के निर्देश।
- विभाग 2025 के प्रमोशन नियमों के अनुसार सूची बनाएंगे।
- प्रमोशन पर अंतिम फैसला सरकार के अगले निर्देशों के बाद होगा।
- हाईकोर्ट में मामला लंबित होने से अधिकारी भी असमंजस में।
- सामान्य वर्ग संगठन ने नए नियमों का विरोध किया।
- संगठन ने हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया।
मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन का मामला एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार ने फिलहाल प्रमोशन की जगह 2029 तक की सीनियरिटी सूची तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हालांकि, इस कदम के साथ ही सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। सामान्य वर्ग के कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया है कि नए नियमों के जरिए आरक्षित वर्ग को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
जीएडी ने क्या स्पष्ट किया?
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने साफ किया है कि विभागों को मध्यप्रदेश लोक सेवा प्रमोशन नियम-2025 के तहत एससी, एसटी और अनारक्षित पदों का निर्धारण करना होगा।
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए सभी विभाग इन्हीं प्रावधानों के आधार पर 2029 तक की सीनियरिटी सूची तैयार कर जीएडी को भेजेंगे।
अधिकारियों में अब भी असमंजस
बैठक में शामिल कई अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उन्हें केवल सीनियरिटी सूची तैयार करने के निर्देश मिले हैं। प्रमोशन की वास्तविक प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। चूंकि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सरकार के अगले निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
सामान्य वर्ग संगठन ने उठाए सवाल
सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन ने सरकार की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर का आरोप है कि सरकार 2025 के नियमों ( MP Promotion Rules) के जरिए 2002 जैसी प्रमोशन व्यवस्था लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, जिससे आरक्षित वर्ग को अतिरिक्त लाभ मिलने की आशंका है।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
डॉ. तोमर का कहना है कि आरक्षित वर्ग को निर्धारित सीमा से अधिक प्रमोशन पहले ही मिल चुके हैं। उनका दावा है कि पहले अनारक्षित वर्ग के लंबित प्रमोशन किए जाने चाहिए, उसके बाद ही किसी नई प्रक्रिया पर आगे बढ़ना उचित होगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह नए प्रमोशन नियमों और पूरी प्रक्रिया को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देगा।
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