एमपी सरकार 3 लाख पद करेगी समाप्त, आदेश का विरोध कर रहा कर्मचारी संगठन, काम बंद करने की दी धमकी
पूरी खबर को पांच पॉइंट में समझें-
- 22 दिसंबर 2025 को मप्र सरकार ने तीन लाख पदों को सांख्येत्तर (Non-Statistical) घोषित किया। इससे दैनिक वेतनभोगी, स्थायी और अंशकालिक कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया।
- कर्मचारियों ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन किया। इसमें दैनिक वेतनभोगी, स्थायी, और अंशकालिक कर्मचारी शामिल हुए।
- मांगों में कर्मचारियों का नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति, चिकित्सा सुविधा, और पेंशन लाभ शामिल हैं।
- कर्मचारी मंच ने कहा कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे 15 दिनों में संयुक्त हड़ताल करेंगे।
- कर्मचारी संगठनों ने आदेश को कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन बताया और इसे कर्मचारियों के भविष्य के लिए खतरे के रूप में देखा।
BHOPAL. मध्य प्रदेश सरकार के हाल ही में जारी आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। कर्मचारी संगठनों ने रविवार, 29 दिसंबर को राजधानी भोपाल में जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रदर्शन में दैनिक वेतनभोगी, स्थायी कर्मचारी और अंशकालिक कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार का यह आदेश कर्मचारियों के खिलाफ है और इसे तत्काल वापस लिया जाए।
जानें क्या है सरकार का आदेश?
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कर्मचारी मंच की पांच सूत्रीय मांगें
मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच (Employee Federation) ने सरकार के आदेश का विरोध करते हुए अपनी पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि पहले सभी दैनिक वेतनभोगी, स्थायी और अंशकालिक कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
इसके बाद ही पदों को सांख्येत्तर घोषित किया जाए। इसके अलावा, कर्मचारियों ने अनुकंपा नियुक्ति (compassionate appointment) की पात्रता, आयुष्मान कार्ड के तहत 5 लाख रुपए तक की चिकित्सा सुविधा, और पेंशन लाभ देने की मांग की है।
कर्मचारी संगठन की चेतावनी
कर्मचारी मंच ने सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों में आदेश वापस नहीं लिया गया, तो हम सभी कर्मचारी संयुक्त रूप से हड़ताल करेंगे। इनमें स्थायी, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालिक, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल होंगे।
यह हड़ताल काम बंद करने की होगी। कर्मचारी मंच का कहना है कि आदेश कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ है। वे इसे वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। इससे राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
कर्मचारियों के अधिकारों का है उल्लंघन
कर्मचारी संगठनों ने इस आदेश को कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि यह आदेश कर्मचारियों के भविष्य के लिए खतरनाक है। वे इसे कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला मानते हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है। साथ ही, क्या कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जाता है या नहीं।
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