मध्य प्रदेश को मिलेंगे चार नए ग्रीन फील्ड हाईवे, जानिए किन शहरों को फायदा
मध्य प्रदेश सरकार राज्य में चार नए ग्रीन फील्ड हाईवे बनाने की तैयारी में है। इनमें सागर-जबलपुर, कटनी-सिंगरौली, भोपाल-जबलपुर और भोपाल-ग्वालियर रूट शामिल हैं। इन सड़कों के बनने से मौजूदा सड़क दूरी और यात्रा समय दोनों में बड़ी कमी आने का अनुमान है। thesootr को मिली जानकारी के अनुसार चारों रूट पर मौजूदा सफर के मुकाबले करीब आधा समय बचने का दावा किया गया है।
DPR तैयार, डिजाइन अंतिम चरण में
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की डीपीआर(DPR- Detailed Project Report) रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी परियोजनाएं फिलहाल प्रस्ताव और डिजाइन चरण में हैं।
मिली जानकारी के अनुसार निगम प्रदेश भर में HAM (Hybrid Annuity Model) और BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल पर कई सड़क परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रहा है। इनमें कुछ परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। कुछ टेंडर चरण में हैं। कुछ को SLEC (State Level Empowered Committee) से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि कुछ अभी डीपीआर चरण में ही हैं। चार ग्रीन फील्ड हाईवे इसी बड़ी योजना का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
क्या है पूरा प्लान
फिलहाल चार रूट पर ग्रीन फील्ड हाईवे प्रस्तावित हैं-
- पहला रूट सागर से जबलपुर के बीच है, जिसकी मौजूदा सड़क दूरी 192 किलोमीटर है और मौजूदा यात्रा समय करीब 3 घंटे 30 मिनट में पूरी होती है। ग्रीन फील्ड बनने से यह दूरी घटकर 135 किलोमीटर रह जाने का अनुमान है। इससे यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटा 45 मिनट रह सकता है।
- दूसरा रूट कटनी से सिंगरौली के बीच प्रस्तावित है। यहां मौजूदा दूरी 299 किलोमीटर है और मौजूदा यात्रा समय करीब 6 घंटे 15 मिनट है। डीपीआर के अनुसार प्रस्तावित ग्रीन फील्ड दूरी घटकर 232 किलोमीटर रह सकती है, जिससे यात्रा समय करीब 3 घंटे 30 मिनट तक सिमट सकता है।
- तीसरा रूट भोपाल से जबलपुर के बीच है, जहां मौजूदा दूरी 286 किलोमीटर और यात्रा समय करीब 5 घंटे है। प्रस्तावित ग्रीन फील्ड दूरी 239 किलोमीटर आंकी गई है, जिससे समय घटकर करीब 3 घंटे 30 मिनट रह सकता है।
- चौथा और सबसे लंबा रूट भोपाल से ग्वालियर के बीच है। यहां मौजूदा दूरी 400 किलोमीटर और यात्रा समय करीब 6 घंटे 30 मिनट है। प्रस्तावित ग्रीन फील्ड दूरी घटकर 320 किलोमीटर रह सकती है, जिससे समय घटकर करीब 4 घंटे 30 मिनट होने का अनुमान है।
कितना समय बचेगा
डीपीआर में हर रूट के लिए संभावित समय बचत भी बताई गई है। सागर-जबलपुर रूट पर करीब 1 घंटा 45 मिनट, कटनी-सिंगरौली रूट पर करीब 2 घंटे 45 मिनट, भोपाल-जबलपुर रूट पर करीब 1 घंटा 30 मिनट और भोपाल-ग्वालियर रूट पर करीब 2 घंटे की बचत का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह सभी आंकड़े अनुमानित हैं और अंतिम निर्माण के बाद ही वास्तविक समय बचत स्पष्ट होगी।
ग्रीन फील्ड हाईवे क्या होता है?
ग्रीन फील्ड हाईवे (मध्य प्रदेश हाईवे) वह सड़क परियोजना होती है जो बिल्कुल नई जमीन पर, शून्य से बनाई जाती है- यानी किसी मौजूदा सड़क को चौड़ा करने या अपग्रेड करने के बजाय एक नया, सीधा रास्ता चुना जाता है जहां पहले से कोई प्रमुख सड़क नहीं थी।
इसके मुख्य फायदे
सीधा और छोटा रूट - मौजूदा शहरों, गांवों और मोड़ों से बचते हुए दो बिंदुओं के बीच सबसे सीधी लाइन में सड़क बनाई जाती है, इसलिए दूरी घट जाती है (जैसे सागर-जबलपुर में 192 किमी से घटकर 135 किमी)।
कम भीड़भाड़- शहरों के बीचोंबीच से न गुज़रने के कारण ट्रैफिक जाम, टोल नाकों और चौराहों में कम समय लगता है।
बेहतर डिज़ाइन स्पीड- नई सड़क शुरू से ही चौड़ी, कम मोड़ वाली और ऊंची गति सीमा के हिसाब से डिज़ाइन की जा सकती है (जैसे एक्सप्रेसवे स्तर की)।
इसके उलट ब्राउन फील्ड प्रोजेक्ट होता है, जिसमें मौजूदा सड़क को ही चौड़ा, मज़बूत या अपग्रेड किया जाता है।
आम लोगों पर असर
अगर यह चारों ग्रीन फील्ड हाईवे (एमपीआरडीसी की सड़क) प्रस्ताव के मुताबिक बनते हैं, तो सागर, जबलपुर, कटनी, सिंगरौली, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों के बीच आवाजाही आसान होगी। इससे व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं (जैसे मेडिकल इमरजेंसी) में लगने वाला समय भी घट सकता है। दूसरी ओर, निर्माण के दौरान प्रभावित होने वाले किसानों और गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण एक अहम मुद्दा रहेगा।
लंबी अवधि में असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रीन फील्ड हाईवे जैसी परियोजनाएं लंबी अवधि में राज्य के आर्थिक गलियारों को मजबूत करती हैं और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देती हैं। हालांकि इसके लिए समयबद्ध निर्माण, पारदर्शी भूमि अधिग्रहण और पर्याप्त बजट आवंटन जरूरी माना जाता है।
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