MP हाईकोर्ट का फैसला: निजी मंदिरों में सरकार नहीं कर सकती हस्तक्षेप, सीएस को दिए निर्देश
Jitendra Shrivastava | May 19, 2026, 23:51 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. MP हाईकोर्ट ने कहा, निजी मंदिरों में सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती। मंदिर की भूमि देवता के नाम दर्ज हो। इसको लेकर मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं।
ऐसे समझें पूरा मामला...
- निजी मंदिर में सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
- मंदिर भूमि देवता के नाम पर दर्ज होगी।
- कलेक्टर निजी मंदिर के प्रबंधक नहीं बन सकते।
- सरकारी कर्मचारी धार्मिक समिति में नहीं होंगे।
- तीन महीने में मंदिर की प्रकृति तय की जाए।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मंदिर से जुड़ी भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर या पुजारी को प्रबंधक या ट्रस्टी के रूप में दर्ज करने की जरूरत नहीं है। ऐसी संपत्ति सीधे देवता के नाम पर दर्ज होनी चाहिए। यह फैसला धार्मिक संपत्ति और प्रशासनिक अधिकारों के बीच की सीमा रेखा को स्पष्ट करता है।
पुजारी की याचिका पर हुई सुनवाई
पुजारी ने कोर्ट को बताया कि उनका परिवार पिछली चार पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा कर रहा है। वर्ष 1913 में स्वर्गीय भवानी पटेल ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। रखरखाव और पूजा-अर्चना के लिए लगभग 14 एकड़ भूमि भी छोड़ी गई थी।
सरकारी हस्तक्षेप पर कोर्ट की आपत्ति
सरकारी कर्मचारी धार्मिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते। साथ ही बिना यह जांचे कि मंदिर निजी है या सार्वजनिक, सरकार ने प्रबंधन योजना थोपी। हाईकोर्ट ने इसे कानूनी रूप से अनुचित माना।
देवता हैं संपत्ति के असली स्वामी
कानून के अनुसार देवता को एक विधिक इकाई (Legal Entity) माना जाता है। उनकी ओर से 'नेक्स्ट फ्रेंड' (Next Friend) कार्य करता है। पुजारी केवल पूजा-अर्चना और संपत्ति की देखरेख के लिए नियुक्त होता है।
कलेक्टर नहीं बन सकते प्रबंधक
यदि किसी निजी मकान या निजी संपत्ति में देवता स्थापित हैं, तो उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह आदेश देशभर के निजी मंदिरों की स्वायत्तता के लिए एक मजबूत कानूनी आधार बनाता है।
मुख्य सचिव को निर्देश जारी
विवाद की स्थिति में मंदिर की प्रकृति- सार्वजनिक या निजी- की विधिसम्मत जांच की जाए। इसके बाद ही किसी प्रकार की प्रबंधन योजना लागू की जा सकती है। यह निर्देश पूरे मध्यप्रदेश के सभी जिलों पर लागू होगा।
तीन महीने में निर्णय का आदेश
इस आदेश से पुजारी परिवार को बड़ी राहत मिली है। साथ ही यह फैसला अन्य निजी मंदिरों के पुजारियों और प्रबंधकों के लिए भी महत्वपूर्ण नजीर बन गया है।
फैसले का व्यापक महत्व
पुजारी समुदाय और धार्मिक न्यास (Religious Trust) के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। इस फैसले से स्पष्ट होता है कि संविधान में धर्म और राज्य के बीच स्पष्ट सीमाएं हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश देशभर में मिसाल बन सकता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी के सरकारी स्कूलों में “गेस्ट टीचर मिशन” शुरू! 70 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज
स्कूलों में शिफ्ट होंगी आंगनवाड़ियां! खर्च घटाने की तैयारी या बच्चों की सुविधाओं पर संकट?
कान्हा में आखिर क्यों बढ़ रही बाघों की जंग? एक महीने में 8 मौतों ने बढ़ाई चिंता
जुन्नारदेव भाजपा मंडल अध्यक्ष विवेक चंद्रवंशी का इस्तीफा, आपत्तिजनक ऑडियो कांड के बाद बढ़ा विवाद
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA