MP के सरकारी अस्पतालों की लापरवाही ने अप्रैल में ली 6 जानें, क्या भगवान भरोसे हैं मरीज?
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- सागर BMC में गलत इंजेक्शन से 30 साल की प्रसूता की मौत हो गई।
- परिजनों का आरोप है कि महिला दो घंटे तक दर्द में तड़पती रही, कोई नहीं आया।
- द सूत्र की पड़ताल में अप्रैल 2026 में आधा दर्जन से ज्यादा लापरवाही के मामले मिले हैं।
- भोपाल, बुरहानपुर, अनूपपुर और सतना में भी मौत की घटनाएं सामने आई हैं।
- प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 6 हजार 500 से ज्यादा पद अभी भी खाली हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं हैं। यहां मरीज बीमारी से कम और सिस्टम की लापरवाही से ज्यादा मर रहे हैं। न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न दवाएं, न प्रशिक्षित स्टाफ.. बस है तो लंबा इंतजार, बदइंतजामी और टूटी उम्मीदें। ताजा मामला सागर जिले के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का है। यहां सोमवार को एक 30 साल की प्रसूता संध्या अहिरवार की मौत हो गई।
सागर BMC में क्या हुआ?
नयाखेड़ा निवासी संध्या अहिरवार को प्रसव पीड़ा होने पर 17 अप्रैल को परिजन एंबुलेंस से बंडा अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें BMC रैफर किया गया। रविवार की रात अचानक संध्या को तेज दर्द हुआ। इसके बाद उन्हें लेबर रूम में शिफ्ट किया गया।
परिजनों का कहना है कि संध्या दो घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। बाद में स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया, जिससे हालत और बिगड़ गई। सोमवार सुबह संध्या ने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद बीएमसी प्रबंधन ने शव का चेहरा तक नहीं देखने दिया। इस बात से पूरे परिवार का गुस्सा और बढ़ गया। अस्पताल परिसर में घंटों हंगामा होता रहा। अंत में पुलिस को बुलाकर स्थिति संभाली गई। परिजन निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन मीडिया के सवालों से बच रहा है।
अप्रैल में एक के बाद एक मामले
सागर का यह मामला अकेला नहीं है। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया कि अप्रैल 2026 में ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आधा दर्जन से ज्यादा ऐसी घटनाएं सामने आईं।
17 अप्रैल को भोपाल के बैरागढ़ सिविल अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के गेट और परिसर में तोड़फोड़ कर दी। हालात संभालने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा।
18 अप्रैल को बुरहानपुर जिला अस्पताल में 55 साल की एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर समय पर इलाज न शुरू करने के आरोप लगाए। मामला बड़ा होते देख अस्पताल प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए।
अनूपपुर जिले के कोतमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre) में राम भुवन तिवारी नाम के मरीज की इलाज में देरी (डॉक्टरों की लापरवाही) से मौत हो गई। परिजनों का कहना था कि रात में डॉक्टर सो रहे थे। बार-बार बुलाने के बाद भी कोई नहीं आया। इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच शुरू की गई है।
हमीदिया में जिंदा बच्चा मृत घोषित
राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल, जो प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है, वहां से मार्च 2026 में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां डॉक्टरों ने एक नवजात को मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट तक जारी कर दिया।
करीब चार घंटे बाद जब परिजन शव ले जा रहे थे, तब बच्चे में हलचल हुई। वह अचानक सांस लेने लगा। इसके बाद उसे वापस एनआईसीयू (NICU - Neonatal Intensive Care Unit) में भर्ती कराया गया।
यह हफ्तेभर में हमीदिया में दूसरी ऐसी बड़ी घटना थी। परिजनों ने जमकर हंगामा किया और प्रबंधन ने जांच बैठाई। हमीदिया का दुखद इतिहास यहीं नहीं रुकता। मार्च 2025 में आईसीयू-3 (ICU - Intensive Care Unit) में एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर हमला किया था, जिसमें तीन डॉक्टर घायल तक हो गए थे। दिसंबर 2025 में अस्पताल के मुर्दाघर के पीछे दो नवजात शिशुओं के जले हुए शव मिले थे।
सतना में किडनी सर्जरी में बड़ी चूक
यह मामला निजी अस्पताल से जुड़ा है, लेकिन इससे पता चलता है कि मध्य प्रदेश में मरीजों की जान कितनी असुरक्षित है। सतना के पाठक नर्सिंग होम में किडनी की पथरी के इलाज के लिए 26 साल के रवि रजक भर्ती हुए थे। सर्जरी के दौरान कथित तौर पर उनकी स्वस्थ किडनी में गहरा कट लग गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बच्चे की सर्जरी में गलती से दोनों किडनियां निकालने का मामला भी सामने आया। दोनों घटनाओं के वीडियो खूब वायरल हुए। डॉक्टरों ने कथित तौर पर गलती स्वीकार की। परिजनों ने सड़क जाम कर सख्त कार्रवाई की मांग की।
बजट करोड़ों का, पद हजारों खाली
यह सब तब हो रहा है जब मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग का ताजा बजट 23 हजार 747 करोड़ रुपए है। द सूत्र की पड़ताल के मुताबिक, प्रदेश में 55 जिले हैं लेकिन जिला अस्पताल केवल 52 हैं। इसके अलावा 119 सिविल अस्पताल, 350 से ज्यादा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 1,200 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
इन सब में डॉक्टरों के 6 हजार 500 से ज्यादा पद खाली हैं। इनमें सबसे बड़ी दिक्कत एक्सपर्ट डॉक्टरों की है। एक्सपर्ट डॉक्टरों के 1,200 से ज्यादा पद खाली हैं। सिर्फ राजधानी भोपाल के अस्पतालों में ही 23% डॉक्टरों के पद खाली हैं। स्त्री रोग, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट जैसे जरूरी पद अभी भी नहीं भरे गए हैं।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने करीब 2,500 मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इसमें 600 से ज्यादा एक्सपर्ट पदों पर सीधी भर्ती हो रही है। पांच मेडिकल कॉलेजों में 96 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की बहाली की जा रही है। लेकिन जब तक ये पद नहीं भरते, मरीजों का जोखिम बना रहेगा। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला ही इन मौतों की सबसे बड़ी वजह है।
FAQ
- मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के क्या मुख्य कारण हैं?
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला, डॉक्टरों की भारी कमी है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में 6,500 से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1,200 से ज्यादा पद शामिल हैं। दूसरा, प्रशिक्षित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। तीसरा, जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर है, जिससे लापरवाह कर्मचारियों पर समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती। चौथा, बुनियादी सुविधाओं और उपकरणों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। - सागर BMC में प्रसूता संध्या अहिरवार की मौत कैसे हुई?
नयाखेड़ा निवासी संध्या अहिरवार (30) को प्रसव पीड़ा होने पर 17 अप्रैल 2026 को बंडा अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) रेफर किया गया। रविवार की रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें लेबर रूम शिफ्ट किया गया। परिजनों के मुताबिक संध्या दो घंटे तक दर्द में तड़पती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बाद में स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया जिससे हालत और बिगड़ी और सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मौत के बाद शव का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। - मध्य प्रदेश सरकार अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। करीब 2,500 मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के 600 से ज्यादा पदों पर सीधी भर्ती की जा रही है। पांच मेडिकल कॉलेजों में 96 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर बहाल किए जा रहे हैं। साथ ही प्रदेश का स्वास्थ्य बजट 23,747 करोड़ रुपए रखा गया है। हालांकि स्त्री रोग, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, रेडियोलॉजी जैसे अहम विभागों में पद अभी भी खाली हैं और जमीन पर हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।
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