एमपी के सरकारी अस्पतालों में चल रहा घटिया क्वॉलिटी की दवाओं का खेल! दस के सैंपल जांच में फेल
Sourabh Bhatnagar | Mar 17, 2026, 10:01 IST
Fake Medicines Found MP Hospitals 10 Test Fail
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में नकली दवाइयां लगातार मिल रही हैं। साल 2026 की शुरुआत में ही 10 तरह की दवाएं खराब पाई गईं, जिनमें सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक दवाइयां जैसे सिफिक्सिम, एमिकेसिन और मीरोपीनम शामिल हैं।
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं (substandard medicines) की सप्लाई का मामला सामने आया है। साल 2026 के पहले महीने में ही 10 तरह की दवाएं अमानक पाई गई हैं। इसमें से सात दवाएं सिर्फ फरवरी में ही अमानक पाई गईं।
इन दवाओं में सिफिक्सिम, एमिकेसिन (Amikacin), सिप्रोफ्लोक्सेसिन (Ciprofloxacin), मेरोपेनम (Meropenem) जैसी एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। ये मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकती हैं।
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एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के अनुसार, अमानक दवाओं का पता तब चला जब इनका असर नहीं होने के कारण विभिन्न जिलों के सीएमएचओ या सिविल सर्जन ने इसकी जांच करवाई।
इससे पहले इन दवाओं को मरीजों (MP Hospitals) को दिया गया था। हालांकि,हेल्थ कॉर्पोरेशन ने संबंधित बैच की दवाओं के उपयोग पर रोक लगा दी है। उन दवाओं को एक से दो साल तक ब्लैकलिस्ट किया है।
लेकिन बार-बार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद अभी तक किसी भी कंपनी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जो चिंता का विषय है।
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ये दवाएं एमपी के अस्पतालों में अमानक पाई गई हैं:
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन (MP Public Health Services Corporation) का दावा है कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरीय जांच व्यवस्था (three-tier testing system) लागू की गई है।
पहले, दवाओं को WHO GMP (World Health Organization Good Manufacturing Practices) प्रमाणित कंपनियों से खरीदा जाता है और उनके साथ एनएबीएल (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से प्रमाणित सर्टिफिकेट लिया जाता है।
फिर, रैंडम सैंपलिंग (random sampling) द्वारा दवाओं की जांच की जाती है और सप्लाई से पहले उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।
कॉर्पोरेशन के एमडी, मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) का कहना है कि सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) में दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अब, दवाओं की खरीदी के लिए COPP (Certificate of Pharmaceutical Products) सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
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इन दवाओं में सिफिक्सिम, एमिकेसिन (Amikacin), सिप्रोफ्लोक्सेसिन (Ciprofloxacin), मेरोपेनम (Meropenem) जैसी एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। ये मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकती हैं।
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दवाओं के उपयोग पर रोक
इससे पहले इन दवाओं को मरीजों (MP Hospitals) को दिया गया था। हालांकि,हेल्थ कॉर्पोरेशन ने संबंधित बैच की दवाओं के उपयोग पर रोक लगा दी है। उन दवाओं को एक से दो साल तक ब्लैकलिस्ट किया है।
लेकिन बार-बार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद अभी तक किसी भी कंपनी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जो चिंता का विषय है।
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इन दवाओं से रहें दूर
- एथामसिलेट (Ethamsylate): ब्लीडिंग को रोकने में उपयोगी।
- सिफिक्सिम (Sifixim): एंटीबायोटिक, संक्रमण से लड़ने के लिए।
- पैरासिटामोल (Paracetamol): बुखार और दर्द के लिए उपयोगी।
- पायरोक्सीकैम (Piroxicam): अर्थराइटिस और स्पांडिलाइटिस के दर्द में उपयोगी।
- मीरोपीनम (Meropenem): सीवियर संक्रमण के इलाज में उपयोगी एंटीबायोटिक।
- सिप्रोफ्लोक्सेसिन (Ciprofloxacin): एंटीबायोटिक, बैक्टीरिया के संक्रमण के लिए।
- ब्लड ग्रुपिंग किट (Blood Grouping Kit): ब्लड ग्रुप पहचानने के लिए उपयोगी, जो अब अमानक पाई गई है।
- एमिकेसिन (Amikacin): एंटीबायोटिक, गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए।
- सिफिक्सिम सिरप (Sifixim Syrup): बच्चों के लिए एंटीबायोटिक सिरप।
- इटराकोनाजोल (Itraconazole): फंगल संक्रमण के इलाज में उपयोगी।
ऐसे होती है जांच
पहले, दवाओं को WHO GMP (World Health Organization Good Manufacturing Practices) प्रमाणित कंपनियों से खरीदा जाता है और उनके साथ एनएबीएल (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से प्रमाणित सर्टिफिकेट लिया जाता है।
फिर, रैंडम सैंपलिंग (random sampling) द्वारा दवाओं की जांच की जाती है और सप्लाई से पहले उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।
दवाओं की क्वालिटी सुधारने की कोशिश
अब, दवाओं की खरीदी के लिए COPP (Certificate of Pharmaceutical Products) सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
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