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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल पुराना व्यापार समझौता आखिरकार अब फाइनल हो गया।
- इस डील से विदेशी लग्जरी कारों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स अब काफी कम हो जाएगा।
- फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन के बाद भारतीय कपड़ा, फुटवियर और दवा उद्योग को बड़ा बाजार मिल गया है।
- साल 2031 तक दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुनाफा 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
- यह समझौता चीन पर निर्भरता कम करेगा और भारत को ग्लोबल सप्लाई हब बनाने में मदद करेगा।
NEWS IN DETAIL
New Delhi. करीब अठारह साल बाद भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को राजनीति और कारोबार की दुनिया में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते पर औपचारिक मुहर लग चुकी है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे ऐतिहासिक आर्थिक उपलब्धि बताया है। यह बातचीत पहली बार साल 2007 में शुरू हुई थी। बीच में वैश्विक मंदी, कोरोना और राजनीतिक तनावों ने प्रक्रिया धीमी कर दी थी। अब बदलते वैश्विक हालात ने इस डील को नई रफ्तार दी।
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EU अध्यक्ष बोलीं- PM मोदी हमने कर दिखाया
यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन ने भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर खुशी जाहिर की है। FTA ( Free Trade Agreements ) पर हस्ताक्षर के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि हमने मिलकर यह ऐतिहासिक काम पूरा कर दिखाया है।
उर्सुला ने कहा कि लंबे समय से चल रही बातचीत अब ठोस नतीजे तक पहुंची है। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए भरोसे, सहयोग और साझा विजन की जीत बताया। यूरोपीय आयोग अध्यक्ष के मुताबिक यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।
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भारत के लिए क्यों अहम है यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
भारत के लिए यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीतिक जीत भी है। यूरोपीय यूनियन दुनिया के सबसे अमीर और स्थिर बाजारों में गिनी जाती है। भारत को यहां अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़ा मंच मिलेगा। सरकारी आकलन के अनुसार, 2031 तक व्यापार 51 अरब डॉलर पहुंचेगा।
इससे भारत के कुल निर्यात में EU की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी। फिलहाल EU भारत के कुल निर्यात में करीब सत्रह प्रतिशत हिस्सेदार है। नई डील के बाद यह आंकड़ा बाइस से तेइस प्रतिशत हो सकता है।
EU के लिए भारत क्यों बना भरोसेमंद पार्टनर
यूरोप अब चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहता है। कोरोना और यूक्रेन युद्ध के बाद सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव पड़ा। भारत को स्थिर लोकतंत्र और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में EU का भारत के साथ व्यापार घाटा बढ़ा है। 2019 में जहां EU को लाभ था, वहीं 2025 तक घाटा हो गया। यह डील उस असंतुलन को सुधारने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
भारत के किन उद्योगों को मिलेगा ज्यादा फायदा
इस समझौते से श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा। कपड़ा, जूते और चमड़ा उद्योग को यूरोप में नया बाजार मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल सेक्टर को भी निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्मार्टफोन और ऑटो पार्ट्स का निर्यात तेज़ होगा। दवाइयों और मेडिकल उपकरणों को भी यूरोप में बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे भारत में रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
यूरोप से भारत क्या-क्या मंगाएगा
यूरोपीय यूनियन से भारत को आधुनिक तकनीक मिलेगी। उच्च गुणवत्ता वाली मशीनरी और विमान आयात बढ़ सकता है। मेडिकल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को तकनीकी बढ़त मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे MSME सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। नई तकनीक से भारतीय उद्योग ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
लग्जरी कारें होंगी सस्ती, टैक्स में कटौती
FTA के तहत यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क घटाने की तैयारी है। फिलहाल यह शुल्क सत्तर से एक सौ दस प्रतिशत तक है। नई व्यवस्था में इसे घटाकर चालीस प्रतिशत किया जा सकता है।
पंद्रह हजार यूरो से महंगी कारों पर यह नियम लागू होगा। भविष्य में यह शुल्क दस प्रतिशत तक आने की संभावना है। इससे BMW, Mercedes और Audi जैसी कारें सस्ती हो सकती हैं।
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सूत्र नॉलेज:
क्यों कहलाया यह समझौता ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
यह समझौता सिर्फ ट्रेड तक सीमित नहीं है। इसमें टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल गवर्नेंस भी शामिल हैं। एक तरफ भारत का विशाल मिडिल क्लास बाजार है। दूसरी तरफ यूरोप का समृद्ध और तकनीकी रूप से उन्नत बाजार है। दोनों का मिलन वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आकार देगा। यही वजह है कि इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
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