आरक्षण का मामला: निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ सकती है EWS के लिए सीटें!

Jitendra Shrivastava | Aug 22, 2026, 18:27 IST
Photograph: (THESOOTR)
एमपी हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया है। नई याचिका पर राज्य शासन और एनएमसी को भी नोटिस जारी हुआ है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का रास्ता साफ।
  • हाईकोर्ट ने केंद्र को बनाया मेडिकल आरक्षण मामले में पक्षकार।
  • एमपी में मेडिकल कॉलेज सीटों पर हाईकोर्ट में सुनवाई।
  • EWS आरक्षण मामले में केंद्र सरकार से मांगा जवाब।
  • निजी मेडिकल कॉलेज सीट विवाद पर हाईकोर्ट सख्त।

निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंचा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में पक्षकार बनाया है। एक नई याचिका पर राज्य शासन और एनएमसी को नोटिस जारी हुए हैं। कोर्ट ने कहा प्रवेश प्रक्रिया फैसले के अधीन रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।



निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के विद्यार्थियों को आरक्षण दिलाने की कोशिश अब केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पुराने मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। साथ ही इसी मुद्दे पर एक नई याचिका पर भी सुनवाई हुई है।



नई याचिका पर राज्य और एनएमसी को नोटिस

कुमारी दरक्षा अंजुम सहित अन्य विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन मामले में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों ने निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की मांग की है। यह याचिका हाल ही में दायर की गई है।



प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC – National Medical Commission) को नोटिस जारी किए हैं।



कोर्ट ने साफ किया है कि प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगी। यानी जब तक कोर्ट अंतिम निर्णय नहीं देता, प्रवेश प्रक्रिया इसी याचिका से जुड़ी रहेगी। दोनों याचिकाओं में अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं।



पुराने मामले में अब केंद्र सरकार भी पक्षकार

यह मुद्दा नया नहीं है। रिट याचिका अथर्व चतुर्वेदी विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन 2024 से हाईकोर्ट में लंबित है। इसी मामले में अब केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है।



याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को इस केस में शामिल किया जाए। युगलपीठ ने यह मौखिक आवेदन मंजूर कर लिया।



मांग यह थी कि निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए सामान्य वर्ग की सीटें बढ़ाई जाएं। इस मुद्दे पर केंद्र का आधिकारिक पक्ष रिकॉर्ड पर लाने की जरूरत बताई गई थी।



कोर्ट ने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु को केंद्र की ओर से नोटिस स्वीकार करने को कहा। साथ ही दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश भी दिए गए हैं।



2024 के पुराने आदेश का हवाला

याचिकाकर्ताओं ने 17 दिसंबर 2024 के हाईकोर्ट के पुराने आदेश का हवाला दिया है। उस आदेश में एनएमसी को निर्देश दिया गया था कि निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने के लिए एक साल के भीतर सीटें बढ़ाई जाएं।



यानी यह मुद्दा पहले भी कोर्ट के सामने आ चुका है। अब नई याचिका और केंद्र की भागीदारी से यह मामला और मजबूत हो गया है।



अब आगे क्या होगा

केंद्र सरकार को पक्षकार बनाए जाने के बाद अब उसके जवाब पर आगे की दिशा तय होगी। कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है।



मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी। तब तक नई याचिका में भी राज्य और एनएमसी के जवाब का इंतजार रहेगा। निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है।



अगर कोर्ट सीटें बढ़ाने का आदेश बरकरार रखता है, तो आने वाले सत्र से ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को सीधा फायदा मिल सकता है। इसी वजह से यह मामला प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों के लिए अहम है।



ये खबरें भी पढ़ें...



ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट घोटाला फर्जीवाड़े की तहसील कार्यालय में गूंज, जांच में लीपापोती के आरोप



मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में टल गई ओबीसी आरक्षण और ईडब्ल्यूएस पर सुनवाई



कैलारस शक्कर कारखाना आंदोलन स्थगित, पंकज उपाध्याय का अनशन खत्म



एमपी में MBBS पढ़ना हुआ महंगा: मेडिकल फीस में 10% बढ़ोत्तरी, जानें नया स्ट्रकचर



Tags:
  • केंद्र सरकार
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग
  • मेडिकल कॉलेज
  • ईडब्ल्यूएस आरक्षण
  • EWS
  • निजी मेडिकल कॉलेज