एमपी में मूंग खरीदी पर घमासान, केंद्र ने ठुकराई राज्य की मांग
Aman Vaishnav | Jul 27, 2026, 08:15 IST
एमपी में मूंग खरीदी
मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी पर केंद्र और राज्य सरकार में तनातनी बढ़ गई है। राज्य कोटे में 40% बढ़ोतरी की मांग कर रहा है, जबकि केंद्र ने धीमी खरीदी का हवाला दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
हालांकि ताजा आंकड़ों में अब तक 52 हजार 284 किसानों से 36 हजार 682 टन मूंग खरीदी जा चुकी है। पुरानी मूंग के भंडारण से राज्य सरकार को करीब तीन हजार करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान है। खरीदी 10 अगस्त तक जारी रहेगी और आगे की स्थिति जल्द साफ हो सकती है।
सरकार और केंद्र आमने-सामने
कंसाना ने अपने पत्र में लिखा कि एमपी में इस बार भी बड़ी मात्रा में मूंग आ सकती है। जितने किसानों ने पंजीयन कराया है, उनसे करीब 10 लाख टन मूंग खरीदी जा सकती है। मंत्री से पहले एमपी के अधिकारी भी एक बार यह पत्र केंद्र को भेज चुके हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने जवाब में कहा कि अभी तय कोटे की खरीदी ही पूरी नहीं हुई है। 16 जुलाई तक सिर्फ 2% खरीदी हुई थी। यानी करीब 12 हजार किसानों से सिर्फ 7 हजार 947.92 टन मूंग ली गई।
हालांकि हफ्तेभर में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। अब तक 52 हजार 284 किसानों से 36 हजार 682 टन मूंग खरीदी जा चुकी है। खरीदी 10 अगस्त तक चलेगी। उड़द की भी 37 टन खरीद हो चुकी है।
मूंग खरीद का 87% हिस्सा अकेले एमपी को
साल 2026-27 के ग्रीष्मकालीन सीजन के लिए मप्र को पहले ही 4.54 लाख टन से ज्यादा खरीद की अनुमति मिल चुकी है।
पुरानी मूंग बनी सिरदर्द
इससे राज्य सरकार को बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है। अनुमान है कि यह घाटा करीब तीन हजार करोड़ रुपए तक जा सकता है।
बता दें कि मूंग साढ़े आठ हजार रुपए क्विंटल में खरीदी गई थी। बाकी खर्च जोड़ने पर यह करीब साढ़े नौ हजार रुपए प्रति क्विंटल बैठती है। खुले बाजार में इसे 20 से 30% कम कीमत पर बेचा जाता रहा है। यही अंतर सरकार का घाटा बढ़ाता है।
मंत्री की चिट्ठी में क्या
इसका 25% हिस्सा सिर्फ 4.5 लाख टन बनता है। जबकि पिछली बार ही 40% तक खरीदी करनी पड़ गई थी।
इसी आधार पर मंत्री ने कोटा 40% करने की मांग रखी। अगर यह मांग मानी जाती है तो करीब 8 लाख टन तक मूंग खरीदी जा सकेगी।
केंद्र ने क्या कहा
मंत्रालय ने यह भी बताया कि पहले भी मप्र के लिए कुल 4 लाख 19 हजार 692 टन मूंग खरीद (एमपी में मूंग खरीदी) स्वीकृत की जा चुकी है।
केंद्र ने यह भी जोड़ा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिले, इसके लिए पीएम-आशा योजना के तहत लगातार मदद दी जा रही है।
किसानों का दबाव पुराना है
पिछली बार सरकार ने किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग बोने से हतोत्साहित भी किया था। इसके बावजूद खरीदी तय कोटे से डेढ़ गुना तक पहुंच गई थी।
किसानों पर क्या असर होगा
वहीं अगर कोटा नहीं बढ़ता, तो कई किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में ही बेचनी पड़ सकती है। वहां कीमत आमतौर पर कम मिलती है।
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