एमपी के किसानों के लिए बड़ी खबर, 84 हजार टन मूंग खरीदेगी सरकार
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी में मूंग खरीदी को केंद्र से मिली बड़ी राहत।
- 84 हजार टन अतिरिक्त मूंग खरीद को मिली मंजूरी।
- शिवराज सिंह ने की मूंग खरीदी की समीक्षा बैठक।
- किसानों को मिला MSP का सीधा फायदा, बढ़ी खरीदी।
- फसल बीमा और मूंग खरीदी पर केंद्र-राज्य में चर्चा।
मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी के लिए केंद्र ने अतिरिक्त मंजूरी दी है। यह मात्रा 84,492 मीट्रिक टन है। अब कुल स्वीकृत खरीदी 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई है। इसके मुकाबले 5.33 लाख टन से ज्यादा मूंग खरीदी जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर समीक्षा बैठक की।
केंद्र ने दी अतिरिक्त मंजूरी
मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन में मूंग खरीदी को लेकर बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए पहले से स्वीकृत मात्रा के अलावा अतिरिक्त मूंग खरीदी को मंजूरी दी है। यह अतिरिक्त मात्रा 84,492 मीट्रिक टन है।
इसके साथ ही राज्य की कुल स्वीकृत मूंग खरीदी 5,39,072 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले अब तक 5.33 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा मूंग की खरीदी हो चुकी है।
दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में बैठक की। इस बैठक में मध्यप्रदेश के कृषि और बागवानी मंत्री वर्चुअल तरीके से शामिल हुए। बैठक में मूंग खरीदी और फसल बीमा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर पहले 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी को मंजूरी दी गई थी। बाद में किसानों के हित को देखते हुए केंद्र ने 84,492 मीट्रिक टन अतिरिक्त मात्रा भी स्वीकृत की। इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ा।
किसानों को मिला MSP का लाभ
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मूंग खरीदी की अवधि अब पूरी हो चुकी है। स्वीकृत सीमा के भीतर 5.33 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खरीदी की जा चुकी है। सभी इच्छुक और पंजीकृत किसानों की उपज खरीदी गई।
इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल का सही दाम मिला। उन्होंने बताया कि यह खरीदी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA – Pradhan Mantri Annadata Aay SanraksHan Abhiyan) के तहत हुई। इसका सीधा फायदा किसानों को पहुंचा है।
समय पर हुआ भुगतान, बढ़ी खरीदी
मूंग की खरीदी मुख्य रूप से NAFED (नेफेड – National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India) और NCCF (एनसीसीएफ – National Cooperative Consumers Federation of India) के जरिए हुई। केंद्र और राज्य ने खरीदी में पारदर्शिता और समय पर भुगतान पर खास जोर दिया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार खरीदी में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ग्रीष्मकालीन 2025 में 4,19,692 मीट्रिक टन की मंजूरी के मुकाबले 3,93,123.79 मीट्रिक टन खरीदी हुई थी। वहीं 2026 में स्वीकृत मात्रा और असली खरीदी दोनों में अच्छा इजाफा हुआ है।
फसल बीमा पर भी हुई बात
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मध्यप्रदेश ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना यानी RWBCIS (आरडब्ल्यूबीसीआईएस – Restructured Weather Based Crop Insurance Scheme) के लिए टर्म-शीट फाइनल करने का अनुरोध किया था। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह टर्म-शीट राज्य को भेजी जा चुकी है।
बैठक में WINDS (विंड्स – Weather Information Network and Data Systems) प्रणाली पर भी चर्चा हुई। केंद्र ने इसे लागू करने के लिए राज्य को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी अटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इसके बिना फसल बीमा योजना को असरदार तरीके से लागू करना मुश्किल होगा।
तकनीकी आकलन को लेकर भी सुझाव
बैठक में फसल के तकनीकी आधारित उपज आकलन पर भी बात हुई। केंद्र ने सुझाव दिया कि क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट यानी CCE (सीसीई – Crop Cutting Experiment) को दोबारा शुरू किया जाए। इससे तकनीकी आंकड़ों का जमीनी स्तर पर सत्यापन हो सकेगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर किसानों के हित में खरीदी, भुगतान और फसल बीमा व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। इससे किसानों की आय के साथ उनका भरोसा भी बढ़ेगा।
एक्सपर्ट कोट्स
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान: "समय पर उपज की खरीदी, MSP का लाभ और प्रभावी फसल बीमा व्यवस्था किसानों की आय के साथ उनके भरोसे को भी मजबूत करती है।" उपलब्ध स्रोत में किसी और व्यक्ति का वेरिफाइड कोट नहीं है, इसलिए और कोट नहीं जोड़े गए।
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