मूंग खरीदी पर केंद्र ने बुलाई थी बैठक, MP के कृषि मंत्री और सचिव शामिल ही नहीं हुए
Amresh Kushwaha | Aug 01, 2026, 10:20 IST
मूंग खरीदी की बैठक से एमपी के कृषि मंत्री गायाब
मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर नया विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार की अहम वीसी बैठक में एमपी के कृषि मंत्री और सचिव शामिल ही नहीं हुए। जानिए पूरा मामला विस्तार से...
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार ने 18 जून को मूंग का कोटा तय करने बैठक बुलाई थी।
- मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री और सचिव इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
- मंत्री के दफ्तर ने कहा कि मंत्री जी आराम कर रहे हैं।
- केंद्र ने 4 राज्यों को मूंग, उड़द व मूंगफली खरीद की मंजूरी दी।
- अब मप्र को अपने खर्च से 600 करोड़ रुपए ज्यादा चुकाने होंगे।
इस बैठक में पांच राज्यों के कृषि मंत्री या उनके विभाग के बड़े अधिकारी शामिल होने थे। इसके बावजूद, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना और विभाग के सचिव निशांत वरबड़े बैठक में नहीं जुड़े। जब केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारी ने मंत्री कंषाना को फोन लगाया तो उनके स्टाफ ने जवाब दिया। स्टाफ ने बताया कि मंत्री जी आराम कर रहे हैं।
स्टाफ ने यह भी कहा कि अभी वे बैठक में नहीं जुड़ सकते। इस जवाब से केंद्रीय अधिकारी भी हैरान रह गए। बता दें कि इस मामले को लेकर मंत्री कंषाना की ओर से अब तक कोई जवाब सामने नहीं आया है। सचिव निशांत वरबड़े ने भी मामले से जुड़े सवाल का कोई जवाब नहीं दिया है।
क्यों नहीं जुड़ पाए अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक बैठक के बीच में ही एमपी के मंत्री के दफ्तर से संपर्क किया गया था। तब बताया गया कि वे नहीं जुड़ सकते। केंद्र के अधिकारियों ने दोबारा संपर्क करके बैठक का महत्व भी समझाया।
उन्होंने बताया कि बाकी सभी राज्यों के मंत्री बैठक में जुड़ चुके हैं। इसके बाद भी मप्र से कोई नहीं जुड़ा। इस वजह से मप्र के लिए अलग से बैठक रखनी पड़ी। यह बैठक चार दिन बाद 23 जून को हुई। वहीं, इसमें भी मंत्री या सचिव नहीं, बल्कि कृषि विभाग के डायरेक्टर शामिल हुए थे।
4 राज्यों को मिला फायदा
यह खरीद मूल्य समर्थन योजना यानी पीएसएस (Price Support Scheme) के तहत होगी। इसका फायदा तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को मिला। इस बैठक में सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश को मिला। यूपी के लिए ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन में 48 हजार 298 टन मूंग खरीदने की मंजूरी दी गई। इसके अलावा 97 हजार 970 टन उड़द और 41 हजार 718 टन मूंगफली की खरीद भी मंजूर हुई।
गुजरात के लिए 18 हजार 250 टन मूंग खरीदने का फैसला हुआ। तमिलनाडु की खरीद सीमा भी बढ़ाई गई। पहले यह सीमा 885 टन थी, जिसे बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन कर दिया गया। हरियाणा को दो हजार 115 टन मूंग खरीदने की मंजूरी मिली। वहीं, मध्य प्रदेश का नाम इस पूरी लिस्ट में कहीं नहीं था। मंत्री और सचिव की गैरमौजूदगी की वजह से राज्य को नुकसान झेलना पड़ा।
मप्र पर 600 करोड़ का बोझ
अनुमान है कि अब करीब चार से पांच लाख 50 हजार टन मूंग पीएसएस के तहत खरीदी जा सकती है। जबकि केंद्र ने मप्र को सिर्फ चार लाख 54 हजार टन का कोटा दिया है। इसका मतलब है कि मप्र को 50 से 70 हजार टन ज्यादा मूंग खरीदनी पड़ेगी। इस अतिरिक्त खरीद पर करीब 600 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।
यह पूरा बोझ अब राज्य सरकार को अपने खजाने से उठाना होगा। हालांकि मप्र सरकार इसे अपनी सफलता मान रही है। किसान 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग कर रहे थे। सरकार का कहना है कि यह मामला 60 प्रतिशत पर सेटल हो गया है।
अब आगे क्या होगा
अब सरकार को अतिरिक्त 600 करोड़ रुपए का इंतजाम करना होगा। यह रकम आखिरकार जनता के खजाने से ही खर्च होगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा में भी उठ सकता है। किसान संगठन भी इस मामले में सरकार से जवाब मांग रहे हैं। देखना होगा कि सरकार इस चूक पर क्या सफाई देती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि जनता का पैसा कैसे और क्यों खर्च हो रहा है। यह पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मामला है, जो लोकतंत्र और सुशासन के लिए जरूरी है। पत्रकारिता का काम है कि ऐसी जानकारी लोगों तक तथ्यों के साथ पहुंचाई जाए, बिना किसी पक्षपात के।
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