BJP का मास्टर स्ट्रोक: टुकड़ों में क्यों घोषित हो रहे एमपी के निगम-मंडल अध्यक्षों के नाम?
हमेशा तैयारी मोड में रहने वाली बीजेपी ने एमपी में धीरे से एक और मास्टर स्ट्रोक लगा दिया। इन दिनों निगम मंडल और आयोग में नियुक्तियों को लेकर चर्चा जोरों पर है। इस बार चर्चा सिर्फ नियुक्तियों की नहीं, बल्कि उस तरीके की भी है जिससे ये नियुक्तियां की जा रही हैं।
पहले महीनों तक इंतजार कराया गया और अब जब नाम सामने आ रहे हैं तो वे भी एक साथ नहीं, बल्कि टुकड़ों में। राजनीतिक विश्लेषक इसे BJP का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक दबाव बता रहा है।
लंबे इंतजार के बाद शुरू नियुक्तियों का सिलसिला
मध्यप्रदेश में नवंबर 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे और दिसंबर में मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनी थी। परंपरागत रूप से सरकार बनने के कुछ महीनों के भीतर निगम-मंडलों में नियुक्तियां हो जाती हैं, लेकिन इस बार ढाई साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न नहीं हुई।
इस दौरान कई निगम-मंडल और आयोग बिना नेतृत्व के ही चलते रहे। इसका सीधा असर उनकी कार्यप्रणाली और आम जनता तक पहुंचने वाली सेवाओं पर पड़ा।
राजनीतिक गलियारों में यह बात आम थी कि सरकार के भीतर ही गुटबाजी और दावेदारी की लंबी कतार ने नियुक्तियों को लटकाए रखा। हर विधायक, हर गुट अपने खेमे के नेताओं को प्रमुख पदों पर बैठाना चाहता था। इसी खींचतान में महीने दर महीने बीतते गए।
पहली कड़ी: छठे राज्य वित्त आयोग का गठन
नियुक्तियों का पहला बड़ा संकेत 19 मार्च 2026 को मिला, जब राज्यपाल ने छठे राज्य वित्त आयोग का गठन किया। इस आयोग का उद्देश्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार लाना है। यानी जमीनी स्तर तक सरकारी धन का उचित वितरण सुनिश्चित करना।
आयोग के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ BJP नेता जयभान सिंह पवैया की नियुक्ति की गई, जो पार्टी के लिए ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक बड़ा चेहरा रहे हैं। उनके साथ केके सिंह और वीरेंद्र कुमार को सदस्य बनाया गया। यह पहली सूची थी जो अकेली जारी हुई। बाकी नियुक्तियों का इंतजार जारी रहा।
दूसरी कड़ी: एक रात में चार आयोगों का नया नेतृत्व
इसके करीब पांच हफ्ते बाद, 23 अप्रैल 2026 को गुरुवार की देर शाम एक और सूची आई। इस बार एक साथ चार बड़े आयोगों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए गए-
- अनुसूचित जाति आयोग: कैलाश जाटव
- महिला आयोग: रेखा यादव
- अनुसूचित जनजाति आयोग: रामलाल रौतेल
- बाल संरक्षण आयोग: डॉ. निवेदिता शर्मा
खास बात यह रही कि ये चारों आयोग समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों दलित, आदिवासी, महिलाएं और बच्चे- की देखरेख करते हैं। रात को सूची जारी होना, फिर उसमें भी केवल इन्हीं चार का नाम आना, यह सवाल उठाता है कि बाकी निगम-मंडलों की नियुक्तियां कब होंगी?
टुकड़ों में लिस्ट: क्या है बीजेपी की असली रणनीति?
अब सबसे बड़ा सवाल: सरकार एक साथ सारी नियुक्तियां क्यों नहीं कर रही? राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे कई कारण गिनाते हैं-
- मीडिया में बने रहना: अगर सभी नियुक्तियां एक दिन हों तो अगले दिन खबर पुरानी हो जाती है, लेकिन टुकड़ों में लिस्ट आने से हर बार नया समाचार बनता है। सरकार की सक्रियता दिखती है और मीडिया कवरेज मिलती रहती है।
- गुटों को संतुलित करना: BJP एक बड़ी पार्टी है, जिसमें शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल जैसे कई बड़े नेताओं के गुट हैं। हर गुट अपने लोगों को पद दिलाना चाहता है। टुकड़ों में नियुक्तियां करके सरकार एक-एक गुट को खुश करती जाती है बिना बाकी को नाराज किए।
- जातिगत समीकरण साधना: हर नियुक्ति एक जाति समूह को संदेश देती है। SC, ST, OBC, महिला हर वर्ग को अलग-अलग समय पर संबोधित करने से उस वर्ग में सरकार की स्वीकार्यता बनी रहती है।
- 2028 की तैयारी: मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। अभी से नियुक्तियां करना मतलब इन आयोगों को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना, जो चुनाव से पहले पार्टी के लिए जनसंपर्क का काम करेंगे।
नई नियुक्तियां... जानें कौन हैं ये चेहरे?...
कैलाश जाटव- SC आयोग के नए अध्यक्ष
अनुसूचित जाति आयोग में सबसे महत्वपूर्ण नियुक्ति कैलाश जाटव की रही। यह तीन साल के लिए है और तत्काल प्रभाव से लागू मानी गई है। आयोग में रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है, जबकि आयुक्त या संचालक, अनुसूचित जाति विकास विभाग को पदेन (Ex-Officio) सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
मध्यप्रदेश में SC समुदाय की आबादी करीब 16 प्रतिशत है और इस वर्ग के साथ होने वाले अत्याचार, भूमि विवाद और आरक्षण से जुड़े मामले इसी आयोग के दायरे में आते हैं।
रेखा यादव- महिला आयोग की बागडोर
महिला आयोग को रेखा यादव के रूप में नया नेतृत्व मिला है। यह आयोग प्रदेश की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और अन्य शिकायतों के निवारण के लिए जिम्मेदार है।
रामलाल रौतेल- ST आयोग के नए कर्ता-धर्ता
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या करीब 21 प्रतिशत है जो देश के किसी भी राज्य में सर्वाधिक में से एक है। इस बड़ी आबादी की देखरेख की जिम्मेदारी रामलाल रौतेल को सौंपी गई है। उनके साथ भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य बनाया गया है। प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, झाबुआ, अलीराजपुर में जनजातीय समुदाय के कई मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे पड़े हैं। रौतेल की सक्रियता पर अब सभी की निगाहें रहेंगी।
डॉ. निवेदिता शर्मा- बच्चों के अधिकारों की नई संरक्षक
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के रूप में डॉ. निवेदिता शर्मा की नियुक्ति की गई है। यह आयोग बाल श्रम, बाल विवाह, बच्चों से यौन अपराध और शिक्षा के अधिकार जैसे गंभीर मुद्दों पर निगरानी रखता है। मध्यप्रदेश में बाल विवाह और बाल श्रम के मामले राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहे हैं, इसलिए इस पद की जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।
विपक्ष का रुख
इधर कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ढाई साल तक आयोगों को बिना अध्यक्ष के छोड़ना खुद सरकार की अक्षमता का प्रमाण है। इन आयोगों में जो शिकायतें लंबित पड़ी हैं, उनके पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हुई, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा कि ये नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक निष्ठा के आधार पर की गई हैं।
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