आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे बिजली कंपनियां, 50 हजार कर्मी, वेतन सिर्फ 12 हजार
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियां आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं।
- प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं।
- रिटायर हो रहे कर्मचारियों की जगह आउटसोर्स कर्मचारी भर्ती किए जा रहे हैं।
- इन्हें मात्र 12 हजार रुपए हाथ में मिलते हैं।
- अब सरकार इन्हें हटाने की तैयारी में है।
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियां इन दिनों बड़े संकट से गुजर रही हैं। यहां नियमित कर्मचारियों की जगह आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। प्रदेश भर में इनकी संख्या 50 हजार से ज्यादा हो गई है।
सरकार ने लंबे समय से नई नियमित भर्ती नहीं की है। जो भी कर्मचारी रिटायर हुए, उनकी जगह आउटसोर्स कर्मचारी रख लिए गए। यही सिलसिला बीते दो दशक से चल रहा है।
कैसे शुरू हुई ठेका पद्धति
बिजली कंपनियों में ठेका पद्धति करीब बीस साल पहले शुरू हुई थी। कंपनियां ठेकेदार के जरिए आउटसोर्स कर्मचारी रखती हैं। इन कर्मचारियों से नियमित कर्मचारी जैसा ही काम लिया जाता है। लेकिन वेतन बहुत कम दिया जाता है। इन्हें हर महीने 15 हजार रुपए तय होते हैं। इसमें से कटौती के बाद हाथ में सिर्फ 12 हजार रुपए आते हैं। इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।
नियमित होने की उम्मीद अब टूटी
ये कर्मचारी सालों से एक उम्मीद पर टिके हुए थे। उन्हें लगता था कि एक दिन सरकार उन्हें नियमित कर देगी। इससे उनका और परिवार का भविष्य सुधर जाता। लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी नियमितीकरण नहीं हुआ। अब सरकार इन्हें हटाने की योजना बना रही है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर कर्मचारी अब ओवर एज हो चुके हैं। सरकारी नौकरी की उम्र सीमा भी पार कर चुके हैं। ऐसे में इनके परिवारों पर संकट गहरा गया है।
ग्वालियर सिटी सर्किल का उदाहरण
बिजली कंपनी के सिटी सर्किल ग्वालियर में हाल ही में यह पैटर्न साफ दिखा। बीते एक साल में यहां 16 कर्मचारी रिटायर हुए। इनकी जगह तुरंत आउटसोर्स कर्मचारी भर्ती कर लिए गए। इनमें लाइन परिचालक, क्लीनर, भृत्य और सुरक्षा सैनिक जैसे पद शामिल हैं। यह उदाहरण बताता है कि यह प्रक्रिया कितनी नियमित तरीके से चल रही है। पूरे प्रदेश में यही तरीका अपनाया जा रहा है।
कंपनियों में कितने आउटसोर्स कर्मचारी
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के ग्वालियर और भोपाल संभाग में करीब 14 हजार आउटसोर्स कर्मचारी हैं। पूर्वी क्षेत्र कंपनी जबलपुर में यह संख्या 15 हजार है। पश्चिम क्षेत्र कंपनी इंदौर में करीब 13 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। ट्रांसमिशन कंपनी में 5 हजार और जेनरेशन कंपनी में करीब 3 हजार कर्मचारी हैं। पावर मैनेजमेंट कंपनी में भी करीब 200 कर्मचारी आउटसोर्स पर हैं।
इन पदों पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारी
बिजली कंपनियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हैं। इनमें कुशल और अकुशल, दोनों तरह के कर्मचारी शामिल हैं।
कुशल कर्मचारियों में की-पंच ऑपरेटर, लाइन हेल्पर, लाइन अटेंडेंट, सब स्टेशन ऑपरेटर और मीटर रीडर जैसे पदों पर लोग काम कर रहे हैं।
वहीं, अकुशल श्रेणी में हेल्पर और प्यून जैसे कर्मचारी शामिल हैं, जो बिजली कंपनियों के अलग-अलग कामों में सहयोग करते हैं।
इन कर्मचारियों (बिजली कंपनी भर्ती अपडेट) में कुशल और अकुशल दोनों तरह के लोग शामिल हैं। की पंच ऑपरेटर, लाइन हेल्पर, सब स्टेशन ऑपरेटर और मीटर रीडर कुशल श्रेणी में आते हैं। हेल्पर और प्यून जैसे पद अकुशल श्रेणी में गिने जाते हैं।
| क्रमांक | कंपनी | क्षेत्र/स्थान | आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या |
|---|---|---|---|
| 1 | विद्युत वितरण कंपनी (मध्य क्षेत्र) | ग्वालियर और भोपाल संभाग | लगभग 14,000 |
| 2 | पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एमपी | जबलपुर | लगभग 15,000 |
| 3 | पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी | इंदौर | लगभग 13,000 |
| 4 | मध्य प्रदेश ट्रांसमिशन कंपनी | मध्य प्रदेश | लगभग 5,000 |
| 5 | मध्य प्रदेश विद्युत जेनरेशन कंपनी | मध्य प्रदेश | लगभग 3,000 |
| 6 | मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी | मध्य प्रदेश | लगभग 200 |
कुल आउटसोर्स कर्मचारी (लगभग): 50,200
भाजपा के वादे पर सवाल
साल 2023 में MP BJPने जन संकल्प एजेंडा जारी किया था। इसके पृष्ठ 81 पर साफ लिखा था कि आउटसोर्स कर्मचारियों (बिजली कंपनी भर्ती एमपी) को संविदा पद का फायदा दिया जाएगा। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारी संगठन इसे लेकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि वादा पूरा करने की बजाय हटाने की तैयारी हो रही है।
कर्मचारी नेता ने क्या कहा
मध्य प्रदेश संविदा एवं ठेका श्रमिक कर्मचारी संघ इंटक के प्रदेश महामंत्री विद्याकांत मिश्रा ने इस मुद्दे पर बयान दिया है। उनका कहना है कि भाजपा ने जन संकल्प में साफ वादा किया था। उन्होंने कहा कि संविदा पद (बिजली कंपनी भर्ती) देने का ऐलान एजेंडे में दर्ज है। लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि उल्टा कर्मचारियों को हटाने की साजिश हो रही है। उन्होंने सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की है।
FAQ
- प्रश्न 1: मध्य प्रदेश में कितने आउटसोर्स कर्मचारी बिजली कंपनियों में काम कर रहे हैं?
उत्तर: मध्य प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में मिलाकर 50 हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। - प्रश्न 2: मध्य प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों को कितना वेतन मिलता है?
उत्तर: इन कर्मचारियों को हर महीने 15 हजार रुपए तय वेतन मिलता है। कटौती के बाद हाथ में सिर्फ 12 हजार रुपए आते हैं। - प्रश्न 3: भाजपा ने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर क्या वादा किया था?
उत्तर: भाजपा जन संकल्प 2023 के पृष्ठ 81 में संविदा पद देने का वादा किया गया था। अभी तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है।
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