एमपी में बढ़ा विदेश जाने का क्रेज: पासपोर्ट आवेदनों में बड़े शहरों से आगे छोटे जिले
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में पासपोर्ट बनवाने का चलन अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा।
- छोटे जिलों से भी आवेदन तेजी से बढ़ रहे हैं।
- साल 2025 में राज्य में रिकॉर्ड 2.78 लाख पासपोर्ट जारी हुए।
- यह आंकड़ा 2022 के मुकाबले करीब 47% ज्यादा है।
- नौकरी, पढ़ाई और घूमने के लिए विदेश जाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा उछाल
उमरिया, डिंडौरी, धार और देवास जैसे जिलों में नए आवेदन सबसे तेजी से बढ़े हैं। नीमच, रतलाम, ग्वालियर, भिंड और जबलपुर में भी यही ट्रेंड देखा गया है। इससे साफ है कि विदेश जाने की चाहत अब भोपाल और इंदौर से आगे निकल चुकी है। छोटे शहरों के युवा भी अब पासपोर्ट को जरूरी दस्तावेज मान रहे हैं।
हर साल कैसे बढ़ा आंकड़ा
साल 2022 में 1.89 लाख पासपोर्ट जारी हुए थे। यह संख्या 2023 में बढ़कर 2.05 लाख हो गई। 2024 में यह आंकड़ा 2.59 लाख तक पहुंचा। 2025 में यह और बढ़कर 2.78 लाख हो गया। हर महीने औसतन 20 हजार से 30 हजार पासपोर्ट बन रहे हैं। रोजाना अपॉइंटमेंट बुकिंग भी 1700 से बढ़कर करीब 2700 हो गई है।
इंदौर और भोपाल की भूमिका
राज्य में सबसे ज्यादा पासपोर्ट अपॉइंटमेंट और जारी पासपोर्ट इंदौर से ही होते हैं। इसके बाद भोपाल का नंबर आता है। दोनों पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK – Passport Seva Kendra) की मिलाकर रोजाना करीब 1800 अपॉइंटमेंट क्षमता है। इंदौर केंद्र में रोजाना करीब 1000 और भोपाल में करीब 800 अपॉइंटमेंट होते हैं।
गांवों तक पहुंची सुविधा
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों (POPSK – Post Office Passport Seva Kendra) का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया गया है। इससे दूर-दराज और सीमावर्ती इलाकों के लोगों को भी आसानी से सुविधा मिल रही है। पहले इन इलाकों के लोगों को पासपोर्ट के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। थेसूत्र की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार झाबुआ जैसे दुर्गम इलाकों में मोबाइल पासपोर्ट वैन सेवा भी शुरू की जा चुकी है।
भोपाल के अधिकारी ने क्या बताया
भोपाल के रीजनल पासपोर्ट अधिकारी शीतांशु चौरसिया ने बताया कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश से विदेश जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नए आवेदनों के अलावा पासपोर्ट रीइश्यूएंस भी काफी बढ़ा है। उनके अनुसार पोस्ट ऑफिस केंद्रों के विस्तार ने दूरदराज इलाकों के लोगों तक सेवा पहुंचाई है।
पुलिस वेरिफिकेशन भी हुआ तेज
चौरसिया ने यह भी बताया कि तेज पुलिस वेरिफिकेशन से पासपोर्ट प्रोसेसिंग में रफ्तार आई है। मध्य प्रदेश पुलिस ने वेरिफिकेशन को व्यवस्थित करने के लिए एक मानक प्रक्रिया (SOP – Standard Operating Procedure) लागू की है। इससे सभी जिलों में समय सीमा का पालन बेहतर हुआ है।
पासपोर्ट धारकों के लिए जरूरी बात
पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या भले बढ़ रही हो, लेकिन कई लोग पुराना पासपोर्ट अपडेट कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। थेसूत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर में हजारों पासपोर्ट सिर्फ इसलिए बेकार हो गए क्योंकि लोगों ने समय पर उन्हें रिन्यू नहीं कराया। ऐसे में नया पासपोर्ट बनवाने के साथ-साथ पुराने को अपडेट रखना भी जरूरी है।
फीस से जुड़ी जरूरी जानकारी
पासपोर्ट बनवाने की योजना बना रहे लोगों को फीस में हुए बदलाव की जानकारी भी रखनी चाहिए। हाल ही में पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी की गई है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है। आवेदन से पहले पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर मौजूदा दरें जरूर चेक करनी चाहिए।
एक्सपर्ट कोट्स
भोपाल के रीजनल पासपोर्ट अधिकारी शीतांशु चौरसिया ने कहा कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश से विदेश जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों के विस्तार से दूरदराज इलाकों के लोगों तक भी सुविधा पहुंची है, जिससे आवेदनों की संख्या में इजाफा हुआ है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में 2025 में कितने पासपोर्ट जारी हुए?
साल 2025 में राज्य में रिकॉर्ड 2.78 लाख पासपोर्ट जारी हुए, जो 2022 से करीब 47% ज्यादा है। - किन जिलों में पासपोर्ट आवेदन सबसे तेजी से बढ़े हैं?
उमरिया, डिंडौरी, धार, देवास, नीमच, रतलाम, ग्वालियर, भिंड और जबलपुर में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। - छोटे जिलों में पासपोर्ट सुविधा कैसे बढ़ी है?
पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों के विस्तार और मोबाइल पासपोर्ट वैन सेवा से दूरदराज इलाकों तक सुविधा पहुंची है।
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