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5 पॉइंट में समझें खबर के मायने...
- मध्य प्रदेश में मुफ्त राशन योजना को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
- 1500 कंपनी डायरेक्टर और 38 हजार आयकरदाता मुफ्त राशन ले रहे थे।
- 6 लाख रुपए से अधिक सालाना आय वाले लोगों के कार्ड रद्द किए गए।
- अपात्रों के हटने से 14 लाख नए गरीब परिवारों को राशन मिलेगा ।
- प्रदेश के 94 फीसदी लाभार्थियों का आधार केवाईसी पूरा हुआ।
भोपाल।मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS को लेकर चौंकाने वाला सच सामने आया है। गरीबों के लिए तय मुफ्त राशन पर निजी कंपनियों के डायरेक्टर और लाखों की कमाई करने वाले लोग भी हाथ साफ कर रहे थे। सरकार के व्यापक सत्यापन अभियान में ऐसे 30 लाख अपात्र लाभार्थी पकड़े गए, जिनके राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं।
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विस्तृत जांच में पता चला कि निजी कंपनियों के करीब 1,500 डायरेक्टर और सालाना 6 लाख रुपए से ज्यादा आय दिखाने वाले 38 हजार आयकरदाता पीडीएस के तहत मुफ्त राशन ले रहे थे। ये वही राशन था, जो सबसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए तय किया गया है।
एक साल तक चला अभियान
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने करीब एक साल तक चले इस सत्यापन अभियान में आयकर विभाग और कंपनियों के रजिस्ट्रार के आंकड़ों से पीडीएस डेटाबेस का मिलान किया। फील्ड लेवल पर भी जांच की गई। इसके बाद सभी अपात्र नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
इस सफाई का सबसे बड़ा फायदा उन गरीब परिवारों को मिला, जो लंबे समय से प्रतीक्षा सूची में थे। अपात्र कार्ड हटने के बाद 14 लाख पात्र परिवारों के लिए राशन का रास्ता साफ हुआ और उन्हें खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सका।
प्रदेश में सवा करोड़ से ज्यादा राशन कार्ड
मध्यप्रदेश में इस समय अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता परिवार श्रेणी के तहत 1.31 करोड़ राशन कार्ड हैं। इन योजनाओं के जरिए लगभग 28 पात्र श्रेणियों के लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता है।
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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आयुक्त करमवीर शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अपात्र लोगों की वजह से वास्तविक जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। सत्यापन अभियान ने इस बड़ी गड़बड़ी को दूर किया है। उन्होंने कहा कि जिन 38 हजार लोगों ने 6 लाख रुपए या उससे अधिक सालाना आय घोषित की थी, उनके नाम पूरी जांच के बाद हटा दिए गए हैं।
1500 कंपनी डायरेक्टर भी ले रहे थे फायदा
कंपनी डायरेक्टरों के मामलों में भी जिला स्तर पर गहन जांच हुई। कुछ नाम खुद सहायता समूहों से जुड़े पाए गए, लेकिन आखिरकार 1,500 ऐसे डायरेक्टर चिन्हित हुए, जो नियमों के बावजूद राशन ले रहे थे। उनके कार्ड भी निरस्त कर दिए गए हैं। आपको बता दें कि सरकार ने सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए बायोमेट्रिक केवाईसी को अनिवार्य किया है। अब 94 फीसदी लाभार्थियों का आधार प्रमाणीकरण हो चुका है। इस मामले में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है।
ट्रांसपेरेंसी के लिए ये व्यवस्था
राशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एसएमएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है। अब लाभार्थियों को मैसेज के जरिए पता चल जाता है कि राशन गोदाम से कब निकला, दुकान पर कब पहुंचा और कब वितरण हुआ। पीओएस रसीद से हर लेनदेन दर्ज हो रहा है।
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