पटवारी के बाद पुलिस भर्ती में सेंध लगाने वाले मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत

Neel Tiwari | Jun 06, 2026, 14:41 IST
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पटवारी भर्ती घोटाले के बाद पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2023 में कथित बायोमेट्रिक फर्जीवाड़ा हुआ था। इसके आरोपी और लंबे समय से फरार अभिताभ सिंह रावत को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है।

मध्य प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं से जुड़े आरोपी अभिताभ सिंह रावत को एक बार फिर हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। पटवारी भर्ती परीक्षा के बाद अब पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2023 से जुड़े मामले में भी उसे अग्रिम जमानत मिल गई है।



जांच एजेंसियों के अनुसार अभिताभ सिंह रावत पर बायोमेट्रिक डेटा में छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। हालांकि कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए उसे जमानत का लाभ दिया है।



निचली कोर्ट ने जमानत देने से किया था इनकार

इससे पहले भोपाल की नवम अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने अभिताभ सिंह रावत की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डालती है।



कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी के खिलाफ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में समान प्रकृति के कई मामले दर्ज हैं। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी लंबे समय से भर्ती घोटालों से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा रहा है।





बायोमेट्रिक डेटा में बदलाव कर सॉल्वर बैठाने का आरोप

जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में अभ्यर्थियों के आधार रिकॉर्ड में बदलाव कर दूसरे व्यक्तियों के बायोमेट्रिक विवरण दर्ज किए जाते थे। आरोप है कि इसके बाद सॉल्वर परीक्षा में शामिल होते थे। वहीं, बाद के चरणों में मूल अभ्यर्थी प्रक्रिया पूरी करते थे।



जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के जरिए उम्मीदवारों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। इसी कारण मामले को साधारण नकल या पेपर लीक से कहीं अधिक गंभीर माना जा रहा है।



हाईकोर्ट ने जांच में सहयोग और पूर्व राहत को माना आधार

जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभिताभ सिंह रावत स्वयं चयनित उम्मीदवार नहीं था। साथ ही, उस पर कथित रूप से बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।



कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि जांच एजेंसी ने उसे गिरफ्तार करने के बजाय बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया है। आरोपी ने जांच में सहयोग करने की भी सहमति जताई है। कोर्ट ने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई तथा अर्णेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है।



50 हजार रुपए के मुचलके पर मिली राहत

कोर्ट ने यह भी देखा कि समान आरोपों से जुड़े अन्य मामलों में अभिताभ सिंह रावत को पहले ही हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए डिवीजन बेंच ने गिरफ्तारी की स्थिति में उसे 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और समान राशि के जमानतदार पर अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया है। साथ ही उसे जांच में पूरा सहयोग करने की शर्त भी लगाई गई है।



भर्ती व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

पटवारी भर्ती विवाद के बाद पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में भी कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने से भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों अभ्यर्थियों का मानना है कि यदि भर्ती परीक्षाओं में इस तरह के संगठित रैकेट सक्रिय हैं तो मेहनत और योग्यता के आधार पर चयन की व्यवस्था प्रभावित होती है।



वहीं जांच एजेंसियों के सामने चुनौती पूरे नेटवर्क की भूमिका और तकनीकी साक्ष्यों को कोर्ट में प्रमाणित करने की बनी हुई है। फिलहाल अभिताभ सिंह रावत को जमानत मिल गई है, लेकिन मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।



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