साइबर ठग के जाल में फंसा हेड कांस्टेबल, सस्ते फर्नीचर का लालच देकर बनाया शिकार

Aman Vaishnav | Jun 21, 2026, 10:20 IST
साइबर ठग के जाल में फंसा हेड कांस्टेबल
भोपाल में पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एक हेड कांस्टेबल खुद साइबर ठगी का शिकार हो गए। सीआरपीएफ जवान बनकर ठग ने उनसे फर्नीचर के नाम पर एक लाख से ज्यादा रुपए ठग लिए।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हेड कांस्टेबल दिलीप कुमार से एक लाख 63 हजार रुपए की ठगी हुई है।
  • ठग ने पुलिसकर्मी के बचपन के दोस्त का परिचित होने का दावा किया था।
  • आरोपित ने घरेलू फर्नीचर सस्ते दाम में बेचने का झांसा दिया।
  • सौदा तय होने के बाद ठग ने कई बार में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
  • टैक्स और ट्रांसपोर्ट के नाम पर जब दोबारा 23 हजार से ज्यादा रुपये मांगे गए।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक हैरान कर देने मामला सामने आया है। लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचने की सलाह देने वाली पुलिस का एक जवान इस जाल में फंस गया।



पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एक प्रधान आरक्षक को एक शातिर ठग ने सुनियोजित तरीके से अपने झांसे में लिया। साथ ही उनसे क लाख 63 हजार रुपए ठग लिए। ठग ने खुद को सेना का जवान बताकर पुलिसकर्मी का भरोसा जीता था।



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भोपाल के गोविंदपुरा पुलिस लाइन का मामला

जानकारी के अनुसार 43 साल के दिलीप कुमार मध्य प्रदेश पुलिस में प्रधान आरक्षक हैं। वर्तमान में उनकी ड्यूटी पुलिस कंट्रोल रूम में है। वह अपने परिवार के साथ गोविंदपुरा की पुलिस लाइन में रहते हैं।



9 जून को दिलीप कुमार के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताया। उसने दिलीप कुमार से कहा कि वह उनके बचपन के जिगरी दोस्त योगेश आठनेरे को अच्छी तरह जानता है और उनका परिचित है।





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सस्ते फर्नीचर का दिया लालच

बातचीत के दौरान ठग ने दिलीप कुमार को बताया कि उसका तबादला दूसरे शहर में होने वाला है। इसलिए वह अपने घर का फर्नीचर कम कीमत पर बेचना चाहता है।



ठग ने दिलीप कुमार के व्हाट्सएप पर सोफा सेट, डाइनिंग टेबल और कुछ अन्य घरेलू सामानों की तस्वीरें भेजीं। उसने पुलिसकर्मी से कहा कि उनके दोस्त योगेश ने ही बताया था कि दिलीप कुमार को फर्नीचर की जरूरत है। अपने बचपन के दोस्त का नाम सुनते ही दिलीप कुमार को उसकी बातों पर पूरा भरोसा हो गया।





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किस्तों में ऐसे ऐंठे पैसे

10 हजार रुपये एडवांस: ठग ने पूरे फर्नीचर की कीमत 80 हजार रुपये तय की। उसने कहा कि सौदा पक्का करने के लिए 10 हजार रुपए एडवांस देने होंगे। दिलीप कुमार ने बिना देर किए पैसे ट्रांसफर कर दिए।



70 हजार रुपए की शेष राशि: एडवांस मिलने के बाद ठग ने बाकी बचे 70 हजार रुपए भी मांग लिए और दिलीप ने वह भी भेज दिए।



ट्रांसपोर्ट के नाम पर 41 हजार 500 रुपए: इसके बाद ठग ने कहा कि सेना की ट्रांसपोर्ट लाइन और एंट्री प्रोसेस के लिए 41 हजार 500 रुपए अलग से जमा करने होंगे।



गलत भुगतान का बहाना: ठग ने फिर गेम खेला और कहा कि 41 हजार 500 रुपए का भुगतान गलत तरीके से हुआ है। इसे दो अलग-अलग किस्तों में भेजना था। पुलिसकर्मी उसकी बातों में आ गए और दोबारा यह रकम ट्रांसफर कर दी।





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ठगी की रकम का पूरा ब्यौरा

किस नाम पर पैसे लिएली गई रकम
फर्नीचर एडवांस बुकिंग10 हजार रुपए
फर्नीचर की बाकी बची रकम70 हजार रुपए
आर्मी ट्रांसपोर्ट और एंट्री फीस41 हजार 500
दोबारा गलत भुगतान के बहाने41, हजार 500
कुल ठगी एक लाख 63 हजार

जब दोबारा मांगे पैसे तब हुआ शक

इस तरह धीरे-धीरे करके ठग ने कुल एक लाख 63 हजार रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। लेकिन ठग का लालच यहीं नहीं रुका। उसने टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के नाम पर 23 हजार 150 रुपए और मांग लिए।



इस बार प्रधान आरक्षक दिलीप कुमार को गहरा संदेह हुआ। उन्होंने और पैसे देने से मना कर दिया और अपने पुराने दिए हुए पैसे वापस मांगे। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने साफ मना कर दिया और उसके बाद अपना मोबाइल नंबर भी बंद कर लिया।



पुलिस कर रही है जांच

ठगी का अहसास होने के बाद दिलीप कुमार ने तुरंत गोविंदपुरा थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने साइबर ठगी का केस दर्ज कर लिया है।



चूंकि ठग को दिलीप कुमार के दोस्त का नाम पहले से पता था, इसलिए ऐसा लगता है कि ठग के पास पुलिसकर्मी की कुछ जानकारियां पहले से मौजूद थीं। पुलिस अब बैंक खाते और मोबाइल नंबर के जरिए आरोपी की तलाश में जुट गई है।



FAQ

  1. साइबर ठगी होने पर क्या करें?
    ठगी होने के तुरंत बाद के 2-3 घंटे सबसे जरूरी होते हैं। तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। अपनी शिकायत दर्ज कराएं। अगर आप जल्दी कॉल करते हैं, तो पुलिस आपके पैसे ठग के खाते में होल्ड करवा सकती है।
  2. साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए कौन से तरीके अपनाते हैं?
    ठग खुद को आर्मी या सीआरपीएफ का जवान बताकर सस्ते में गाड़ी, फर्नीचर या मोबाइल बेचने का नाटक करते हैं। साथ ही आपका बिजली बिल बाकी है, लॉटरी लगी है, या "कूरियर अटक गया है कहकर एक छोटा सा भुगतान करने या ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं।


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