पूर्व सीएस बैंस और बेलवाल के खिलाफ जांच में पंचायत विभाग का अड़ंगा, मंत्री प्रहलाद पटेल ने जारी की नोटशीट

Amresh Kushwaha | Mar 19, 2026, 10:38 IST
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मध्य प्रदेश के करोड़ों रुपए के पोषण आहार घोटाले में मंत्री प्रहलाद पटेल की नोटशीट ने प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस और ललित बेलवाल को बचाने वाले अफसरों पर अब सीधी कार्रवाई की तैयारी है।

मध्यप्रदेश का बहुचर्चित पोषण आहार और टेक होम राशन घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन रसूखदार चेहरों और मददगार अफसरों की घेराबंदी शुरू हो गई है, जो जांच को पिछले एक साल से लटकाए हुए हैं।



प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ चल रही जांच में अब मंत्री प्रहलाद पटेल ने कड़ा रुख अपनाया है।



मंत्री पटेल की नोटशीट से मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की एक नोटशीट से हड़कंप मच गया है। मंत्री पटेल ने यह नोटशीट मुख्य सचिव (सीएस) आईएएस अनुराग जैन को लिखी है।



इसमें उन्होंने पूर्व सीएस के मामले में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीएस से कहा है कि जो अफसर लोकायुक्त को जरूरी तथ्य नहीं दे रहे, उनकी जिम्मेदारी तय करें।



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सीएम के लिखित जवाब ने खोली फाइलों की पोल

इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में एक लिखित जवाब पेश किया था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आजीविका मिशन में हुए इस घोटाले को लेकर मार्च 2025 में जांच प्रकरण दर्ज किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस मामले में आपराधिक केस दर्ज नहीं हो सका है। इसका सबसे बड़ा कारण पंचायत विभाग के उन अफसरों की चुप्पी है, जो लोकायुक्त को जानकारी देने के बजाय फाइलों को दबाए बैठे हैं।



तीन बार बुलावा, फिर भी खाली हाथ रही लोकायुक्त की टीम

जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकायुक्त ने सबूत जुटाने के लिए अफसरों को एक नहीं, बल्कि तीन बार तलब किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के जवाब के अनुसार:



  • 12 अगस्त 2025 को पहली बार विभाग के अफसरों को बुलाया गया था।
  • 28 नवंबर 2025 को दोबारा याद दिलाया गया था।
  • 5 फरवरी 2026 को तीसरी बार मौका दिया गया था।

इन तीनों तारीखों पर न तो कोई अधिकारी उपस्थित हुआ और न ही कोई दस्तावेज भेजे गए।



13 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

लगातार मिल रही अनदेखी के बाद लोकायुक्त के विधिक सलाहकार जसवंत सिंह यादव ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने 16 फरवरी को पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी, सचिव जीवी रश्मि और आजीविका मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह को पत्र लिखा था।



पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सीएजी (CAG) के जरिए 2022 में की गई टिप्पणियों से संबंधित जानकारी 13 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। बता दें कि यह पूरी जांच पूर्व विधायक पारस सकलेचा की 2023 की शिकायत पर आधारित है।



जानें क्या है टेक होम राशन घोटाला?

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 858 करोड़ रुपए का टेक होम राशन (टीएचआर) काल्पनिक तरीके से दिखाया गया था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि कच्चे माल का जितना उपयोग होना चाहिए था, उतना किया ही नहीं गया। इसके अलावा, पोषण आहार वितरण के दौरान जिन 8 जिलों में लाभार्थी बताए गए थे, वहां असल में उतने लोग मौजूद नहीं थे।



रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि राज्य सरकार ने केंद्रीय निर्देशों के बावजूद पोषण आहार योजना की खरीद और वितरण की जांच नहीं की।



क्या है टेक होम राशन (टीएचआर)?

टेक होम राशन (टीएचआर) एक पोषण कार्यक्रम है, जो 6 से 36 महीने के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को घर पर उपयोग के लिए फोर्टिफाइड राशन प्रदान करता है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों के बच्चों और महिलाओं को पोषण संबंधी सहायता प्रदान करना है।



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