कागज पर रफ्तार, जमीन पर इंतजार! MP की बड़ी योजनाओं की असली तस्वीर आई सामने
समझें क्या है पूरा मामला
- जल जीवन मिशन का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ।
- पीएम जनमन और धरती आबा अभियान की रफ्तार लक्ष्य से पीछे।
- हजारों आवास और आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण अधूरा।
- फंड मिलने में देरी और बजट दबाव का असर।
- जिला पंचायतों को लंबित काम तेजी से पूरा करने के निर्देश।
जमीनी हकीकत अलग कहानी
मध्य प्रदेश में करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं सरकारी रिपोर्टों में आगे बढ़ती दिख रही हैं। लेकिन जमीनी हकीकत अलग कहानी बयां कर रही है। कई अहम योजनाएं अब भी अपने तय लक्ष्य से पीछे हैं। कहीं नल कनेक्शन अधूरे हैं तो कहीं आवास और आंगनबाड़ी भवनों का काम समय पर पूरा नहीं हो सका। अब सरकार ने लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी लक्ष्य और जमीनी प्रगति में दिखा अंतर
प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत करीब 1.11 करोड़ परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक लगभग 80 प्रतिशत परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन मिल चुके हैं, लेकिन समूह नल-जल योजनाओं के कई प्रोजेक्ट अभी भी निर्माणाधीन हैं। यानी बड़ी आबादी तक योजना पहुंची जरूर है, लेकिन लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है।
योजनाएं भी तय रफ्तार नहीं पकड़ सकीं
पीएम जनमन योजना के तहत 12.33 लाख परिवारों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। अब तक करीब 8.50 लाख परिवारों तक ही यह सुविधा पहुंच सकी है। वहीं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 27.55 लाख परिवारों तक क्रियाशील नल कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन अभी लगभग 20 लाख परिवारों को ही इसका लाभ मिल पाया है।
आंगनबाड़ी परियोजनाओं की चाल भी धीमी
पीएम जनमन योजना के तहत मध्य प्रदेश को 1.89 लाख आवास बनाने का लक्ष्य मिला था। इनमें से अब तक लगभग 1.44 लाख आवास ही पूरे हो पाए हैं। इसी तरह कई जिलों में आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण भी निर्धारित समय से पीछे चल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो रही है।
क्यों अटकी विकास योजनाओं की रफ्तार?
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कई कारण एक साथ सामने आए।
केंद्र से राशि मिलने में देरी।
केंद्रीय करों में 2,314 करोड़ की कटौती।
छत्तीसगढ़ को पेंशन मद में करीब 2,500 करोड़ का भुगतान।
जल जीवन मिशन की परियोजनाओं में तकनीकी संशोधन।
स्वीकृत परियोजनाओं के लिए समय पर फंड उपलब्ध न होना।
इन परिस्थितियों के बीच राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से करीब 2,750 करोड़ की व्यवस्था भी की, लेकिन परियोजनाओं की गति सामान्य होने में समय लग रहा है।
अब प्रशासन ने बढ़ाई जवाबदेही
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। विभाग का कहना है कि आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जा चुका है और अनुपूरक बजट में भी पूंजीगत कार्यों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं। अब फोकस निर्माण कार्यों को तेज गति से पूरा कराने पर है।
क्या है बड़ा संदेश?
प्रदेश की कई प्रमुख योजनाओं में काम जारी है, लेकिन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच अब भी स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। आने वाले महीनों में असली चुनौती केवल बजट उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को धरातल पर पूरा करना होगी।
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