पुलों का 24 महीने का काम 6 साल में भी अधूरा, आखिर जिम्मेदार कौन, मंत्री-अफसर या सिस्टम?
Ramanand Tiwari | Jul 25, 2026, 08:30 IST
पुलों का 24 महीने का काम 6 साल में भी अधूरा
मध्यप्रदेश में पुल निर्माण परियोजनाओं की रफ्तार पर गंभीर सवाल उठे हैं। वर्ष 2020 में शुरू हुए कई कार्य अब भी अधूरे बताए गए हैं। अधिकांश पुलों की तय समयसीमा केवल 24 महीने थी।
समझें क्या है पूरा मामला
अधिकांश परियोजनाओं की समय-सीमा 24 महीने थी।
2026 तक भी 48 में से ज्यादातर पुल अधूरे।
मंत्री राकेश सिंह ने इंजीनियर-ठेकेदार समन्वय की कमी स्वीकार की।
वर्षों से समीक्षा बैठकों के बावजूद नतीजे नहीं।
मध्य प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिन पुलों का निर्माण 24 महीने में पूरा होना था, वे छह साल बाद भी अधूरे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान मंत्री, प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव और विभागीय अधिकारी लगातार समीक्षा बैठकें करते रहे। फिर भी परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं। ऐसे में सवाल सिर्फ ठेकेदारों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की जवाबदेही पर खड़ा होता है।
क्या सिर्फ इंजीनियर और ठेकेदार ही जिम्मेदार हैं?
समीक्षा होती रही, काम क्यों नहीं हुआ?
मंत्री का बयान ही बना सबसे बड़ा सवाल
देरी का बोझ आखिर कौन उठाता है?
गुणवत्ता की निगरानी भी सवालों में
क्या सिर्फ बैठक से बदल जाएगी तस्वीर?
सरकार के सामने बड़े सवाल
लगातार समीक्षा बैठकों के बावजूद प्रगति क्यों नहीं हुई?
जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदारों की है या अधिकारियों की भी?
देरी से हुए आर्थिक नुकसान की जवाबदेही कौन तय करेगा?
गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी कौन करेगा?
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