MP राज्यसभा चुनाव 2026: अब मचेगा बड़ा सियासी घमासान! BJP की तीसरी सीट पर नजर

Ramanand Tiwari | May 23, 2026, 22:54 IST
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मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 का ऐलान होते ही सियासी तापमान बढ़ गया। कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी जंग तेज है। BJP अपनी तीसरी सीट पर रणनीतिक बढ़त बनाने में जुटी है।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का ऐलान होते ही सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में अंदरखाने जबरदस्त हलचल शुरू हो गई है।



सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर है। भाजपा हर हाल में रणनीतिक बढ़त बनाकर तीसरी सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश में जुटी है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को संभालने और अंदरूनी खींचतान रोकने की चुनौती से जूझ रही है।



दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस में टिकट को लेकर कई बड़े चेहरे सक्रिय हो चुके हैं। वहीं भाजपा फिलहाल साइलेंट मोड में दिखाई दे रही है, लेकिन अंदरखाने नामों पर मंथन तेज बताया जा रहा है।



चुनाव आयोग के ऐलान के बाद बढ़ी सियासी बेचैनी

भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। प्रदेश से जिन तीन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें कांग्रेस से दिग्विजय सिंह, भाजपा से जॉर्ज कुरियन भाजपा से डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और शामिल हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे इस बार राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बाद कांग्रेस में दावेदारों की लंबी लाइन लग गई है।



कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी रेस

कांग्रेस की एक सीट लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन उसी एक सीट के लिए पार्टी के भीतर जबरदस्त लॉबिंग शुरू हो चुकी है। रेस में जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं उनमें कमलनाथ, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा का नाम शामिल है। बताया जा रहा है कि कई नेता दिल्ली स्तर तक सक्रिय हो चुके हैं।



प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले ही सार्वजनिक तौर पर सफाई दे चुके हैं कि उनकी राज्यसभा जाने की कोई इच्छा नहीं है।लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान को रणनीतिक दूरी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि टिकट के अंतिम फैसले तक कई और नाम अचानक सामने आ सकते हैं।



कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की मुश्किल सिर्फ सीट जीतना नहीं बल्कि अपने विधायकों को एकजुट रखना भी है। वर्तमान विधानसभा समीकरण कांग्रेस की चिंता बढ़ा रहे हैं। अभी विधानसभा का गणित है: भाजपा 164 विधायक, कांग्रेस 64 विधायक, भारत आदिवासी पार्टी 1 विधायक और 1 सीट रिक्त। लेकिन तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। तीन विधायक कांग्रेस की टेंशन बढ़ा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने तीन बड़े संकट खड़े हो गए हैं।



1. राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म


दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता जा चुकी है। इससे कांग्रेस का संख्या बल और कमजोर हुआ है।



2. मुकेश मल्होत्रा नहीं कर पाएंगे वोट


विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। इसका सीधा असर कांग्रेस के आंकड़ों पर पड़ेगा।



3. निर्मला सप्रे पर सस्पेंस


बीना विधायक निर्मला सप्रे अभी भाजपा और कांग्रेस के बीच झूलती नजर आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदान के दिन वे किसके पक्ष में जाएंगी। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर अब क्रॉस वोटिंग और मैनेजमेंट पॉलिटिक्स की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।



BJP की नजर तीसरी सीट पर

भाजपा इस चुनाव को सिर्फ दो सीटों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी तीसरी सीट पर भी राजनीतिक समीकरण बनाने में जुटी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा विधायकों के मौजूदा गणित और कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी का फायदा उठाने की तैयारी में है। यही कारण है कि भाजपा फिलहाल खुलकर कुछ नहीं बोल रही, लेकिन संगठन स्तर पर रणनीति तेज हो चुकी है।



जॉर्ज कुरियन की वापसी लगभग तय?

केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को भाजपा दोबारा राज्यसभा भेज सकती है। वे फिलहाल केंद्र सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री हैं। भाजपा में उन्हें पुराने और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। वे 1980 से पार्टी से जुड़े हुए हैं। हाल ही में उन्होंने केरल की कांजिरापल्ली सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बावजूद पार्टी उन्हें दक्षिण भारत और ईसाई चेहरे के रूप में महत्वपूर्ण मानती है। इसी वजह से संभावना है कि भाजपा उन्हें मध्य प्रदेश कोटे से फिर राज्यसभा भेज सकती है।



सुमेर सिंह की सीट पर नया आदिवासी चेहरा?

डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी फिलहाल भाजपा संगठन में प्रदेश महामंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी सीट पर नए आदिवासी चेहरे को मौका देने की चर्चा तेज हो गई है। मध्य प्रदेश में करीब 22 फीसदी आदिवासी वोट बैंक होने के कारण भाजपा इस फैसले को 2028 की रणनीति से जोड़कर देख रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी युवा और नए चेहरों पर भी दांव खेल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व ही करेगा।



BJP का साइलेंट गेम बनाम कांग्रेस की खुली खींचतान

राज्यसभा चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर यह बन रही है कि कांग्रेस में दावेदार खुलकर सक्रिय हैं और भाजपा अंदरखाने रणनीति बना रही है। कांग्रेस में टिकट की होड़ खुली नजर आ रही है जबकि भाजपा अभी नामों को लेकर सस्पेंस बनाए हुए है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में दोनों दलों में अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।



क्या कांग्रेस बचा पाएगी अपनी सीट?

राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है। एक तरफ भाजपा तीसरी सीट पर कब्जे का सपना देख रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपने विधायकों और दावेदारों के बीच संतुलन बनाने में उलझी दिखाई दे रही है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस अपनी रणनीति बचा पाएगी? या भाजपा की कूटनीति तीसरी सीट का खेल पलट देगी? मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले कुछ दिन बड़े सियासी धमाके वाले साबित हो सकते हैं।



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