राज्यसभा चुनाव: बिट्टू जाएंगे गुजरात या राजस्थान से ही खेलेंगे दांव?
Mukesh Sharma | May 22, 2026, 15:28 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी पारा बढ़ गया है। दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। राजस्थान में तीन सीट पर 18 जून को चुनाव होंगे। भाजपा के राजेंद्र गहलोत और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू तथा कांग्रेस में नीरज डांगी का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।
विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो और कांग्रेस का एक सदस्य चुना जाना तय है। लेकिन, भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतार कर या निर्दलीय को समर्थन देकर कांग्रेसी खेमे से क्रास वोटिंग करवा सकती है।
राज्य के कई नेता लंबे समय से राज्यसभा जाने के प्रयास में लगे हुए हैं। चुनाव घोषणा के साथ ही अब यह दौड़ अंतिम दौर में पहुंच गई है। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है। ऐसे में टिकट मांगने वालों के पास ज्यादा समय नहीं बचा है।
राजस्थान में भाजपा के पास तीन में से दो सीट हैं। विधानसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। इसलिए उसके पास दोनों सीट कायम रहेंगी। इनमें से एक सीट पर मोदी सरकार में मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू काबिज हैं। इस बार भी यदि उन्हें दोबारा राजस्थान से ही राज्यसभा भेजा गया तो भाजपा को सिर्फ एक उम्मीदवार ही तय करना है।
इस बार गुजरात में भाजपा के पास तीन सीट हैं। क्योंकि गुजरात में कांग्रेस के पास अपना उम्मीदवार जिताने लायक विधायक ही नहीं हैं। पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए बिट्टू का राज्यसभा जाना तय है।
बिट्टू को गुजरात से भी राज्यसभा भेजा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा राजस्थान में अपने दो नेताओं को राज्यसभा भेज सकेगी। भाजपा तीसरे उम्मीदवार के जरिए कांग्रेसी खेमे में तोड़फोड़ भी कर सकती है।
भाजपा केंद्र और राज्य में सरकार में हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं में राज्यसभा टिकट के लिए ज्यादा संघर्ष होना स्वाभाविक है। लेकिन, आश्चचर्यजनक रुप से कांग्रेस में भी एक टिकट के लिए संघर्ष कम नहीं है।
भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, अलका गुर्जर और ज्योति मिर्धा के नाम प्रमुख रुप से लिए जा रहे हैं। इनके अतिरिक्त नरसी कुलरिया, प्रभुलाल सैनी और प्रमोद सामर के नाम भी चर्चा में हैं।
प्रमोद सामर उदयपुर से हैं। आदिवासी अंचल में सामान्य वर्ग का चेहरा हो सकते हैं। महिलाओं को प्रमुखता देने के लिए पार्टी अलका गुर्जर और ज्योति मिर्धा में किसी एक को राज्यसभा भेज सकती है। अलका गुर्जर को पूर्वी राजस्थान के गुर्जरों को और ज्योति मिर्धा को पश्चिमी राजस्थान में जाटों को पार्टी के पक्ष में करने के लिए राज्यसभा भेजा जा सकता है। पार्टी से जुडे सूत्रों के अनुसार यदि एक सीट से महिला को भेजना तय हुआ तो ज्योति मिर्धा की संभावना ज्यादा है।
आरएसएस ने नरसी कुलरिया के लिए मोर्चा खोला हुआ है। राजस्थान के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम कुलरिया के लिए सिफारिश कर रहे हैं। कुलरिया ने दिल्ली के सेंट्रल विस्टा में फर्नीचर का पूरा काम किया है। इसके अतिरिक्त कुलरिया संघ के कार्यक्रमों में भारी मात्रा में चंदा भी देते रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यदि कुलरिया को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला तो उन्हें नॉमिनेशन के लिए जरिए राज्यसभा में लाया जाएगा।
विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या के अनुसार कांग्रेस राज्यसभा की एक सीट आसानी से जीत जाएगी। इस एक सीट के लिए कांग्रेस में कई दिग्गज प्रयासरत हैं।
कांग्रेस से जुड़ा मुस्लिम तबका काफी समय से अपने लिए इस सीट की मांग कर रहा है। लेकिन,एससी व एसटी समुदायों ने भी बराबर दबाव बनाया हुआ है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है और आने वाले दिनों में ही यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेसी उम्मीदवार कौन होगा।
राजस्थान विधानसभा (independent) में भाजपा के 118, कांग्रेस के 67, भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के 4, बीएसपी (BSP) के 2, आरएलडी (RLD) का एक और आठ (independent) निर्दलीय विधायक हैं। एक सदस्य को जीतने के लिए 51 वोट चाहिए।
इस हिसाब से भाजपा के दो और कांग्रेस का एक सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हो सकेगा। भाजपा ने यदि तीसरा उम्मीदवार उतारा या किसी निर्दलीय को समर्थन दिया तो उसे 32 वोटों का जुगाड़ करना पड़ेगा।
यदि तीसरे उम्मीदवार ने भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के 4,बीएसपी (BSP) के 2,आरएलडी (RLD) का एक और आठ (independent) निर्दलीय विधायकों के 15 और भाजपा के बचे हुए 16 वोट ले भी लिए तो यह कुल 31 वोट ही होते हैं।
इसलिए उसे कांग्रेस से 20 वोट चाहिए होंगे, लेकिन वर्तमान स्थितियों में कांग्रेसी खेमे से 20 वोट तोड़ना संभव नहीं लगता। हालांकि भी यह देखना बाकी है कि भाजपा और कांग्रेस क्या व कैसी रणनीति अपनाती हैं।
राज्यसभा चुनाव के लिए एक जून को अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन भर सकते हैं। नाम वापसी 11 जून तक होगी। आवश्यक होने पर 18 को मतदान और उसी दिन मतों की गिनती होगी।
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विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो और कांग्रेस का एक सदस्य चुना जाना तय है। लेकिन, भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतार कर या निर्दलीय को समर्थन देकर कांग्रेसी खेमे से क्रास वोटिंग करवा सकती है।
राज्य के कई नेता लंबे समय से राज्यसभा जाने के प्रयास में लगे हुए हैं। चुनाव घोषणा के साथ ही अब यह दौड़ अंतिम दौर में पहुंच गई है। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है। ऐसे में टिकट मांगने वालों के पास ज्यादा समय नहीं बचा है।
गुजरात से जा सकते हैं बिट्टू!
इस बार गुजरात में भाजपा के पास तीन सीट हैं। क्योंकि गुजरात में कांग्रेस के पास अपना उम्मीदवार जिताने लायक विधायक ही नहीं हैं। पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए बिट्टू का राज्यसभा जाना तय है।
बिट्टू को गुजरात से भी राज्यसभा भेजा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा राजस्थान में अपने दो नेताओं को राज्यसभा भेज सकेगी। भाजपा तीसरे उम्मीदवार के जरिए कांग्रेसी खेमे में तोड़फोड़ भी कर सकती है।
कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टी में संघर्ष
भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, अलका गुर्जर और ज्योति मिर्धा के नाम प्रमुख रुप से लिए जा रहे हैं। इनके अतिरिक्त नरसी कुलरिया, प्रभुलाल सैनी और प्रमोद सामर के नाम भी चर्चा में हैं।
प्रमोद सामर उदयपुर से हैं। आदिवासी अंचल में सामान्य वर्ग का चेहरा हो सकते हैं। महिलाओं को प्रमुखता देने के लिए पार्टी अलका गुर्जर और ज्योति मिर्धा में किसी एक को राज्यसभा भेज सकती है। अलका गुर्जर को पूर्वी राजस्थान के गुर्जरों को और ज्योति मिर्धा को पश्चिमी राजस्थान में जाटों को पार्टी के पक्ष में करने के लिए राज्यसभा भेजा जा सकता है। पार्टी से जुडे सूत्रों के अनुसार यदि एक सीट से महिला को भेजना तय हुआ तो ज्योति मिर्धा की संभावना ज्यादा है।
आरएसएस की इच्छा
बताया जा रहा है कि यदि कुलरिया को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला तो उन्हें नॉमिनेशन के लिए जरिए राज्यसभा में लाया जाएगा।
कांग्रेस में एक सीट के लिए होगा मुकाबला
कांग्रेस से जुड़ा मुस्लिम तबका काफी समय से अपने लिए इस सीट की मांग कर रहा है। लेकिन,एससी व एसटी समुदायों ने भी बराबर दबाव बनाया हुआ है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है और आने वाले दिनों में ही यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेसी उम्मीदवार कौन होगा।
कैसे हो सकती है क्रास वोटिंग !
इस हिसाब से भाजपा के दो और कांग्रेस का एक सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हो सकेगा। भाजपा ने यदि तीसरा उम्मीदवार उतारा या किसी निर्दलीय को समर्थन दिया तो उसे 32 वोटों का जुगाड़ करना पड़ेगा।
यदि तीसरे उम्मीदवार ने भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के 4,बीएसपी (BSP) के 2,आरएलडी (RLD) का एक और आठ (independent) निर्दलीय विधायकों के 15 और भाजपा के बचे हुए 16 वोट ले भी लिए तो यह कुल 31 वोट ही होते हैं।
इसलिए उसे कांग्रेस से 20 वोट चाहिए होंगे, लेकिन वर्तमान स्थितियों में कांग्रेसी खेमे से 20 वोट तोड़ना संभव नहीं लगता। हालांकि भी यह देखना बाकी है कि भाजपा और कांग्रेस क्या व कैसी रणनीति अपनाती हैं।
राज्यसभा चुनाव के लिए एक जून को अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन भर सकते हैं। नाम वापसी 11 जून तक होगी। आवश्यक होने पर 18 को मतदान और उसी दिन मतों की गिनती होगी।
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