भ्रष्टाचार मामले में रिटायर्ड आईएएस योगीराज शर्मा पर फिर होगी जांच, EOW की क्लीनचिट को कोर्ट ने किया खारिज

Amresh Kushwaha | Feb 24, 2026, 12:21 IST
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भ्रष्टाचार मामले में फंसे पूर्व स्वास्थ्य संचालक डॉ. योगीराज शर्मा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कोर्ट ने EOW की क्लीनचिट को खारिज कर दिया है। साथ ही, फिर से मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

BHOPAL. मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रिटायर्ड आईएएस और पूर्व स्वास्थ्य संचालक डॉ. योगीराज शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला फिर से जांच के दायरे में आ गया है।



विशेष अदालत (Special Court) ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के जरिए पेश की गई खात्मा रिपोर्ट (Closure Report) को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त स्वतंत्र साक्ष्यों के क्लीनचिट देना उचित नहीं है।



छापेमारी में मिली थी विदेशी मुद्रा

यह मामला साल 2007 में शुरू हुआ था। इस दौरान तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. योगीराज शर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। इस जांच में एक करोड़ 13 लाख रुपए नकद और भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा बरामद हुई थी।



इसमें पांच हजार 475 अमेरिकी डॉलर, दो हजार 110 यूएई दिरहम और पांच हजार 910 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शामिल थे। सितंबर 2007 की इस छापेमारी में कुल 14 करोड़ 66 लाख की अघोषित आय का खुलासा हुआ था। इसके बाद 2008 में ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की थी।



NRHM योजना में 7 करोड़ की कथित हेरफेरी

मामले की जड़ें राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) योजना से जुड़ी हैं। साल 2006 में केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 23 करोड़ 34 लाख रुपए की पहली किश्त जारी की थी।



आरोप है कि रिटायर्ड आईएएस योगीराज शर्मा ने 20 अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को करीब 7 करोड़ रुपए का चूना लगाया था। लोकायुक्त ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 मार्च 2014 को चालान पेश किया था। यह चालान तीन हजार 800 पन्नों का था।



बिना जांच कैसे मिली क्लीनचिट?- कोर्ट

करीब 14 साल की लंबी जांच के बाद 16 नवंबर 2022 को ईओडब्ल्यू ने खात्मा रिपोर्ट पेश की थी। यह रिपोर्ट तत्कालीन जांच अधिकारी टीआई अखिल सिंह और एसपी राकेश सिंह के कार्यकाल में दी गई थी।



वहीं, विशेष अदालत ने इसे अधूरा माना है। स्पेशल जज राम प्रताप मिश्र ने कहा कि रिपोर्ट में शासन को हुए नुकसान और बेहिसाब संपत्ति के आरोपों की जांच नहीं की गई है।



कोर्ट ने अब फिर से जांच के आदेश दिए हैं। आय-व्यय का सही हिसाब-किताब करने के लिए एक नया गणना पत्रक तैयार करने को कहा गया है।



जांच के घेरे में 21 रसूखदार नाम

ईओडब्ल्यू ने जिन 21 लोगों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी, वे सभी अब दोबारा जांच का सामना करेंगे। इस सूची में रिटायर्ड आईएएस डॉ. योगीराज शर्मा के अलावा अशोक नंदा, बसंत शेल्के, सुनील अग्रवाल और कई निजी कंपनियों के प्रोपराइटर शामिल हैं।



इनमें छत्तीसगढ़ फार्मा, नेप्च्यून रेमेडीज और ग्लोबल इंटरप्राइजेज जैसी फर्में भी शामिल हैं। इन पर एनआरएचएम (NRHM) के फंड में गड़बड़ी करने के आरोप हैं।



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