स्कूल खुल गए, गुरुजी गायब! ट्राइबल स्कूलों में बिना शिक्षक कैसे चलेगी पढ़ाई?

Ramanand Tiwari | Jun 29, 2026, 17:10 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश के ट्राइबल स्कूलों में हजारों शिक्षक पद खाली हैं। तबादलों के बाद कई स्कूल शिक्षक विहीन हो गए। अतिथि शिक्षक भर्ती शुरू नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • 16 जून से ट्राइबल स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है।
  • हजारों शिक्षक पद खाली होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित है।
  • स्थानांतरण के बाद कई स्कूल एकल शिक्षक या शिक्षक विहीन हो गए हैं।
  • हर साल होने वाली अतिथि शिक्षकों की भर्ती इस बार अब तक शुरू नहीं हुई।
  • वनवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।

मध्य प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है। 16 जून से ट्राइबल स्कूलों में नियमित पढ़ाई शुरू हो चुकी है और बच्चे रोज स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन कई स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।



नियमित भर्ती अटकी हुई है और हर साल होने वाली अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी अब तक शुरू नहीं हुई। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।



सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

सरकार लगातार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, ई-अटेंडेंस, मॉनिटरिंग और बेहतर स्कूल व्यवस्था के दावे कर रही है। लेकिन ट्राइबल इलाकों के सरकारी स्कूलों की जमीनी तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।



कहीं एक शिक्षक, तो कहीं पूरी तरह खाली कक्षाएं

नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय बीत चुका है। छात्र रोज स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन कई विद्यालयों में पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक मौजूद नहीं हैं। कहीं एक शिक्षक पूरे स्कूल का जिम्मा संभाल रहा है तो कहीं कक्षाएं बिना शिक्षक के चल रही हैं।



तबादलों के बाद और बढ़ा शिक्षकों का संकट

हाल ही में हुए स्थानांतरण के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। कई स्कूलों से शिक्षक दूसरे स्थानों पर चले गए, लेकिन उनकी जगह अब तक नई नियुक्तियां नहीं हो सकीं। नियमित भर्ती की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी है, जिससे स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है।



अतिथि शिक्षकों की भर्ती में देरी, बच्चों की पढ़ाई पर असर

हर वर्ष रिक्त पदों पर शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती रही है। लेकिन इस बार सत्र शुरू होने के दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी। इसका सीधा असर कक्षाओं के संचालन और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।



वनवासी इलाकों के छात्रों का भविष्य दांव पर

दूरस्थ वनवासी क्षेत्रों के स्कूल सबसे ज्यादा संकट में हैं। यहां नए विद्यार्थियों के प्रवेश, नामांकन और नियमित शिक्षण कार्य तक प्रभावित हो रहा है। समय रहते व्यवस्था नहीं हुई तो छात्रों का पाठ्यक्रम पिछड़ना तय माना जा रहा है, जिसका असर वार्षिक परीक्षा परिणाम और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।



सबसे बड़ा सवाल: पहले शिक्षक या फिर सिर्फ दावे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी मॉनिटरिंग और जवाबदेही की बात कर रही है, तब स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराना प्राथमिकता क्यों नहीं बन पा रहा है। शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूल सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखा रहे हैं।



आयुक्त को पत्र, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी

इस गंभीर स्थिति को लेकर ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त को पत्र भेजकर प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक के विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती तत्काल शुरू करने की मांग की है। हालांकि पत्र भेजे जाने के बाद भी अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।



ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष डीके सिंगोरे ने कहा कि स्थानांतरण और रिक्त पदों के कारण कई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। छात्रहित में विभाग को तत्काल अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।



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