एमपी में यूनिवर्सिटी-कॉलेजों को चेतावनी, लोकपाल के आदेश मानना होगा

Ramanand Tiwari | Feb 03, 2026, 23:39 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में लाखों छात्रों के लिए सरकार ने अहम फैसला लिया है। यूजीसी छात्र शिकायत निवारण नियम लागू होगा। अब लोकपाल के आदेश मानना अनिवार्य होगा नहीं तो कार्रवाई होगी।

News In Short

  • यूजीसी छात्र शिकायत निवारण नियम 2023 लागू।
  • झूठी शिकायत पर छात्र के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
  • हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति।
  • शिकायत निवारण समिति का गठन जरूरी होगा।
  • प्रॉस्पेक्टस में जानकारी देना अनिवार्य होगा।

New In Detail

मध्यप्रदेश में पढ़ाई कर रहे लाखों छात्रों के लिए सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब कॉलेज या यूनिवर्सिटी में शिकायत करना सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने यूजीसी (UGC) छात्र शिकायत निवारण विनियम 2023 को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।



सरकार ने साफ कर दिया है कि हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में बना लोकपाल अब सिर्फ नाम का नहीं होगा। लोकपाल के फैसले मानना अनिवार्य होगा। अगर शिकायत झूठी निकली, तो छात्र के खिलाफ भी कार्रवाई संभव होगी।



आदेश किन संस्थानों पर लागू होगा?

यह निर्देश राज्य के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के दायरे में आने वाले कॉलेजों पर लागू होंगे।



सरकार का मकसद क्या है?

सरकार का साफ कहना है कि इसका उद्देश्य है छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बिना पक्षपात निष्पक्ष फैसला किया जाएगा।



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झूठी शिकायत पर भी होगी कार्रवाई

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई शिकायत झूठी या बेबुनियाद पाई जाती है तो लोकपाल शिकायतकर्ता छात्र के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।



हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में लोकपाल अनिवार्य यूजीसी नियमों के मुताबिक हर विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति जरूरी है। प्रदेश में अधिकतर संस्थानों में लोकपाल तो हैं, लेकिन नियमों के मुताबिक काम नहीं हो रहा। इसी वजह से अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।



लोकपाल किस तरह काम करेगा?

लोकपाल एक स्वतंत्र अपीलीय प्राधिकरण होगा। इसमें वही मामले सुने जाएंगे जिनमें छात्र पहले छात्र शिकायत निवारण समिति की प्रक्रिया पूरी कर चुका हो।



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छात्र को बतानी होगी पूरी जानकारी

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी अपनी वेबसाइट और प्रॉस्पेक्टस में शिकायत निवारण समिति के सदस्यों के नाम पद और संपर्क विवरण लोकपाल का नाम, पता, ई-मेल और कार्यकाल शिकायत और अपील की पूरी प्रक्रिया साफ और प्रमुखता से दिखाए। मकसद यही है कि कोई छात्र यह न कहे की “मुझे जानकारी ही नहीं थी।”



एडमिशन से पहले प्रॉस्पेक्टस जरूरी

छात्रों को सही जानकारी मिले, इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले कॉलेज और यूनिवर्सिटी को वेबसाइट पर प्रॉस्पेक्टस जारी करना अनिवार्य होगा।



प्रॉस्पेक्टस में यह जानकारी जरूरी होगी-



  • कोर्स और सीटों की संख्या फीस और योग्यता।
  • चयन प्रक्रिया और रिफंड नियम।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्टल, लाइब्रेरी।
  • रैगिंग-रोधी व्यवस्था।
  • फैकल्टी का पूरा विवरण
  • हार्ड कॉपी की कीमत सिर्फ छपाई खर्च तक सीमित रहेगी।

गलत जानकारी पर छात्र कर सकेगा शिकायत

अगर प्रॉस्पेक्टस में गलत या भ्रामक जानकारी दी गई और छात्र को नुकसान हुआ तो छात्र, छात्र शिकायत निवारण समिति या सीधे लोकपाल से शिकायत कर सकेगा।



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छात्र शिकायत निवारण समिति कैसी होगी?

हर संस्थान में यह समिति बनाना अनिवार्य होगा

अध्यक्ष, एक प्रोफेसर सदस्य, चार वरिष्ठ शिक्षक, एक छात्र प्रतिनिधि, कम से कम एक महिला सदस्य, एक एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग का सदस्य।



15 दिन में देना होगा फैसला

शिकायत मिलने के 15 वर्किंग डे के भीतर समिति को अपना फैसला या सिफारिश संस्था प्रमुख को भेजनी होगी और उसकी कॉपी छात्र को देना जरूरी होगा।



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छात्रों के लिए बड़ा बदलाव

इस फैसले के बाद अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी मनमानी नहीं कर पाएंगे। छात्रों को शिकायत का स्पष्ट, भरोसेमंद और जवाबदेह सिस्टम मिलेगा।





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