MP के सरकारी विश्वविद्यालयों में 80% शिक्षकों के पद खाली, कैसे होगी पढ़ाई?

Anjali Dwivedi | Jan 20, 2026, 14:42 IST
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मध्य प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। वहीं, 2103 पदों में से 1683 पद खाली पड़े हैं। नए कोर्सेस में भी छात्रों ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

News In Short

  • मध्य प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के करीब 80% पद खाली पड़े हैं।
  • प्रोफेसर की कमी के कारण छात्र आधुनिक और व्यावसायिक कोर्सेस में रुचि नहीं ले रहे हैं।
  • प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में कुल 2 हजार 103 स्वीकृत पदों में से 1,683 पद खाली हैं। सिर्फ 420 शिक्षक ही काम कर रहे हैं।
  • प्रदेश के 4 प्रमुख विश्वविद्यालयों में एक भी नियमित प्रोफेसर नहीं है।
  • भोज विश्वविद्यालय में एक लाख छात्रों और 84 कोर्स होने के बावजूद सिर्फ 4 नियमित शिक्षक ही काम कर रहे हैं।


News In Detail

भोपाल: मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत बड़े-बड़े दावे किए गए थे। हालांकि, असलियत ये है कि कोर कोर्सेस को पढ़ाने के लिए 80 फीसदी शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों की भारी कमी के कारण अब छात्रों का इन कोर्सेज से भी मोह टूटता नजर आ रहा है।




नए कोर्स तो आए, पर पढ़ाने वाले गायब

राज्य सरकार ने रोजगार बढ़ाने के लिए एविएशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी और वेब डिजाइनिंग जैसे मॉडर्न कोर्स शुरू किए हैं।



कागजों पर ये कोर्स बहुत आकर्षक लगते हैं, लेकिन जब छात्र कॉलेज पहुंचते हैं, तो उन्हें पढ़ाने वाले प्रोफेसर ही नहीं मिलते। यही वजह है कि कई हाई-टेक कोर्सों में सिर्फ चार-पांच छात्रों ने ही एडमिशन लिया है।



उच्च शिक्षा विभाग की बदहाल स्थिति

प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों की हालत बहुत गंभीर है। यहां प्रोफेसर्स के 2 हजार 103 पद मंजूर हैं। हैरानी की बात ये है कि इनमें से सिर्फ 420 पदों पर ही नियमित शिक्षक तैनात हैं। बाकी 1,683 पद काफी समय से खाली पड़े हैं। खाली पदों पर नई भर्तियां नहीं होने से पूरी शिक्षा व्यवस्था काफी प्रभावित हो गई है।



चार विश्वविद्यालयों में जीरो प्रोफेसर

हैरानी की बात ये भी है कि मध्य प्रदेश के चार विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां एक भी नियमित प्रोफेसर नहीं है। ये हैं छतरपुर का महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, खरगोन का क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, गुना का क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय और सागर का रानी अवंती बाई विश्वविद्यालय।



ये सभी विश्वविद्यालय पूरी तरह से अतिथि विद्वानों या संविदा कर्मचारियों पर निर्भर हैं। इन चारों संस्थानों में कुल 140 पद मंजूर हैं, लेकिन फिलहाल ये सभी पद खाली पड़े हैं।



भोज यूनिवर्सिटी का चौंकाने वाला हाल

अगर हम भोज विश्वविद्यालय की बात करें, तो यहां की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां 84 अलग-अलग कोर्स चल रहे हैं और करीब एक लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।



इन सबको पढ़ाने के लिए यहां सिर्फ 4 नियमित शिक्षक हैं। यहां करीब 93 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इसी तरह बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) में भी 65 फीसदी शिक्षकों की कमी है।



क्या कहती है यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट?

भर्तियों में हो रही देरी को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया चल रही है। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन के मुताबिक, प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे। अभी उन आवेदनों की बारीकी से जांच की जा रही है, और उसके बाद ही नियुक्तियां की जा सकेंगी।



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