एमपी के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की हाईलेवल जांच, मंत्री प्रतिमा बागरी बोलीं- गड़बड़ी मिली तो होगी सख्त कार्रवाई

Sumit Kumar | Oct 22, 2026, 17:51 IST
Share
मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
MP Minister Pratima Bagri announces a high-level inquiry into government procurement across 374 urban local bodies following concerns over major price differences.

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच होगी। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सामान की कीमतों में अंतर की जांच होगी। दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में विभागीय बैठक का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें सरकारी खरीदी से जुड़ी कई गड़बड़ियों की आशंका जताई गई थी।

तीन साल में 374 निकायों ने 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए। विभागीय विश्लेषण में 250 करोड़ रुपए की संभावित बचत का दावा हुआ था।

मंत्री बोलीं- सभी जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने सरकारी खरीदी पर उठे सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग के सभी कामों की नियमित निगरानी होती है। इसमें सामान की खरीदी और निर्माण कार्य भी शामिल हैं। गड़बड़ी सामने आने पर विभाग जांच कराता है। जांच में दोषी मिलने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होती है।

मंत्री ने कहा कि अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो के जरिए सरकारी खरीदी से जुड़ी जानकारी सामने आई है। अब सरकार पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएगी। इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होगी।

प्रतिमा बागरी ने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हुई है। जरूरत पड़ने पर पुरानी कार्रवाइयों की सूची भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

कीमतों में अंतर की भी होगी जांच

मंत्री प्रतिमा बागरी ने जेम पोर्टल (GeM Portal) से हुई खरीदी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सामान की कीमतों में इतना अंतर क्यों है। इसकी भी जांच कराई जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि खरीद प्रक्रिया में कहां कमियां थीं। इन कमियों का किसी ने गलत फायदा तो नहीं उठाया। सामान खरीदने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी।

मंत्री से पूछा गया कि क्या खरीदी में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने जवाब दिया कि सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी खरीद में बड़ा खुलासा: मध्य प्रदेश के निकायों में 250 करोड़ की संभावित बचत, कीमतों में भारी अंतर | Major Revelation in Government Procurement: Rs 250 Crore Potential Savings in Madhya Pradesh Municipalities, Huge Price Differences
2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में! 200 LED बल्ब का बिल 60 लाख रुपए, MP के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीद पर उठे सवाल
21 Oct 2026 ,
By Sumit Kumar
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद पर बड़े सवाल उठे हैं। कहीं 2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में खरीदी गई। कहीं 200 एलईडी बल्ब का बिल 60 लाख रुपए बना। तीन साल में 374 निकायों ने 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए। अगर औसत मूल्य पर खरीदारी होती तो करीब 250 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद पर बड़े सवाल उठे हैं। कहीं 2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में खरीदी गई। कहीं 200 एलईडी बल्ब का बिल 60 लाख रुपए बना। तीन साल में 374 निकायों ने 1,134 करोड़ रुपए खर्च किए। अगर औसत मूल्य पर खरीदारी होती तो करीब 250 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी।

वायरल वीडियो से सामने आया मामला

सरकारी खरीदी का यह मामला विभागीय बैठक के वीडियो से चर्चा में आया। बैठक भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई थी।

इसमें नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे मौजूद थे। विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे और अन्य अधिकारी भी शामिल हुए थे। प्रदेश के नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

बैठक में तीन साल की सरकारी खरीदी का विश्लेषण पेश किया गया। एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एडिशनल एमडी अंशुमन राज ने प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया गया कि किस निकाय ने कितना सामान खरीदा। सामान की कीमत और कुल खर्च की जानकारी भी दी गई। कई निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों में बड़ा अंतर मिला।

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी। उनका कहना था कि अब खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।

200 एलईडी बल्ब पर 60 लाख खर्च

विभागीय बैठक में एलईडी बल्ब की खरीदी का मामला भी सामने आया था। अंशुमन राज ने बताया कि इसकी शुरुआत साल 2023 में हुई थी। उस समय वे एसडीएम के पद पर तैनात थे। एक नगर पालिका में 200 एलईडी बल्ब खरीदे जाने की शिकायत मिली थी। इन बल्बों की खरीदी पर 60 लाख रुपए खर्च होने की जानकारी थी।

इस हिसाब से एक बल्ब की कीमत करीब 30 हजार रुपए थी। इतनी अधिक कीमत सामने आने के बाद मामले की पड़ताल शुरू हुई। इसके बाद दूसरे नगरीय निकायों की खरीदी के आंकड़े भी जुटाए गए। इन आंकड़ों के विश्लेषण में कीमतों के कई बड़े अंतर सामने आए।

खेल सामग्री खरीदी में घोटाला: टेंडर से बचने के लिए लाखों की खरीद टुकड़ों में, 15 लाख में हॉकी टर्फ की सफाई पर सवाल | Sports Equipment Purchase Scam: Millions Bought in Parts to Avoid Tenders, Questions Raised on 15 Lakh Hockey Turf Cleaning
खेल सामग्री की खरीदी में बिलों का खेल, टेंडर से बचने के लिए लाखों की खरीद टुकड़ों में, 15 लाख में हॉकी टर्फ की सफाई
22 Oct 2026 ,
By Arun Tiwari
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ के खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीद संबंधी दस्तावेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही दिन में लाखों रूपए की खेल सामग्री के लिए कई अलग-अलग बिल जारी किए गए। आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने का रास्ता अपनाया गया।
<b>Raipur. </b>छत्तीसगढ़ के खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीद संबंधी दस्तावेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही दिन में लाखों रूपए की खेल सामग्री के लिए कई अलग-अलग बिल जारी किए गए। आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने का रास्ता अपनाया गया।

2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख में खरीदी

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बैठक में कचरा गाड़ियों की खरीदी का उदाहरण दिया था। उन्होंने बताया कि एक निकाय ने दो लाख रुपए में कचरा गाड़ी खरीदी। दूसरे निकाय ने इसी तरह की गाड़ी पर छह लाख रुपए खर्च किए। इस गाड़ी के साथ चार डस्टबिन भी शामिल थे।

संजय दुबे ने आशंका जताई कि अतिरिक्त सामान जोड़कर कीमत बढ़ाई गई होगी। उन्होंने परिचित विक्रेताओं के जरिए खरीदी कराने की आशंका भी जताई। बैठक में कुछ निकायों द्वारा डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीदने की जानकारी भी दी गई। हालांकि इस रकम में कितने वाहन खरीदे गए थे। इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

संजय दुबे ने ऐसे निकायों की जरूरत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ निकायों में पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं।

306 रुपए की लाइट 11,800 में खरीदी

सरकारी खरीदी के विश्लेषण में स्ट्रीट लाइट की कीमतों का अंतर भी मिला। प्रेजेंटेशन के अनुसार एक निकाय ने 60 वाट की एलईडी लाइट खरीदी थी। इसकी कीमत 306 रुपए प्रति लाइट दर्ज थी।

भोपाल में इसी तरह की लाइट की कीमत 11 हजार 800 रुपए दर्ज मिली। भोपाल में इस खरीदी का कुल बिल करीब 3 लाख 78 हजार रुपए था।

इस तरह एक ही श्रेणी की लाइट की कीमतों में बड़ा अंतर था। हालांकि दोनों लाइट की गुणवत्ता और तकनीकी जानकारी की जांच जरूरी है। इसके बाद ही कीमतों के अंतर का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

इंदौर बालिका हॉस्टल में बड़ा घोटाला: सब्जी विक्रेता को बनाया ठेकेदार, लाखों का गबन | Indore Girls Hostel Major Scam: Vegetable Vendor Made Contractor, Embezzlement of Lakhs
इंदौर में बालिका हॉस्टल वार्डन ने सब्जी विक्रेता को ही ठेकेदार, मजदूर बताकर भुगतान किया, कोविड में दूध, कॉस्मेटिक खरीदी
22 Oct 2026 ,
By Sanjay Gupta
इंदौर के एक बालिका हॉस्टल में पैसों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। हॉस्टल वार्डन मंजुला जरिया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि सब्जी बेचने वाले को कभी ठेकेदार तो कभी मजदूर बताया गया। इसके नाम पर कई बार भुगतान भी किया गया। कोविड के दौरान हॉस्टल बंद था। फिर भी दूध और कॉस्मेटिक सामान की खरीदी दिखाई गई।
इंदौर के एक बालिका हॉस्टल में पैसों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। हॉस्टल वार्डन मंजुला जरिया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि सब्जी बेचने वाले को कभी ठेकेदार तो कभी मजदूर बताया गया। इसके नाम पर कई बार भुगतान भी किया गया। कोविड के दौरान हॉस्टल बंद था। फिर भी दूध और कॉस्मेटिक सामान की खरीदी दिखाई गई।

5 रुपए का केमिकल 33,500 में?

सफाई सामग्री की खरीदी में भी कीमतों का बड़ा अंतर सामने आया था। यह मामला फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट नाम के केमिकल से जुड़ा है। इसका इस्तेमाल सफाई और कीटाणुओं को खत्म करने के लिए किया जाता है।

प्रेजेंटेशन में एक जगह इसकी कीमत पांच रुपए प्रति लीटर दर्ज मिली। दूसरी जगह इसी तरह के केमिकल की कीमत 33 हजार 500 रुपए बताई गई। सरदारपुर नगरीय निकाय ने 2500 लीटर केमिकल खरीदा था। इसके लिए करीब एक लाख 35 हजार रुपए खर्च किए गए।

वहीं राजगढ़ क्षेत्र के एक निकाय में 33 हजार 500 रुपए की कीमत दर्ज हुई। हालांकि यह कीमत कितनी मात्रा के लिए थी। उपलब्ध जानकारी में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए दोनों कीमतों की सही तुलना के लिए खरीद के दस्तावेज देखने होंगे।

1134 करोड़ की खरीदी में 250 करोड़ बच सकते थे

नगरीय प्रशासन विभाग ने तीन साल की सरकारी खरीदी का विश्लेषण कराया था। इसमें प्रदेश के 374 नगरीय निकायों के आंकड़े शामिल थे। इन निकायों ने जेम पोर्टल के जरिए करीब 1134 करोड़ रुपए खर्च किए। अलग-अलग निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों की तुलना की गई।

विश्लेषण में सामने आया कि कई सामान अलग-अलग दरों पर खरीदे गए। अंशुमन राज ने दावा किया कि औसत दरों पर खरीदी से खर्च कम होता। उनके मुताबिक करीब 250 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी। यह कुल खरीदी की रकम का लगभग 22 प्रतिशत है।

हालांकि 250 करोड़ रुपए संभावित बचत का अनुमान है। इसे सीधे उतनी राशि का घोटाला नहीं कहा जा सकता। वास्तविक अनियमितता का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा।

अजमेर: वीआईपी ट्रेड कंपनी पर शिकंजा, करोड़ों की धोखाधड़ी में 4 गिरफ्तार, निवेशकों से ठगी का खुलासा | Ajmer: VIP Trade Company Under Scanner, 4 Arrested in Multi-Crore Fraud, Investor Cheating Revealed
अजमेर में VIP ट्रेड कंपनी पर शिकंजा, करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार
22 Oct 2026 ,
By Jyoti Mahender Bhardwaj
अजमेर पुलिस की एसआईटी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी से जुड़े चार आरोपियों को करोड़ों रुपए की कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। कंपनी पर 8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर निवेश जुटाने और फॉरेक्स ट्रेडिंग व कॉलोनी के नाम पर लोगों को आकर्षित करने के आरोप हैं। अजमेर जिले में 40 मामले दर्ज हैं और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
अजमेर पुलिस की एसआईटी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी से जुड़े चार आरोपियों को करोड़ों रुपए की कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। कंपनी पर 8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर निवेश जुटाने और फॉरेक्स ट्रेडिंग व कॉलोनी के नाम पर लोगों को आकर्षित करने के आरोप हैं। अजमेर जिले में 40 मामले दर्ज हैं और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

किस सामान पर कितना खर्च हुआ?

विभागीय प्रेजेंटेशन में खरीदी की अलग-अलग मदों का ब्योरा भी दिया गया। पिछले तीन साल में गारबेज टिपर और डंपर पर करीब 65 करोड़ रुपए खर्च हुए। स्ट्रीट लाइट खरीदने पर करीब 49 करोड़ रुपए लगाए गए। ऑक्टागोनल पोल की खरीदी पर करीब 27 करोड़ रुपए खर्च हुए। सफाई के डिसइन्फेक्टेंट केमिकल पर लगभग 18 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

जबलपुर संभाग में करीब 202 करोड़ रुपए की खरीदी दर्ज हुई। बड़ोदिया कलां में करीब 97 लाख रुपए के ऑक्टागोनल पोल खरीदे गए। प्रेजेंटेशन में एक विक्रेता के अनुबंधों का भी उल्लेख हुआ। इस विक्रेता के 21 नगरपालिकाओं में करीब 201 अनुबंध बताए गए।

हालांकि ज्यादा अनुबंध मिलना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसके लिए खरीद प्रक्रिया और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

AI से सामने आया कीमतों का अंतर

अंशुमन राज ने बैठक में नई तकनीक की जानकारी भी दी थी। उन्होंने बताया कि सरकारी खरीदी के विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक से अलग-अलग नामों से दर्ज सामान की पहचान की जाती है। इसके बाद एक जैसे सामान की कीमतों की तुलना होती है। जहां कीमतों में असामान्य अंतर मिलता है। वहां खरीदी की जांच की जरूरत सामने आती है।

अंशुमन राज के मुताबिक इस तकनीक का उद्देश्य केवल सस्ता सामान खरीदना नहीं है। इसका मकसद कीमतों के अंतर की वजह समझना भी है। इस तकनीक से ई-टेंडर और कोटेशन के जरिए हुई खरीदी का विश्लेषण भी संभव है।

2500 लोगों की लॉगिन जानकारी लीक होने का दावा

विभागीय बैठक में साइबर सुरक्षा का मामला भी सामने आया था। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 2500 लोगों के लॉगिन विवरण लीक होने की सूचना मिली है।

इनमें ईमेल आईडी और यूजर आईडी के साथ पासवर्ड भी शामिल थे। अंशुमन राज ने यह जानकारी विभाग के साथ साझा की थी। उनके मुताबिक डार्क वेब पर मिले डेटा के विश्लेषण में ये विवरण सामने आए। कुछ कंप्यूटरों में जानकारी चुराने वाले मैलवेयर होने की आशंका भी जताई गई।

अधिकारियों को प्रभावित कंप्यूटरों की जांच कराने की सलाह दी गई थी। साथ ही पासवर्ड और ओटीपी साझा नहीं करने को कहा गया।

VLTD के नाम पर हजार करोड़ का घोटाला: खाचरियावास का राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप | Rs 1000 Crore Scam in the Name of VLTD: Khachariyawas's Serious Allegations Against Rajasthan Government
VLTD के नाम पर हजार करोड़ के घोटाले का खाचरियावास ने लगाया आरोप, कहा- ई-चालान में भी पांच हजार करोड़ की वसूली
19 Oct 2026 ,
By Jageshwar prasad
प्रताप सिंह खाचरियावास ने राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस पर घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वाहन मालिकों से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। खाचरियावास ने पूछा कि रसीद और वसूली के बीच का पैसा किसके पास जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस पर घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वाहन मालिकों से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। खाचरियावास ने पूछा कि रसीद और वसूली के बीच का पैसा किसके पास जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

उज्जैन संभाग ने पहले भी दिए थे निर्देश

सरकारी खरीदी के मामले में उज्जैन संभाग का एक पुराना पत्र भी चर्चा में है। संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास राजीव निगम ने यह पत्र जारी किया था। पत्र 24 अप्रैल 2026 का है।

इसमें नगरीय निकायों को जेम पोर्टल से खरीदी के निर्देशों का पालन करने को कहा गया था। पत्र में बताया गया था कि कुछ निकाय पोर्टल के बाहर निविदाएं निकाल रहे हैं। इनमें बिजली और सफाई सामग्री की खरीदी शामिल थी।

निर्माण सामग्री और मोटर पंप मरम्मत से जुड़ी निविदाएं भी थीं। कुछ निविदाओं की रकम 20 से 30 लाख रुपए तक थी। पत्र में नियमों के खिलाफ जारी निविदाएं निरस्त करने की सलाह दी गई थी। निर्देश नहीं मानने पर संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी थी।

एक तरफ विभाग ने जेम पोर्टल से खरीदी के निर्देश दिए थे। दूसरी तरफ इसी पोर्टल पर हुई खरीदी में कीमतों के बड़े अंतर मिले। अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे सरकार की उच्चस्तरीय जांच में सरकारी खरीदी से जुड़े कई सवाल महत्वपूर्ण होंगे।

सबसे बड़ा सवाल सामान की कीमतों में अंतर का है। एक जैसे सामान के लिए अलग-अलग निकायों ने अलग कीमत क्यों चुकाई?

यह भी देखना होगा कि सामान की गुणवत्ता में कितना अंतर था। खरीदी के समय कौन सी शर्तें लागू थीं? क्या अतिरिक्त सामान या सेवाओं के कारण कीमत बढ़ी थी?

जांच में संबंधित अधिकारियों और विक्रेताओं की भूमिका भी देखी जाएगी। खरीद प्रक्रिया की कमियों का किसी ने गलत फायदा तो नहीं उठाया?

फिलहाल मंत्री प्रतिमा बागरी ने उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। जांच के लिए समिति गठित होने या किसी अधिकारी पर कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही वास्तविक गड़बड़ियों और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट होगी।
Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • नगरीय निकाय
  • प्रतिमा बागरी
  • वायरल वीडियो
  • GeM Portal
  • अपर मुख्य सचिव संजय दुबे
  • एमपी न्यूज
  • जबलपुर
  • जेम पोर्टल
  • नगरीय प्रशासन विभाग
दिवाली पर जयपुर से बेंगलुरु जाना होगा आसान, रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन; यात्रियों को मिलेगी राहत

By Jyoti Mahender Bhardwaj

दिवाली पर जयपुर से बेंगलुरु जाना होगा आसान, रेलवे चलाएगा स्पेशल ट्रेन; यात्रियों को मिलेगी राहत
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर सियासी घमासान: भूपेश बघेल ने पूछा- 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने में सरकार को क्या परेशानी?

By Umeshwari Baghel

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर सियासी घमासान: भूपेश बघेल ने पूछा- 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने में सरकार को क्या परेशानी?
जयपुर पंचायत चुनाव: 3 बजे तक 49.34% मतदान, मौजमाबाद-दूदू सबसे आगे; गोविंदगढ़ पीछे

By Ashish Bhardwaj

जयपुर पंचायत चुनाव: 3 बजे तक 49.34% मतदान, मौजमाबाद-दूदू सबसे आगे; गोविंदगढ़ पीछे
एमपी के कर्मचारियों ने की 2% महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग, नहीं बढ़ा DA तो मनाएंगे काली दिवाली

By Sandeep Kumar

एमपी के कर्मचारियों ने की 2% महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग, नहीं बढ़ा DA तो मनाएंगे काली दिवाली
सूरजगढ़ के कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार बोले- छोरे की सगाई भी करवा दूंगा, पंचायत चुनाव में वीडियो वायरल

By Ashish Bhardwaj

सूरजगढ़ के कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार बोले- छोरे की सगाई भी करवा दूंगा, पंचायत चुनाव में वीडियो वायरल
डीएपी की किल्लत: नरेश मीणा हजारों किसानों के साथ एसडीएम ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे, खाद उपलब्ध कराने की मांग

By Jageshwar prasad

डीएपी की किल्लत: नरेश मीणा हजारों किसानों के साथ एसडीएम ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे, खाद उपलब्ध कराने की मांग
छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा: पेड़ से टकराई यात्रियों से भरी बस, बच्ची समेत 6 की मौत, 15 से ज्यादा घायल

By Umeshwari Baghel

छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा: पेड़ से टकराई यात्रियों से भरी बस, बच्ची समेत 6 की मौत, 15 से ज्यादा घायल