खेल सामग्री की खरीदी में बिलों का खेल, टेंडर से बचने के लिए लाखों की खरीद टुकड़ों में, 15 लाख में हॉकी टर्फ की सफाई
Arun Tiwari | Oct 22, 2026, 14:22 IST
खेल विभाग की खरीदी में गड़बड़ी का आरोप
Raipur. छत्तीसगढ़ के खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीद संबंधी दस्तावेजों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही दिन में लाखों रूपए की खेल सामग्री के लिए कई अलग-अलग बिल जारी किए गए। आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने का रास्ता अपनाया गया।
वहीं, कुछ बड़े भुगतानों के लिए टेंडर या कोटेशन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
हैरानी की बात यह है कि एक ही तारीख पर जूडो, खो-खो और कबड्डी मैट जैसी खेल सामग्रियों के लिए अलग-अलग और तीन लाख रूपए से कम के बिल टुकड़ों में बनाए गए। इसके अलावा, वेटलिफ्टिंग उपकरणों की करीब 30 लाख रूपए की खरीद, हॉकी टर्फ की सफाई के लिए 15 लाख रूपए से अधिक का भुगतान और दो अन्य बिलों के जरिए करीब 1.50 करोड़ रूपए के भुगतान ने खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी हासिल की है। खेल सामग्री की खरीदी में बिलों के विभाजन का संदेह 30 अगस्त 2024 की खरीद से सामने आता है।
इस दिन जूडो मैट के लिए दो अलग-अलग बिल बनाए गए। बिल नंबर 189 के तहत 2 लाख 97 हजार 440 रूपए और बिल नंबर 190 के तहत 2 लाख 98 हजार 240 रूपए की सामग्री खरीदी गई। इसी दिन खेल सामग्री के तीन अन्य बिल भी जारी किए गए। बिल नंबर 191 के तहत 2 लाख 92 हजार 757 रूपए के खो-खो मैट, बिल नंबर 192 के तहत 2 लाख 98 हजार 400 रूपए के कबड्डी मैट और बिल नंबर 193 के तहत 2 लाख 98 हजार 400 रूपए के कबड्डी मैट ट्रैक की खरीदी की गई।
इन पांच बिलों की कुल राशि 14 लाख 85 हजार 237 रूपए होती है। सभी बिलों की राशि तीन लाख रूपए से कम है, लेकिन एक ही तारीख पर कई खेल सामग्रियों की खरीदी की गई। यहां सवाल उठता है कि क्या अलग-अलग खरीदी करने के बजाय यह खरीद एक ही टेंडर के माध्यम से नहीं की जा सकती थी।
इसके बाद 1 अक्टूबर 2024 को बिल नंबर 272 के तहत 5 लाख 90 हजार रूपए के जूडो मैट की खरीदी की गई। इसी तारीख को बिल नंबर 271 के माध्यम से 5 लाख 88 हजार 768 रूपए का मल्टी जिम खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब सवाल यह है कि इन खरीदारियों के लिए लागू नियम क्या थे और भुगतान से पहले किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खरीद सीमा और निविदा प्रक्रिया को लेकर है। तीन लाख रूपए से अधिक की खरीद पर ई-टेंडर या सार्वजनिक निविदा आवश्यक थी। ऐसे में तीन लाख रूपए से कम राशि के कई बिलों में एक जैसी या संबंधित सामग्री की खरीद दर्ज होने पर संदेह पैदा होता है।
यदि एक ही जरूरत के लिए पहले से योजना बनाकर खरीद को अलग-अलग बिलों में बांटा गया और ऐसा करने का उद्देश्य निविदा की अनिवार्यता से बचना था, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है।
यह स्पष्ट होना चाहिए कि जूडो मैट, खो-खो मैट और कबड्डी मैट की तकनीकी विशिष्टताएं क्या थीं। अलग-अलग खेलों में उपयोग होने वाली मैट को केवल नाम के आधार पर एक समान नहीं माना जा सकता। उनकी गुणवत्ता, आकार, उपयोग और तकनीकी मानकों की तुलना के आधार पर यह जांचना जरूरी है कि क्या इनकी एक साथ खरीदी नहीं की जा सकती थी।
खेल सामग्री की खरीदी के अलावा सेवाओं के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 19 मार्च 2025 को बिल नंबर 573 के तहत रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव के हॉकी टर्फ की सफाई के लिए 15 लाख 4 हजार 500 रूपए का भुगतान किया गया। यह भुगतान केवल तीसरी तिमाही के लिए था।
यदि यह राशि तीन महीने की सफाई सेवा के बदले दी गई, तो पूरे वित्तीय वर्ष में इस मद पर होने वाला कुल खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है।
इस मामले में यह जानना जरूरी है कि सफाई कार्य के लिए कार्यादेश किस एजेंसी को दिया गया, भुगतान किन शर्तों पर हुआ, काम पूरा होने का प्रमाण किस अधिकारी ने दिया और सेवा की गुणवत्ता का सत्यापन कैसे किया गया। यदि इस राशि के भुगतान के लिए लागू नियमों के तहत निविदा या कोटेशन आवश्यक था, तो उससे जुड़े रिकॉर्ड की उपलब्धता भी स्पष्ट होनी चाहिए।
खरीद प्रक्रिया से जुड़ा एक अन्य गंभीर सवाल 23 मार्च 2025 के दो बिलों को लेकर है। बिल नंबर 633 के तहत 61 लाख 33 हजार 546 रूपए और बिल नंबर 634 के तहत 88 लाख 47 हजार 453 रूपए की खरीद की गई। दोनों बिलों की कुल राशि 1 करोड़ 49 लाख 80 हजार 999 रूपए है।
इतनी बड़ी राशि की खरीद के मामले में टेंडर, दर निर्धारण, तकनीकी स्वीकृति, आपूर्ति आदेश और सामग्री प्राप्ति से संबंधित दस्तावेजों का महत्व और बढ़ जाता है। इन भुगतानों के साथ टेंडर या कोटेशन से जुड़े दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।
हालांकि, दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने और प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने में अंतर है। इन दोनों बिलों में खरीदी गई सामग्री का विवरण, संबंधित वेंडर का नाम, वस्तुओं की मात्रा और प्रति इकाई दर सार्वजनिक होने पर मामले की वास्तविक तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
18 अक्टूबर 2024 को बिल नंबर 307 के तहत 29 लाख 94 हजार 985 रूपए की वेटलिफ्टिंग सामग्री खरीदी गई। आरोप है कि इस खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाए जाने और उपकरणों के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
वेटलिफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाले बारबेल, प्लेट, बेंच और अन्य उपकरणों की गुणवत्ता खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है। उपकरणों की मजबूती, भार सहने की क्षमता और तकनीकी मानकों में कमी होने पर अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।
10 मार्च 2025 को बिल नंबर 543 के तहत तंदूरी क्लब, रायपुर को 6 लाख 39 हजार 527 रूपए का भुगतान किया गया। इस भुगतान के साथ टेंडर या कोटेशन का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह, 1 अक्टूबर 2024 को 5 लाख 88 हजार 768 रूपए के मल्टी जिम की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सवाल है कि खरीद छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) की स्वीकृत दरों पर की गई थी या किसी अन्य प्रक्रिया के माध्यम से। यदि खरीद किसी अन्य प्रक्रिया के तहत हुई थी, तो उसकी वैधानिकता और दरों की उचितता की जांच की जानी चाहिए।
खेल विभाग की खरीद प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित खरीदारियों के लिए किस वित्तीय नियम का पालन किया गया, क्या किसी खरीद को जानबूझकर छोटे बिलों में विभाजित किया गया और क्या सभी भुगतान वास्तविक आपूर्ति या सेवा के आधार पर किए गए।
साथ ही, वेंडरों के चयन, बाजार दरों से तुलना, सामग्री की गुणवत्ता, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि और भुगतान की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल जरूरी है।
इस मामले में प्रमुख सवाल ये हैं:
खेल विभाग की खरीद में पारदर्शिता केवल सरकारी धन के सही इस्तेमाल का सवाल नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजों के आधार पर जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
हैरानी की बात यह है कि एक ही तारीख पर जूडो, खो-खो और कबड्डी मैट जैसी खेल सामग्रियों के लिए अलग-अलग और तीन लाख रूपए से कम के बिल टुकड़ों में बनाए गए। इसके अलावा, वेटलिफ्टिंग उपकरणों की करीब 30 लाख रूपए की खरीद, हॉकी टर्फ की सफाई के लिए 15 लाख रूपए से अधिक का भुगतान और दो अन्य बिलों के जरिए करीब 1.50 करोड़ रूपए के भुगतान ने खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ही दिन में पांच बिल
इस दिन जूडो मैट के लिए दो अलग-अलग बिल बनाए गए। बिल नंबर 189 के तहत 2 लाख 97 हजार 440 रूपए और बिल नंबर 190 के तहत 2 लाख 98 हजार 240 रूपए की सामग्री खरीदी गई। इसी दिन खेल सामग्री के तीन अन्य बिल भी जारी किए गए। बिल नंबर 191 के तहत 2 लाख 92 हजार 757 रूपए के खो-खो मैट, बिल नंबर 192 के तहत 2 लाख 98 हजार 400 रूपए के कबड्डी मैट और बिल नंबर 193 के तहत 2 लाख 98 हजार 400 रूपए के कबड्डी मैट ट्रैक की खरीदी की गई।
इन पांच बिलों की कुल राशि 14 लाख 85 हजार 237 रूपए होती है। सभी बिलों की राशि तीन लाख रूपए से कम है, लेकिन एक ही तारीख पर कई खेल सामग्रियों की खरीदी की गई। यहां सवाल उठता है कि क्या अलग-अलग खरीदी करने के बजाय यह खरीद एक ही टेंडर के माध्यम से नहीं की जा सकती थी।
इसके बाद 1 अक्टूबर 2024 को बिल नंबर 272 के तहत 5 लाख 90 हजार रूपए के जूडो मैट की खरीदी की गई। इसी तारीख को बिल नंबर 271 के माध्यम से 5 लाख 88 हजार 768 रूपए का मल्टी जिम खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब सवाल यह है कि इन खरीदारियों के लिए लागू नियम क्या थे और भुगतान से पहले किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
क्या टेंडर नियमों से बचने के लिए बांटे गए बिल?
यदि एक ही जरूरत के लिए पहले से योजना बनाकर खरीद को अलग-अलग बिलों में बांटा गया और ऐसा करने का उद्देश्य निविदा की अनिवार्यता से बचना था, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है।
यह स्पष्ट होना चाहिए कि जूडो मैट, खो-खो मैट और कबड्डी मैट की तकनीकी विशिष्टताएं क्या थीं। अलग-अलग खेलों में उपयोग होने वाली मैट को केवल नाम के आधार पर एक समान नहीं माना जा सकता। उनकी गुणवत्ता, आकार, उपयोग और तकनीकी मानकों की तुलना के आधार पर यह जांचना जरूरी है कि क्या इनकी एक साथ खरीदी नहीं की जा सकती थी।
बिना टेंडर 15 लाख रूपए से अधिक में हॉकी टर्फ की सफाई?
यदि यह राशि तीन महीने की सफाई सेवा के बदले दी गई, तो पूरे वित्तीय वर्ष में इस मद पर होने वाला कुल खर्च इससे कहीं अधिक हो सकता है।
इस मामले में यह जानना जरूरी है कि सफाई कार्य के लिए कार्यादेश किस एजेंसी को दिया गया, भुगतान किन शर्तों पर हुआ, काम पूरा होने का प्रमाण किस अधिकारी ने दिया और सेवा की गुणवत्ता का सत्यापन कैसे किया गया। यदि इस राशि के भुगतान के लिए लागू नियमों के तहत निविदा या कोटेशन आवश्यक था, तो उससे जुड़े रिकॉर्ड की उपलब्धता भी स्पष्ट होनी चाहिए।
दो बिलों में 1.49 करोड़ रूपए से अधिक की खरीद
इतनी बड़ी राशि की खरीद के मामले में टेंडर, दर निर्धारण, तकनीकी स्वीकृति, आपूर्ति आदेश और सामग्री प्राप्ति से संबंधित दस्तावेजों का महत्व और बढ़ जाता है। इन भुगतानों के साथ टेंडर या कोटेशन से जुड़े दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।
हालांकि, दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने और प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने में अंतर है। इन दोनों बिलों में खरीदी गई सामग्री का विवरण, संबंधित वेंडर का नाम, वस्तुओं की मात्रा और प्रति इकाई दर सार्वजनिक होने पर मामले की वास्तविक तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
करीब 30 लाख रूपए के वेटलिफ्टिंग उपकरण
वेटलिफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाले बारबेल, प्लेट, बेंच और अन्य उपकरणों की गुणवत्ता खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है। उपकरणों की मजबूती, भार सहने की क्षमता और तकनीकी मानकों में कमी होने पर अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।
तंदूरी क्लब को 6.39 लाख रूपए का भुगतान
इसी तरह, 1 अक्टूबर 2024 को 5 लाख 88 हजार 768 रूपए के मल्टी जिम की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सवाल है कि खरीद छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) की स्वीकृत दरों पर की गई थी या किसी अन्य प्रक्रिया के माध्यम से। यदि खरीद किसी अन्य प्रक्रिया के तहत हुई थी, तो उसकी वैधानिकता और दरों की उचितता की जांच की जानी चाहिए।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
साथ ही, वेंडरों के चयन, बाजार दरों से तुलना, सामग्री की गुणवत्ता, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि और भुगतान की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल जरूरी है।
इस मामले में प्रमुख सवाल ये हैं:
- क्या एक ही दिन में संबंधित खेल सामग्रियों की खरीद को अलग-अलग बिलों में बांटने का कोई वैध आधार था?
- क्या संबंधित खरीदों पर लागू निविदा नियमों का पालन किया गया?
- 1.49 करोड़ रूपए से अधिक के दो भुगतानों में खरीदी गई सामग्री और आपूर्ति संबंधी दस्तावेज क्या हैं?
- हॉकी टर्फ की सफाई और अन्य सेवाओं के भुगतान के लिए किस प्रक्रिया का पालन हुआ?
- वेटलिफ्टिंग उपकरणों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच किसने की?
- क्या सभी खरीदारियों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति नियमानुसार ली गई थी?
खेल विभाग की खरीद में पारदर्शिता केवल सरकारी धन के सही इस्तेमाल का सवाल नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजों के आधार पर जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
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